उत्तराखंड में मैगी के उत्पादन पर भी रोक
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उत्तराखंड में मैगी पर लगाया गया प्रतिबंध फिलहाल 90 दिन तक लागू रहेगा। इस अवधि में मैगी की बिक्री के अलावा उत्पादन भी नहीं किया जा सकेगा।
शासन के अनुसार जांच में पकड़े जाने पर दुकानदार या थोक विक्रेता के खिलाफ भी गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस आदेश के बाद ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी डॉ. पंकज पांडेय ने पंतनगर स्थित नेस्ले फैक्ट्री को नोटिस भेजकर तत्काल प्रभाव से उत्पादन पर रोक लगा दी है।
पौड़ी की एक दुकान से लिया गया मैगी का सैंपल फेल होने के बाद शासन ने बुधवार को इसकी बिक्री पर रोक लगा दी थी। इस आदेश का दायरा बढ़ाते हुए गुरुवार को उत्पादन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।
प्रमुख सचिव एवं खाद्य सुरक्षा आयुक्त ओम प्रकाश ने गुरुवार को सभी जिलाधिकारियों के अलावा संबंधित अधिकारियों को यह आदेश जारी किया। मैगी पर प्रतिबंध के अलावा पैक्ड व अनपैक्ड नमकीन, कुरकुरे, चिप्स आदि के नमूने लेने के लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाने का आदेश दिया गया है।
मैगी के पांच ट्रक वापस आए
देशभर में चल रहे मैगी के खिलाफ अभियान के चलते बुधवार रात को पंजाब और हरियाणा से करीब पांच ट्रक मैगी के रुद्रपुर स्थित नेस्ले के प्लांट में वापस आ गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि ये पांचों ट्रक देर रात्रि में आए हैं जिनमें कुछ चंडीगढ़, अंबाला शहरों के थे। उधर, नेस्ले का प्रबंधन किसी तरह की जानकारी देने से बचता रहा।
मिनटों में बाजार से मैगी के पैकेट गायब
उधर, विकासनगर में घर-घर में दो मिनट में तैयार होने वाली मैगी से लोगों ने नाता तोड़ लिया है। पिछले कुछ दिनों में अकेले विकासनगर शहर में ही मैगी की बिक्री में खासी कमी दर्ज की गई है। उधर, मैगी पर रोक लगने के बाद दुकानदारों ने स्टाक एजेंसियों को लौटा दिया है। वहीं एजेंसियों ने भी मैगी की बिलिंग बंद कर दी है।
दुकानदारों का कहना है कि मैगी का जो स्टॉक पहले एक हफ्ते में समाप्त हो जाता था, वह 15 दिन में आधा भी नहीं बिक सका है। मैगी में शिकायत मिलने के बाद अब लोग दूसरे ब्रांडों पर भरोसा करने लगे हैं। रेस्तरां, होटलों और पिकनिक स्पाटों में भी मैगी की बिक्री में कटौती दर्ज की गई है।