नोटबंदी के असर से बैंकों को हुआ ये बड़ा नुकसान
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नोटबंदी के बाद बैंकों में पैसा तो खूब जमा हुआ है, लेकिन लोन बांटने के मामले में पिछड़ने की वजह से बैंकों का ऋण-जमा अनुपात बुरी तरह से गिर गया है।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में सीडी रेशियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैंकों को निर्देश दिए गए कि वे प्रमुखता से अपना अनुपात बढ़ाने पर काम करें।
शुक्रवार को सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित हुई 60वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में ऋण-जमा अनुपात का मामला उठा। प्रदेश के बैंकों में नोटबंदी से पहले सितंबर 2016 में ऋण-जमा अनुपात 57 प्रतिशत से घटकर दिसंबर 2016 में 52 प्रतिशत पर आ गया।
प्रदेश में यूको बैंक, सिंडिकेट बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र का सीडी रेशियो दिसंबर 2016 में 40 प्रतिशत से नीचे रहा है। सबसे कम सीडी रेशियो इंडियन बैंक का 21 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
ऋण-जमा अनुपात 30 प्रतिशत से भी कम
पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, चंपावत और बागेश्वर में ऋण-जमा अनुपात 30 प्रतिशत से भी कम रिकॉर्ड किया गया है। मुख्य सचिव एस रामास्वामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी बैंकों को निर्देश दिए गए कि वे अपना सीडी रेशियो सुधारें।
खूब बरसे नोट, लोन में पिछड़े बैंक
नोटबंदी का असर बैंकों के ऋण आवंटन पर भी पड़ा है। बैंकों ने अपने 31 मार्च 2017 तक के 16,385 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक केवल 54 प्रतिशत यानी 8922 करोड़ रुपये के लोन बांटे हैं। सावधि ऋण (इनवेस्टमेंट क्रेडिट) का लोन सबसे कम 29 प्रतिशत रहा, जबकि नोन फॉर्म सेक्टर का ऋण सबसे अधिक 77 प्रतिशत बांटा गया। कृषि क्षेत्र में 43 प्रतिशत लोन बांटा गया है। बैंकों को निर्देश दिए गए कि वह अपने लक्ष्य को 31 मार्च तक पूरा करें। अक्तूबर से दिसंबर 2016 के बीच बैंकों में 10322 करोड़ रुपये जमा हुए हैं।
क्या होता है ऋण-जमा अनुपात
बैंक में जो पैसा डिपॉजिट करते हैं, उस पर बैंक ग्राहक को ब्याज देता है। इस ब्याज की पूर्ति जमा हुई रकम को ऋण में देकर उससे आने वाले ब्याज से की जाती है। बैंक में जमा डिपॉजिट और बांटे गए लोन के अनुपात को ऋण-जमा अनुपात कहते हैं। आमतौर पर 60 प्रतिशत के अनुपात को आदर्श सीडी रेशियो माना जाता है। इससे कम होने पर बैंक के लिए लाभप्रद नहीं होता है।