बदरीनाथ हाईवे पर कभी भी हो सकता है 'चक्काजाम'
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बदरीनाथ हाईवे की हालत इस समय इतनी खतरनाक है कि हल्की सी बारिश बदरीनाथ हाईवे पर पहिये रोक सकती है।
राजमार्ग का मैठाणा में हाईवे का करीब अस्सी मीटर हिस्सा तेजी से अलकनंदा में धंस रहा है। ऐसे में यहां भारी वाहन हाईवे के बीचों-बीच फंसने से आवाजाही बाधित हो रही है।
बीते वर्ष जून माह की जलप्रलय के बाद से ही मैठाणा में भू-धंसाव शुरू हो गया था तब बीआरओ ने मैठाणा गांव के ग्रामीणों की भूमि अधिग्रहीत कर करीब 100 मीटर नई सड़क का निर्माण किया।
उस समय जैसे-तैसे यात्रा वाहनों का संचालन कराया गया, लेकिन इस बार हुई बारिश से नई सड़क भी पांच मीटर धंस गई है। यहां पर सेना के वाहनों की आवाजाही बमुश्किल हो पा रही है।
इन रास्तों को बनाया जा सकता है विकल्प
मैठाणा में बदरीनाथ हाईवे के वैकल्प के रूप में शासन-प्रशासन को करीब 15 किमी नंदप्रयाग-कोठियालसैंण मार्ग का सुधार कार्य शुरू कर देना चाहिए। यह मार्ग लोनिवि प्रांतीय खंड गोपेश्वर के अधीन है।
मार्ग कई स्थानों पर जानलेवा बना है और सैकोट गांव के समीप गदेरे में तब्दील है। यदि इस मार्ग को समय रहते ठीक किया जाए तो यह हाईवे का मजबूत विकल्प होगा।
हाईवे सुधार के लिए बीते वर्ष जुलाई माह में केंद्र को 15 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे थे। अब तक इन्हें मंजूरी नहीं मिल पाई है। शासन-प्रशासन को भी इस संबंध में पत्र भेजा गया है, ताकि आगामी वर्ष की तीर्थयात्रा के लिए हाईवे सुगम और सुचारु बनाया जा सके।
-कर्नल नीलेश चंदाराना, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ।
गंगोत्री-यमुनोत्री धामों पर पसरा सन्नाटा
उत्तरकाशी, बड़कोट। आपदा से बदहाल हुए यात्रा मार्ग समय पर दुरुस्त नहीं करने का असर इस बार की चार धाम यात्रा पर पड़ा। बीते एक माह से तो दोनों हाईवे जगह-जगह अवरुद्ध होने से तीर्थयात्रा पर ब्रेक ही लग गया है।
दो मई को यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद से अब तक इन दोनों धामों में क्रमश: 33,642 तथा 42,358 तीर्थयात्री पहुंचे जबकि पिछले वर्ष महज एक माह चले यात्रा सीजन में ही इन दोनों धामों तक पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या क्रमश: 2,38,140 और 2,06,456 तथा वर्ष 2012 में 4,43,742 और 4,43835 रही थी।
बीते एक माह से तो दोनों यात्रा मार्ग जगह-जगह भूस्खलन एवं धंसाव से अवरुद्ध होने के कारण यात्रा पर ब्रेक लग गया है।
इस बार ये स्थान रहे संवेदनशील
इस बरसात में यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड, पालीगाड, बाडिया, जंगलचट्टी, रानाचट्टी तथा गंगोत्री हाईवे पर धरासू नालूपाणी, रतूड़ीसेरा, नेताला, लालढांग, मल्ला, हेलगूगाड, गंगनानी एवं सुक्की आदि डेंजर जोन नासूर बने रहे।