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बचपन में हुआ पौधों से लगाव, आज भी बरकरार

Sat, 29 Feb 2020 02:03 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 29 Feb 2020 02:03 AM IST
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Attachment to plants occurred in childhood, still intact
मेरी बगिया--केवल विहार स्थित अपने टेरिस पर बनी बगिया को सजाते डा.संजीव शर्मा साथ में पत्नी साधना श?
डील (डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लीकेशन ऑर्गेनाइजेशन) में सीनियर टेक्निकल ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त 66 वर्षीय डॉ. संजीव शर्मा ने केवल विहार स्थित अपने आवास में हरी-भरी सुंदर बगिया सहेजी हुई है। उन्होंने बताया कि वह नौकरी के दौरान सरकारी क्वार्टर में रहते थे। तब भी वह पौधे लगाते थे। उन्हें हरियाली देखकर बेहद सुकून मिलता है। छह साल पहले रिटायर होने के बाद वह रोजाना सुबह-शाम दो-दो घंटे बगिया में बिताते हैं। उनकी पत्नी साधना शर्मा भी उनका पूरा सहयोग करती हैं। 35 साल का 14 फीट ऊंचा कैकटस का पौधा उनकी बगिया की शान है।
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संजीव ने बताया कि 15 साल की उम्र में बच्चे खेलने के शौकीन रहते हैं, लेकिन वह पौधों की देखरेख करते थे। एक दिन उन्होंने गमलों में धनिया, टमाटर के बीज डाले। रोजाना उन्हें पानी देते रहे। कुछ दिनों टमाटर में फल आए गए। इससे ऐसा लगा कि जैसे धरती से सोना निकल आया हो। उसके बाद से बागवानी का शौक बढ़ता गया।
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बगिया में हैं 150 प्रकार के पौधे
डॉ. संजीव ने कहा कि उनकी बगिया में 150 से ज्यादा प्रकार के पौधे हैं। इनमें सदाबहार फूल, हरशृंगार, सालविया, मैरीगोल्ड, गुलदाउदी, तुलसी, क्रोटन, गुलाब, निरगुंडी, दम्बेल, गिलोय, एलोविरा व कई अन्य प्रजाति के फूल शामिल हैं। इसमें कैकटस का पौधा खास है। वह सरकारी क्वार्टर से निजी आवास में शिफ्ट हुए तो वह ऑटो से कैकटस के पौधे को अपने साथ ले आए। आज यही पौधा 14 फीट ऊंचा हो चुका है।
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