{"_id":"e9e830b0361f0001f53e981e2727f180","slug":"bachandyi-is-no-more","type":"story","status":"publish","title_hn":"राधाखंडी गायिका बचनदेई का निधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राधाखंडी गायिका बचनदेई का निधन
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 04 Nov 2013 09:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराख्ांड की प्रसिद्ध राधाखंडी गायिका बचनदेई का निधन सोमवार सुबह एमडीडीए कालोनी स्थित उनके निवास पर हुआ। उन्होंने सोमवार तड़के दो बजे अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर किया गया। तीन माह से फेफड़ों में संक्रमण की समस्या से जूझ रही बचनदेई का कुछ समय पहले दून अस्पताल में भी इलाज चला।
विज्ञापन
इससे पहले वह सीएमआई और सूर्या अस्पताल में भर्ती रही। आर्थिक स्थिति से जूझ रहे इस परिवार को सरकार से कोई सहायता नहीं मिली। मजबूरन बेटियों के गहने गिरवी रखवाकर पति शिवचरण ने बचनदेई का इलाज कराया। राधाखंडी नृत्य में गाए जाने वाले गीतों में बचनदेई को महारथ हासिल थी। वहीं शिवचरण सभी तरह के लोक वाद्य यंत्र बजाने में पारंगत हैं।
विज्ञापन
ये हैं राधाखंडी
पारंपरिक तरीके से गाए जाने वाले राधा-कृष्ण के परिणय (प्रेम) गीतों को राधाखंडी का नाम दिया गया। मूलरूप से यह लोक गायन की विधा है। यह गीत बेहद लंबे-लंबे सांस खींचकर गाए जाते हैं। इन्हें गाना आसान नहीं इनमें सांस फूल जाती है। स्थानीय कलाकारों की मानें तो उत्तराखंड में बचनदेई और शिवचरण ही ऐसे गायक रहे हैं।
विज्ञापन
नई-टिहरी में कार्यक्रम के मंच पर बचनदेई से मुलाकात हुई थी। वह बेहद सुंदर व्यक्तित्व की महिला थीं। वह जब भी मिलीं, उनसे कुछ ना कुछ सीखने को जरूर मिला। उनकी मजबूत गायकी ही उन्हें सबसे अलग करती थी। - प्रीतम भरतवाण, जागर गायक