दिल्ली की सत्ता पतंजलि परिवार के खिलाफः बालकृष्ण

अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 21 Nov 2013 07:49 PM IST
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balkrishna on ramdev notice from uttarakhand government

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पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि अधिकारियों की सत्ता अलग है। उनका रिश्ता जनता से है। अधिकारियों को सत्ताधीशों का गुलाम नही बनना चाहिए। देश की सर्वोच्च अदालत भी अधिकारियों को ऐसा निर्देश दे चुकी है।
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पंगा हमने जान-बूझकर लिया
दिव्य योग मंदिर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि ओखली में सिर देंगे तो मूसल पड़ेंगे ही। देशहित में कांग्रेस के साथ यह पंगा हमने जान-बूझकर लिया है। जब तक भ्रष्ट सत्ता नहीं बदलेगी, तब तक देशवासी कराहते ही रहेंगे।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वामी रामदेव ने जब विदेशी पेय कंपनियों और अंग्रेजी दवाइयों के खिलाफ आवाज उठायी थी, तब देशवासियों की बांछें खिल गई थी। उस समय जो वर्ग सबसे ज्यादा परेशान हुआ, वह कांग्रेस का वर्ग था।

रामदेव बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विरुद्ध
दिल्ली में बैठे दलाल कांग्रेसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मोटी रकम लेकर विदेशी बैंकों में जमा करते आए हैं। तभी से दिल्ली की सत्ता पतंजलि परिवार के खिलाफ हो गई। कांग्रेसियों को स्वदेशी अभियान कभी मोह नहीं था। उन्हें जब लगा कि रामदेव बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विरुद्ध खड़े हो गए हैं, तब एक दिन कालेधन के खिलाफ भी खड़े होंगे। हम भी समझ गए थे कि लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जिस दिन पंगा लिया था, उस दिन पता था कि दिल्ली की सल्तनत हमें रौंद सकती है। प्रखर राष्ट्रवादी होने के कारण रामदेव ने निश्चय कर लिया कि व्यवस्था परिवर्तन के काम में जितना भी योगदान दे दिया जाए वह कम हैं।

नरेंद्र मोदी को पतंजलि योगपीठ बुलाकर स्वामी रामदेव ने सबसे पहले प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया था। केंद्र और उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार उसी दिन से लगातार नोटिसबाजी कर रही है। सभी का जवाब दिया जाएगा और जनता को साथ लेकर देश से कांग्रेस का सफाया करने का काम लगातार चलाया जाता रहेगा।

पतंजलि में सामान्य रूप से चलता रहा कामकाज
गुरुवार को पतंजलि योगपीठ में कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा। बाबा के सभी प्रतिष्ठानों में नोटिसों की चर्चा तो हुई, पर कहीं भी कार्य प्रभावित नहीं हुआ।

पतंजलि परिवार की धुरी हमेशा ही आचार्य बालकृष्ण बने रहे हैं। करीब डेढ़ महीने से बाबा हरिद्वार से बाहर हैं। तमाम कामकाज बालकृष्ण के जिम्मे हैं। आचार्य पतंजलि योगपीठ के साथ-साथ गुरुवार को कई प्रतिष्ठानों में गए और पदार्था जाकर कामकाज देखा।

पतंजलि योगपीठ में सभी वैद्य अपने कक्षों में बैठकर रोगियों का परीक्षण करते रहे। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि कामकाज यथावत चल रहे हैं। अभी कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। कानूनी कार्रवाई देखने के लिए एक प्रकोष्ठ मौजूद है जो उचित कार्यवाही करता रहेगा।
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