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समाज को छोड़, हो रहा रिश्तेदारों का कल्याण
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 21 Nov 2013 05:10 PM IST
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राजधानी देहरादून स्थित समाज कल्याण विभाग में इन दिनों काफी हंगामा बरपा है। विभागीय अधिकारियों ने 60 पदों पर अपने भाई-भतीजों को नौकरी पर रख लिया है।
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लेकिन वे यह नहीं बता पा रहे हैं कि नौकरी किस आधार पर दी गई। पता चला है कि एक प्रशासनिक अधिकारी ने अपनी बेटी को मृतक आश्रित कोटे में तैनाती दिला दी है।
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अधिकारियों में घमासान
यही नहीं, यहां प्रोन्नति के संबंध में पुराने और नये अधिकारियों में घमासान मचा है। विभाग के आला अफसर छीछालेदर से बचने के लिए मामले को दबाए हुए हैं। अब अंदरखाने इसकी जांच शुरू की गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि नई नियमावली के तहत नए अधिकारियों की सूची प्रोन्नति के लिए शासन के पास भेजी गई है।
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यह बात पुराने अधिकारियों को खल गई। उनका कहना है कि सीनियर तेरह साल से पड़े हैं और ‘फर्जी’ तरीके से नियमावली तैयार कर जूनियरों को प्रोन्नति दी जा रही है। इस पर सीनियरों ने पोल खोलो अभियान शुरू किया है। लोग आरटीआई के तहत सूचनाएं मांग रहे हैं। उधर, नियुक्तियों के मामले पर अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा है।
भाई-भतीजों को पहले रखा संविदा पर
नौकरी के लिए खेल कुछ ऐसे हुआ कि राज्य बनने के बाद अधिकारियों ने अपने भाई-भतीजों को पहले संविदा पर रखा, फिर साल-डेढ़ साल में उन्हें स्थायी करा दिया।
ऐसे कई कर्मचारी सचिवालय में भी काम कर रहे हैं। एक अधिकारी ने शासन को सूचना दी है कि हल्द्वानी स्थित समाज कल्याण निदेशालय में कार्यरत एक प्रशासनिक अधिकारी की बेटी मृतक आश्रित संवर्ग में नौकरी कर रही है।
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उनकी पत्नी भी इसी विभाग में काम करती थी, बाद में उनकी मृत्यु हो गई। मामले का खुलासा होने पर कुछ अधिकारियों ने विभाग के खिलाफ सत्याग्रह छेड़ने की धमकी दी है। इस संबंध में निदेशक समाज कल्याण विनोद कुमार सुमन का कहना है कि गड़बड़ियों की जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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