फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Baba ramdev Told about patanjali successor

बाबा रामदेव ने बताया कौन होगा उनका उत्तराधिकारी, संभालेंगे पतंजलि का करोड़ों का राज-काज

Thu, 22 Mar 2018 07:52 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 22 Mar 2018 07:52 AM IST
विज्ञापन
Baba ramdev Told about patanjali successor
baba ramdev

योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने और आचार्य बालकृष्ण के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी है। पहले चरण में बुधवार को 88 संन्यासियों को दीक्षित किया गया। यह दीक्षा कार्यक्रम रामनवमी तक जारी रहेगा। बाबा एक हजार वैदिक संन्यासियों को दीक्षित करेंगे, जिनमें से आगे चलकर कोई एक बाबा का उत्तराधिकारी बनेगा।

विज्ञापन


यूं तो बाबा रामदेव बारबार कहते रहे हैं कि उनकी दिनचर्या कुछ ऐसी है कि जो उन्हें दो सौ वर्षों तक जिंदा रखेगी। बाबा कहते है कि यह शरीर रोगों को जर्जर होता है और वे किसी रोग को पास नहीं फटकने देंगे।
विज्ञापन


इसके बावजूद नवरात्र के शेष बचे पांच दिनों में बाबा अनेक ऐसे युवक-युवतियों को दीक्षित कर रहे हैं जो उच्च शिक्षित हैं। इनमें से अनेक क्षेत्रों से आए साधक शामिल हैं। इंजीनियरिंग, चिकित्सा, वेदों और अन्य प्रकल्पों की उच्च शिक्षा ग्रहण कर आए छात्रों को दीक्षित करने का लंबा कार्यक्रम तैयार किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाबा रामदेव कहते हैं कि भगोड़ों को दीक्षित करना उनका उद्देश्य नहीं है। जो घरों से पलायन कर भागते हैं, उन्हें अन्यत्र दीक्षित किया जाता होगा पतंजलि में नहीं। वास्तव में ऋषियों ने उत्तराधिकार चयन की परंपरा गुरु और शिष्य के आधार पर तय की है। गृहस्थों की भांति संन्यासी का कोई परिवार नहीं होता, इसलिए गुरु अपने योग्य शिष्यों को ही अपना उत्तराधिकारी बनाता है।

Baba ramdev Told about patanjali successor
ramdev

बाबा रामदेव ने बताया कि देश-विदेश में कोई उद्योग चलाने वाला अपनी पत्नी, पुत्र या पुत्री को विरासत सौंपता है। तब यह नहीं देखा जाता कि वह उस परंपरा को निर्वाह करने के योग्य है या नहीं, लेकिन संन्यास जगत में ऐसा नही होता।

विशेषरुप से पतंजलि योगपीठ ऋषि परंपरा के अनुसार आचरण करेगी। देशभर में घूम-घूम कर एक हजार योग्य साधकों का चयन कर उनमें से किसी एक को पंतजलि की विशाल परंपरा का वाहक बनाया जाएगा।

इस दीक्षा समारोह में वैदिक यज्ञ कुंडों के माध्यम से नवसंन्यासियों को दीक्षित किया जा रहा है। यहां से निकले साधक रामनवमी के दिन देश के अनेक भागों में योग स्थापना के लिए भेजे जाएंगे। एक ऐसी परंपरा ऋषिकेंद्र से प्रारंभ हो रही है, जो इस रुप में आज तक कभी सामने नहीं आई।

हालांकि अखाड़ों में भी प्रत्येक कुंभ पर दीक्षा समारोह आयोजित कर हजारों संन्यासियों को दीक्षा दी जाती है, लेकिन उनमें से कोई अखाड़ा परंपरा का उत्तराधिकारी नहीं बनता। अखाड़ों में उत्तराधिकार चयन के बजाय उत्तराधिकार मनोनयन की परंपरा है। इसके विपरीत बाबा रामदेव ने संस्कार दीक्षा के माध्यम से उत्तराधिकार चयन की एक नई परंपरा को जन्म दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed