बकरीद 2018: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खुली जगह में कुर्बानी देने पर लगाई रोक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के बयान ‘खुले में बलि नहीं, नालियों में खून नहीं’ का स्वत: संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने ईद पर गोवंश तथा ऊंट की कुर्बानी पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने कहा है कि सभी धर्मों के लिए मंदिर या इबादतगाह के भीतर या इनके बाहर, चौराहों अथवा सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं की बलि या कुर्बानी पर रोक रहेगी। इसके अलावा कुर्बानी केवल स्लॉटर हाउस में करने के आदेश दिए।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देने वाली संविधान की धारा 25 और 26 का विस्तृत विश्लेषण और व्याख्या करते हुए धर्म, धार्मिक कट्टरता, विश्वास, परंपरा, जीवन पद्धति, विभिन्न न्यायालयों द्वारा दी गई व्यवस्थाओं तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 का हवाला देते हुए फैसला सुनाया।
यह आदेश सभी धर्मों के लिए
कोर्ट ने समस्त जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ईद के मौके पर सार्वजनिक स्थानों व खुले में पशुओं की कुर्बानी होने से रोकने के लिए निगरानी रखें। कोर्ट ने कहा है कि प्रार्थना भी प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थल पर ही की जाए।
कोर्ट ने नगरपालिकाओं को भी कूड़ेदानों से पशुओं के अवशेष साफ करने की विशेष व्यवस्था करने को कहा है। हिंदू महासभा हल्द्वानी के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने भी हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा था कि ईद के मौके पर बड़ी संख्या में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है।
इससे सार्वजनिक स्थानों, नालियों, गलियों में जानवरों का रक्त बहता है। साथ ही हिंदू बहुल क्षेत्रों में जानवरों को कुर्बानी देने से कानून व्यवस्था भी खराब होने की आशंका रहती है। इसका संज्ञान लिया जाए।