लाइसेंस मिलने से पहले बना लिया लाखों का सैनिटाइजर, आबकारी विभाग ने मारा छापा
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सिडकुल की वीएलसीसी कंपनी में लाइसेंस लेने से पहले ही सैनिटाइजर बनाने के का भंडाफोड़ हुआ है। आबकारी विभाग की टीम के छापामार कार्रवाई में खुलासा हुआ कि कंपनी ने लाइसेंस जून में लिया और दो महीने पहले अप्रैल से सैनिटाइजर बनाना शुरू कर दिया था। कंपनी अब तक कई लाख लीटर सैनिटाइजर देशभर में बेच चुकी है। विभाग ने कंपनी को दिए लाइसेंस को निरस्त करने की सिफारिश आबकारी कमिश्नर सुशील कुमार से की है।
जानकारी के अनुसार सिडकुल में श्रृंगार उत्पाद बनाने वाली वीएलसीसी कंपनी को आठ जून को सैनिटाइजर बनाने का लाइसेंस जारी हुआ था। सोमवार को आबकारी विभाग को सूचना मिली थी कि लाइसेंस जारी होने से पहले ही कंपनी सैनिटाइजर बना रही है। सूचना मिलने पर डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप कुमार, जिला आबकारी अधिकारी पवन कुमार सिंह, टेकिभनकल अफसर शिवेंद्र सिंह की अगुवाई में टीम ने कंपनी में छापा मारा। सोमवार शाम से लेकर मंगलवार तड़के तक चली छापेमारी के दौरान सामने आया कि कंपनी अप्रैल माह से सैनिटाइजर बना रही थी।
करीब सात लाख लीटर सैनिटाइजर कंपनी बना चुकी है और कंपनी कैंपस में करीब एक लाख लीटर मिला है। छह लाख लीटर देशभर के विभिन्न हिस्सों में बेचा जा चुका है। जिला आबकारी अधिकारी पवन कुमार सिंह ने बताया कि बरामद सैनिटाइजर जब्त कर लिया गया है। कंपनी को नोटिस जारी किया गया है कि देश भर में भेजे गए सैनिटाइजर को भी वापस मंगवा लिया जाए। उन्होंने बताया कि आठ जून को जारी हुआ लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट कमिश्नर आबकारी विभाग को भेज दी है।
सैनिटाइजर की गुणवत्ता पर सवाल
हरिद्वार। वीएलसीसी कंपनी ने जहां छह लाख लीटर सैनिटाइजर बाजार में उतारकर करोड़ों के वारे न्यारे किए वहीं जीएसटी की चोरी से लेकर आमजन की सुरक्षा के संग भी बड़ा खिलवाड़ किया है। जब सैनिटाइजर बनाने का लाइसेंस ही नहीं था, फिर भला कैसे उत्पादन किया गया।
जानकारी के अनुसार सैनिटाइजर बनाने में कई तरह के पदार्थों का इस्तेमाल होता है। कुछ पदार्थ के इस्तेमाल से बनने वाले सैनिटाइजर में आबकारी विभाग का कंट्रोल नहीं है, लेकिन कुछ पदार्थ ऐसे है, जिन पर महकमे का कंट्रोल है। अब सवाल यह उठता है कि छह लाख लीटर सैनिटाइजर किस पदार्थ से बनाया गया था।
इसका खुलासा तो देश भर में भेज दी गई सैनिटाइजर की बड़ी खेप की वापसी से ही हो सकता है। बड़ा सवाल यह है कि आमजन की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया है। यही नहीं जीएसटी चोरी की बात भी साफ साफ दिखाई दे रही है। करोड़ों की रकम कंपनी ने डकार ली है। जिला आबकारी अधिकारी पवन कुमार सिंह ने बताया कि उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। उसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
आबकारी निरीक्षक की भूमिका संदिग्ध
एफआईआर दर्ज करने को लेकर चल रहा मंथन
सैनिटाइजर के गोरखधंधे को लेकर कंपनी प्रबंधन पर धोखाधड़ी समेत प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है। अंदरखाने इस पर पूरा मंथन चल रहा है। दरअसल बिना लाइसेंस के सैनिटाइजर बनाना धोखाधड़ी की ही श्रेणी में आता है। इसके अलावा कंपनी एक्ट में भी कार्रवाई के प्रावधान तलाशे जा रहे हैं।
कंपनी ने जो सैनिटाइजन बनाया है, उसके लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं थी। कंपनी गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं करती है और न ही आमजन की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ किया गया है। आबकारी विभाग की जांच में पूरी मदद की जा रही है।
- अशोक राजपूत, प्लांट हेड, वीएलसीसी सिडकुल