सास को बचाने के लिए गुलदार से भिड़ गई थीं गीता, अब मिला साहस और हिम्मत के लिए सम्मान
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23 दिसंबर 2018 को अपनी सास को बचाने के लिए अल्मोड़ा निवासी गीता जोशी गुलदार से भिड़ गई। करीब पांच मिनट तक चले संघर्ष के बाद गुलदार भाग निकला। गीता समेत ऐसी ही कई महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार प्रदान किया गया।
अल्मोड़ा के बमण गांव में बुजुर्ग गोविंदी देवी पूजा के बाद दीपक जलाने के लिए घर से बाहर निकलीं कि घात लगाए बैठे गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। इससे पहले वह संभल पाती, गुलदार उन्हें खींचकर जंगल की ओर ले जाने लगा।
उनकी बहू गीता जोशी ने यह मंजर देखा तो वह गुलदार से भिड़ गईं। करीब पांच मिनट तक उनके बीच संघर्ष चला। आखिरकार गीता के साहस और हिम्मत के सामने गुलदार हार गया और जंगल की ओर भाग गया। सास के साथ ही गीता को भी इस हमले में काफी चोटें आई थीं।
पैरालंपिक नीरजा बनीं मिसाल
ऋषिकेश निवासी नीरजा गोयल ने दिव्यांग होने के बावजूद अपने जज्बे से पूरे राज्य का नाम रोशन किया है। नीरजा ने पैरालंपिक बैडमिंटन चैंपियनशिप में कई स्पर्द्धाओं में पदक जीते। उन्होंने राज्यपाल और महिला एवं बाल विकास मंत्री से दिव्यांग खिलाड़ियों को सुविधाएं देने की मांग की।
पहले प्रयास में फतह किया एवरेस्ट
गुनाऊं, रुद्रप्रयाग निवासी नूतन वशिष्ठ ने अपने पहले ही प्रयास में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराकर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। 22 मई 2016 को मात्र 21 वर्ष की उम्र में नूतन ने 10 अन्य महिला पर्वतारोहियों के साथ माउंट एवरेस्ट फतह किया था।