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भारत को दहलाने वाला है बड़ा भूकंप, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

Mon, 25 Dec 2017 08:38 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 25 Dec 2017 08:38 AM IST
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big earthquake may hit india
earthquake - फोटो : Indilinks
पांच सौ साल बाद भारत के कई इलाकों पर ऐसा कहर मंडरा रहा है। जिससे विज्ञान जगत सकते में हैं। भूकंप के मामले में उच्च हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता हर रोज बढ़ रही है। 
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जी हां, हिमालय पर स्ट्रेस बढ़ने से भूकंपीय पट्टियां कुंभकरणीय नींद से जाग रही हैं। कहीं इन पट्टियों को कुछ साल हुए हैं तो कहीं भूकंप पट्टी पांच-छह सौ साल बाद जागी है। भूंकप विज्ञानियों की इससे चिंता बढ़ गई है। 
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मध्य हिमालय क्षेत्र उत्तराखंड की देहरादून और गैरसैंण दोनों राजधानियों की संवेदनशीलता बढ़ती जा रही है। हिमालयी क्षेत्र में साढ़े चार हजार भूकंप पट्टियां चिन्हित हैं और देहरादून में अभी तक 22 पट्टियों को चिन्हित किया है।
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big earthquake may hit india
भूकंप - फोटो : self
भूकंप के मामले में उच्च हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता हर रोज बढ़ रही है। जैसे-जैसे इंडियन प्लेट का मूवमेंट यूरेशियन प्लेट के नीचे बढ़ता हैभूकंपीय संवेदनशीलता में इजाफा हो जाता है।

 

23 सितंबर को कश्मीर के संबल क्षेत्र में आए भूकंप ने सबको चौंका दिया है। वर्ष 2005 में आठ अक्तूबर को यहीं पास में 7.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आ चुका है।
 

यह भूकंप क्षेत्र 562 साल से सोया हुआ था। ग्रेट भूकंप हर 500साल में रिपीट होता है। इसी तरह हिंदूकुश इलाके में भूकंप पट्टियों की सक्रियता बढ़ी है।

 

big earthquake may hit india
earthquake
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जोन चार में है, लेकिन घाटी होने के कारण यहां संवेदनशीलता अधिक हो गई है। मिट्टी और पानी होने से यहांनुकसान अधिक हो सकता है।

 

इस संबंध में नेशनल सेंटर फॉर सीइसमोलोजी के निदेशक डॉ. विनीत के. गहलोत ने इस पर शोध किया है। इसी तरह जोन पांच आने पर गैरसैंण अधिक संवेदनशील हो गया है।

विज्ञानी इसका आकलन कर रहे हैं। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. एके गुप्ता की अगुवाई में हुए शोध में दून में 22 भूकंपपट्टियां चिन्हित की गईं। हिमालयी क्षेत्र में इनकी संख्या साढ़े चार हजार से अधिक है। हिमालय में बढ़े रहे स्ट्रेस से ये खतरे का निशान बन गई  हैं।

भाभा चेयर प्रोफेसर बीपी डिमरी ने बताईं भूकंप की निशानियां

big earthquake may hit india

(सेंट्रल यूनिवर्सिटी हैदराबाद के भाभा चेयर प्रोफेसर बीपी डिमरी ने बताईं ये निशानियां)
-भूकंप आने के हफ्ता भर पहले से तापमान में अचानक बदलाव आता है, तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है।
-भूगर्भ से हीलियम गैस का रिसाव होने लगता है।
-जलस्रोतों, तालाब, कुओं में पानी घट जाएगा या बहुत बढ़ जाएगा।
-अचानक नदियों और नालों में पानी बढ़ने लगे या घट जाए।
-पशु-पक्षियों में बेचैन नजर आने लगें।
-पानी के रंग में बदलाव आए या स्वाद में बदलाव आए।

ये हैं साक्ष्य
-भुज, नेपाल में भूकंप के दौरान तापमान तीन से चार डिग्री सेल्सियस बढ़ा था।
-उत्तरकाशी भूकंप के 10 दिन पहले झरनों के पानी से कपड़े साफ होना बंद हो गए।
-लातूर भूकंप के हफ्ता भर पहले नील कंठेश्वर कुंड का पानी गायब हो गया था। 

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