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Dehradun News: अवैध लीसा तस्करी के तीन आरोपियों की जमानत खारिज
Tue, 04 Aug 2026 02:08 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Tue, 04 Aug 2026 02:08 AM IST
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त्यूणी क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान 22 कुंतल अवैध लीसा परिवहन के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट (चकराता) आकाश कुमार की अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया आरोपियों को राहत देने का पर्याप्त आधार नहीं है और अवैध कारोबार के स्रोत व अन्य संलिप्त लोगों की विवेचना अभी जारी है।
अदालत ने उत्तरकाशी जिले के मोरी (ग्राम पासा) निवासी राहुल, नौगांव (ग्राम बसराली) के मुकेश और डुंडा (ग्राम मंगांव) निवासी कृष्णा के प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई की। बचाव पक्ष ने आरोपियों को निर्दोष बताते हुए उनका आपराधिक इतिहास न होने की दलील दी, जिसका वन विभाग के अधिवक्ताओं ने विरोध किया। पत्रावली व उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर न्यायालय ने पाया कि सह-अभियुक्त राहुल के खिलाफ पूर्व में भी वन अपराध का मामला दर्ज रहा है।
दरअसल, वन विभाग की टीम ने 23 जुलाई की रात त्यूणी में एक पिकअप वाहन से अवैध लीसा और 14 खाली प्लास्टिक कैरेट बरामद किए थे। इस संबंध में उत्तराखंड संशोधन वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने माना कि लीसे की निकासी के स्रोत और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच पूरी होना शेष है, ऐसे में जमानत देना न्यायसंगत नहीं है।
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अदालत ने उत्तरकाशी जिले के मोरी (ग्राम पासा) निवासी राहुल, नौगांव (ग्राम बसराली) के मुकेश और डुंडा (ग्राम मंगांव) निवासी कृष्णा के प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई की। बचाव पक्ष ने आरोपियों को निर्दोष बताते हुए उनका आपराधिक इतिहास न होने की दलील दी, जिसका वन विभाग के अधिवक्ताओं ने विरोध किया। पत्रावली व उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर न्यायालय ने पाया कि सह-अभियुक्त राहुल के खिलाफ पूर्व में भी वन अपराध का मामला दर्ज रहा है।
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दरअसल, वन विभाग की टीम ने 23 जुलाई की रात त्यूणी में एक पिकअप वाहन से अवैध लीसा और 14 खाली प्लास्टिक कैरेट बरामद किए थे। इस संबंध में उत्तराखंड संशोधन वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने माना कि लीसे की निकासी के स्रोत और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच पूरी होना शेष है, ऐसे में जमानत देना न्यायसंगत नहीं है।
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