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भगवान शिव को करना है प्रसन्न, तो नागपंचमी पर ऐसे करें नाग देवता की पूजा

Fri, 14 Jul 2017 05:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 14 Jul 2017 05:23 PM IST
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auspicious time for nag panchami worship

सावन में पंचमी त‌िथ‌ि को नागपंचमी मनाई जाती है। मान्यता है क‌ि इससे नागों के देवता भगवान ‌श‌‌िव प्रसन्न होते हैं। नाग पंचमी 27 जुलाई को है। माना जाता है कि इस तिथि पर नागदेव के दर्शन करना शुभ रहता है।

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इस मौके पर सभी शिवालयों में बाबा भोलेनाथ और नागों का विशेष अभिषेक होगा।  अगर आपको भगवान श‌िव को प्रसन्न करना है तो इस तरह से नाग देवता की पूजा करें..
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पंचमी तिथि के देवता नाग ही हैं। भगवान शिव को सांपों का देवता माना जाता है। ऊं नम: शिवाय और महामृत्युंजय मंत्रों का सुबह-शाम जाप करना चाहिए। आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार 27 जुलाई को प्रात: 7 बजकर 5 मिनट तक भद्रा है।

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ऐसे करें पूजन 

auspicious time for nag panchami worship

शुभ मुहूर्त को भद्रा में त्याग देना चाहिए। इस दिन भूलोक की भद्रा है। पंचमी तिथि प्रात: 7.05 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो कि 28 जुलाई को प्रात: 6.38 मिनट तक रहेगी। 

डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार नाग पंचमी पर अपने गृह द्वार की दहलीज के दोनों ओर गोबर की सर्पाकृति बनाकर पूजा की जाती है। इस दिन सर्पों को दूध, दही, घी, शक्कर, शहद आदि से स्नान करा प्राण-प्रतिष्ठा कर पूजा करनी चाहिए। इस दिन नाग देवता की पूजा और ब्राह्मणों को भोजन कराने से सर्पों का भय नहीं रहता। 

रुद्राभिषेक कर इन नौ प्रकार नागों की प्रतिमा का करें नदी में प्रवाह
अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोट, महापद्म, नील, शंखपाल, कुलक, कालिय। 

ऐसे करें पूजन 
सोना, चांदी, तांबा, पीतल आदि निर्मित नव नागों का पूजन करें।
नागों को जलाशय में प्रवाह करें, बाद में स्नान करें। 
पहने हुए वस्त्रों का त्याग करें।
नवीन वस्त्र धारण करें।
नाग स्तोत्र का पाठ करें।
घर के मुख्य द्वार पर गोबर की सर्पाकृति बनाकर उसकी पूजा करें। 

इस मंत्र का करें जप 

auspicious time for nag panchami worship

इस मंत्र का करें जप 
ऊं कुरू कुल्ये हुं फट स्वाह

ये है रहस्य 
इसका रहस्य भगवान‌ श्री कृष्‍ण से भी जुड़ा है। आगे पढ़‌िए क‌िस शुभ मुहूर्त में करें पूजन...

मान्यता के मुताब‌िक कालिया नाग का निवास यमुना नदी में होने के कारण उस नदी का पानी काले रंग का होने लगा था। कहा जाता है कि एक समय उस भयानक विषधर कालिया नाग के विष के कारण यमुना नदी विषाक्त हो चली थी।

जब कालिया नाग के इस कृत्य की जानकारी भगवान श्री कृष्ण तक पहुंची तब उन्होंने कालिया नाग के साथ युद्ध करते हुए उसे यमुना छोड़ने पर विवश कर दिया और पाताल लोक भेज दिया।

पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों को कालिया नाग से बचाया था। इसल‌िए नाग की पूजा की जाती है ज‌िससे वह लोगों को कभी नुकसान न पहुंचाए। 

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