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देहरादूनः अब तो ‘खूनी’ फ्लाईओवर पर प्रयोग के लिए भी जगह नहीं बची 

Tue, 14 Jan 2020 10:39 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 14 Jan 2020 10:39 AM IST
सार

  • बजट के अभाव में समानांतर फ्लाईओवर के लिए अनुमति देने के मूड में नहीं शासन 

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balliwala flyover dehradun : Now there is no space left for use on this flyover
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

निर्माण के बाद विभागों की प्रयोगशाला बन चुके बल्लीवाला के खूनी फ्लाईओवर पर अब किसी प्रयोग की भी जगह नहीं बची है। सरकार इसके समानांतर फ्लाईओवर की अनुमति देने के मूड में भी नजर नहीं आ रही है। बजट की कमी को इसका कारण बताया जा रहा है। 

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दरअसल, वर्ष 2016 में बल्लीवाला फ्लाईओवर बनने के बाद आस जगी थी कि यहां जाम और बेवजह वाहनों के दबाव से मुक्ति मिलेगी। लेकिन, बनने के बाद सहूलियत देना तो दूर उल्टा इसके कारण दुर्घटनाओं को दावत देना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि एक के बाद एक दुर्घटना होने से यह फ्लाईओवर खूनी फ्लाईओवर के नाम से बदनाम हो गया।
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इसके बाद दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने को शुरू हुआ प्रशासन के प्रयोगों का दौर। लेेकिन, इन प्रयोग से भी कोई निजात नहीं मिल सकी। लिहाजा, शासन ने भी इस पर संज्ञान लिया और बात एक पीआईएल के माध्यम से हाईकोर्ट तक जा पहुंची।
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हाईकोर्ट ने भारी भरकम आदेश दिए तो लगा कि शायद अब मुक्ति मिल जाएगी। इसके समानांतर फ्लाईओवर बनाने की बात शुरू हुई तो लोक निर्माण विभाग के राजमार्ग खंड ने इसका इस्टीमेट भी तैयार कराया। विभाग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार शासन बजट के अभाव में समानांतर फ्लाईओवर बनाने को अनुमति देने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। यही कारण है कि एक साल बाद भी विभाग के इस्टीमेट वाले पत्र का कोई जवाब शासन से नहीं आ सका है। चूंकि, अब कोई प्रयोग नहीं बचा तो इसे यूं ही बदनाम होने के लिए छोड़ा जा रहा है। 

ये हुए प्रयोग 

- सब वे श्रेणी से भी संकरे इस फ्लाईओवर पर जबरदस्ती प्लास्टिक के डिवाइडर लगाए गए। 
- कुछ दिन बाद सेफ्टी वॉल पर जाल लगाए गए, ताकि कोई दुर्घटना न हो। 
- चेतावनी के लिए लाइट भी लगाई गई, जो आए दिन खराब रहती है। 
- पिछले साल यहां 17 जगह मल्टीपल स्पीड ब्रेकर लगाए गए। 
- विरोध हुआ तो आधे स्पीड ब्रेकरों को तोड़ा गया। 
- फ्लाईओवर से कोई टर्न न ले इसके लिए प्लास्टिक डिवाइडरों को आगे तक बढ़ाया गया। 

हादसे के बाद ही याद आता है फ्लाईओवर 

सरकारी विभागों का भी अजब हाल है। फ्लाईओवर पर जब कोई हादसा होता है तभी इसकी याद आती है। उसी के बाद यहां कुछ प्रयोग किए जाते हैं। लेकिन, इसके बाद न तो प्रशासन को और न ही शासन को। किसी को इसकी याद नहीं आती है।

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