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सरकारी नौकरी के लिए किया इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कि सकते में आ गई सरकार
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 17 Oct 2017 08:09 AM IST
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वन विभाग में हड़कंप
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सरकारी नौकरी की ललक में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ कि अब इसके खुलासे के बाद से सरकार भी सकते में आ गई है।
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उत्तराखंड शिक्षा विभाग के बाद अब वन विभाग में भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां होने की बात सामने आई है। एक गोपनीय पत्र से इसकी पोल खुलने के बाद वन विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है।
आनन-फानन में जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद देहरादून वन प्रभाग के 43 वन कर्मचारी जांच की रडार पर आ गए हैं। इनमें से कई कर्मचारियों के शैक्षिक दस्तावेज फर्जी होने की आशंका है। सभी कर्मचारियों के शैक्षिक दस्तावेजों को संबंधित बोर्ड को भेजा गया है। वहां से सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वन प्रभाग में बीते दिनों एक गोपनीय पत्र आया
शैक्षिक दस्तावेजों की जांच होगी
- फोटो : सांकेतिक चित्र
बताया जा रहा है कि देहरादून वन प्रभाग में बीते दिनों एक गोपनीय पत्र आया था, जिसमें कई वन आरक्षियों के फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी करने की बात कही गई थी।
सबसे ज्यादा शक दैनिक श्रमिकों से नियमित हुए वन आरक्षियों को लेकर है। इस खत के आने के बाद हरकत में आए वन विभाग ने 2008 से जो भी व्यक्ति दैनिक श्रमिक से नियमित वन आरक्षी बना है, सभी के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराने का फैसला लिया।
विभाग ने सभी वन कर्मचारियों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए संबंधित बोर्ड और संस्थाओं को भेज भी दिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सबसे ज्यादा शक दैनिक श्रमिकों से नियमित हुए वन आरक्षियों को लेकर है। इस खत के आने के बाद हरकत में आए वन विभाग ने 2008 से जो भी व्यक्ति दैनिक श्रमिक से नियमित वन आरक्षी बना है, सभी के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराने का फैसला लिया।
विभाग ने सभी वन कर्मचारियों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए संबंधित बोर्ड और संस्थाओं को भेज भी दिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मृतक आश्रित कोटे की भर्ती में सतर्कता
भर्ती में भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने के मामले और शिकायतें सामने आने के बाद वन विभाग ने मृतक आश्रित कोटे से हो रही भर्ती में भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। वन संरक्षक शिवालिक मीनाक्षी जोशी के अनुसार अब मृतक आश्रितों के प्रमाण-पत्रों की पहले संबंधित बोर्ड से प्रमाणिकता की पुष्टि व अन्य जांच होने के बाद ही नियुक्ति दी जा रही है।
एक शिकायती पत्र आया था। इसमें कुछ वन कर्मचारियों के संदिग्ध प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी पाने की बात कही गई थी। इसके बाद 2008 के बाद जो भी दैनिक श्रमिक वन आरक्षी पद पर तैनात हुआ है, उन सभी के शैक्षिक प्रमाण-पत्र आदि की जांच कराने का फैसला किया गया है। प्रमाण-पत्रों को संबंधित बोर्ड को भेज भी दिया गया है। पूर्व में भी वन विभाग में एक प्रकरण आया था, जिसमें सख्त कार्रवाई की गई थी।
- प्रसन्न पात्रो, प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून वन प्रभाग
शिक्षकों की नियुक्तियों में भी जमकर हुआ फर्जीवाड़ा
इससे पहले प्रदेश में शिक्षकों के फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आ चुका है। इस मामले में अब तक 34 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, कुछ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के गठित एसआईटी को 146 शिक्षकों की शिकायतें मिली हैं।
एक शिकायती पत्र आया था। इसमें कुछ वन कर्मचारियों के संदिग्ध प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी पाने की बात कही गई थी। इसके बाद 2008 के बाद जो भी दैनिक श्रमिक वन आरक्षी पद पर तैनात हुआ है, उन सभी के शैक्षिक प्रमाण-पत्र आदि की जांच कराने का फैसला किया गया है। प्रमाण-पत्रों को संबंधित बोर्ड को भेज भी दिया गया है। पूर्व में भी वन विभाग में एक प्रकरण आया था, जिसमें सख्त कार्रवाई की गई थी।
- प्रसन्न पात्रो, प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून वन प्रभाग
शिक्षकों की नियुक्तियों में भी जमकर हुआ फर्जीवाड़ा
इससे पहले प्रदेश में शिक्षकों के फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आ चुका है। इस मामले में अब तक 34 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, कुछ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के गठित एसआईटी को 146 शिक्षकों की शिकायतें मिली हैं।