गुरू जी बनने की पढ़ाई अब एक साल और बढ़ाई
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एक साल में बीएड करके गुरुजी बनने का सपना अब पूरा नहीं हो सकेगा। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने नई नियमावली जारी कर दी है। इसके तहत बीएड और एमएड कोर्स की अवधि एक के बजाय दो वर्ष होगी। कई और बड़े परिवर्तन भी सामने आए हैं।
एनसीटीई की वेबसाइट पर जारी रेगुलेशन के मुताबिक, बीएड और एमएड का एक वर्षीय पाठ्यक्रम आगामी सत्र से दो वर्षीय होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों को एकेडमिक काउंसिल और एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में फैसला लेना है।
अब तक बीएड के लिए केवल 40 दिन की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग होती है, लेकिन आगामी सत्र से दो वर्षीय बीएड के पहले साल में चार सप्ताह और दूसरे वर्ष में 16 सप्ताह की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग जरूरी होगी।
काउंसिल ने बीएड और एमएड में एडमिशन की अनिवार्य योग्यता में कोई परिवर्तन नहीं किया है।
12वीं के बाद भी बीएड
तीन नए इंटिग्रेटेड कोर्स भी शुरू किए गए हैं। इसमें 12वीं के बाद सीधे चार वर्षीय बीए-बीएड और चार वर्षीय बीएससी-बीएड में एडमिशन लिया जा सकेगा। ग्रेजुएशन के बाद सीधे तीन वर्षीय इंटिग्रेटेड बीएड-एमएड कोर्स भी चलाया जा सकेगा।
इन कोर्सेज में दाखिले की प्रक्रिया पूर्ववत रहेगी। एनसीटीई ने बीटीसी जैसे सभी कोर्स खत्म करते हुए नया डीएलएड कोर्स ही एकमात्र प्राइमरी टीचिंग के लिए अनिवार्य कर दिया है।
30 प्रतिशत तक इंटरनल एसेसमेंट
अभी तक बीएड और एमएड में केवल दस प्रतिशत यानी दस अंकों का इंटरनल एसेसमेंट होता था, लेकिन नए सत्र से यह बढ़ाकर 20-30 प्रतिशत यानी 20 से 30 अंक कर दिया गया है।
यानी अभी तक 90 अंकों की थ्योरी और 10 अंकों का प्रैक्टिकल होता था जो कि अब 70 अंक की थ्योरी और 30 अंकों का प्रैक्टिकल होगा।
योगा, फाइन आर्ट्स और म्यूजिक भी
बीएड करने वाले छात्रों को अब केवल विषय की पढ़ाई ही नहीं बल्कि फिजिकल एजूकेशन, फाइन आर्ट्स और म्यूजिक की भी पढ़ाई करनी होगी।
एनसीटीई की नई नियमावली के मुताबिक, बीएड की 100 सीटों के लिए 15 शिक्षक और एक प्राचार्य जरूरी होंगे। इनमें चार बीएड शिक्षक, आठ विषय शिक्षक, एक फिजिकल एजूकेशन टीचर, एक फाइन आर्ट्स और एक म्यूजिक टीचर जरूरी होगा।
गुणवत्ता पर फोकस
एनसीटीई ने नई नियमावली में शिक्षा की गुणवत्ता पर खास फोकस किया है। इसके तहत बीएड का नया कोर्स केवल उसी कालेज में चल सकेगा, जहां पहले से कोई कोर्स जैसे बीए, बीएससी आदि चल रहा होगा। पुराने बीएड कालेजों को नए पैटर्न का बीएड चलाने की अनुमति होगी।
इंटिग्रेटेड कोर्स केवल उसी कालेज में चलेगा, जहां नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल (नैक) का बी प्लस ग्रेड होगा। सीटें बढ़ाने की सूरत में भी नैक ग्रेड जरूरी होगा। नैक ग्रेड केवल उन्हीं कालेजों को मिलता है, जहां शिक्षा की गुणवत्ता हो और इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा होगा।
एनसीटीई की नई नियमावली शिक्षा की गुणवत्ता पर केंद्रित है। निश्चित तौर पर इससे देश को अच्छे शिक्षक मिलेंगे।
- सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन आफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट