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एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली जान से हारी, की खुदकुशी

Sat, 16 Jul 2016 11:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर Updated Sat, 16 Jul 2016 11:28 AM IST
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athletics gold medalist girl committed suicide.
सुसाइड - फोटो : getty

अंतर महाविद्यालयी एथलेटिक्स क्रीड़ा प्रतियोगिता की चैंपियन गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। महाविद्यालय की मेधावी और एथलेटिक्स की मौत से परिजनों के साथ ही पीएनजी पीजी स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिवार स्तब्ध है। छात्रा की आत्महत्या की वजह पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा का खराब होना बताया जा रहा है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।

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ग्राम हिम्मतपुर डोटियाल निवासी किशन सिंह की 18 वर्षीय पुत्री प्रियंका पीएनजीपीजी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा थी। वह वर्ष (2014-15) की वार्षिक क्रीड़ा चैंपियन रही थी।
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बीते दिवस वह रुद्रपुर में पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा देने गई थी। परीक्षा के बाद से वह मानसिक रूप से परेशान थी। माता-पिता ने उसे काफी समझाया था और उसका मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया। लेकिन प्रियंका को लगा कि शायद वह मां बाप के सपने को पूरा नहीं कर पा रही है।

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रसोई में गई मां तो फंदे पर लटकी थी बेटी

athletics gold medalist girl committed suicide.
आत्महत्या

शुक्रवार की दोपहर 11 बजे जब वह घर पर अकेली थी, तो उसने रसोई घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। कुछ देर बाद प्रियंका के पिता घर आये तो प्रियंका कमरे में नहीं दिखी। तब वह प्रियंका को तलाशने पड़ोस के घरों में गए।

प्रियंका की मां जब रसोई में गई तो बेटी को छत से लटका पाया। मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। उन्होंने प्रियंका को छत से उतारकर संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि प्रियंका हंसमुख लड़की थी। स्पोर्ट्स में उसकी खास रुचि थी। किक्रेट, वॉलीबाल, दौड़ में वह काफी पारंगत थी। प्रियंका की मौत से महाविद्यालय परिवार में भी शोक की लहर दौड़ गयी।

एथलेटिक्स में जीता था गोल्ड मेडल
क्रिकेट, वॉलीबाल के मैदान में शॉट लगाना तो प्रियंका का शौक था। वर्ष 2015 में उसने अंतर महाविद्यालयी एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीत यह साबित कर दिया कि वह आने वाले समय में एक बेहतरीन खिलाड़ी बन सकती है। लेकिन उसका यह सफर आखिरकार इसी गोल्ड मेडल पर खत्म हो गया।

महाविद्यालय के क्रीड़ा प्रभारी डॉ. जेसी पंत प्रियंका की बात पर भावुक हो गए। बताते हैं प्रियंका के भीतर कुछ कर गुजरने की शक्ति थी। उन्होंने बताया वह जितना खेल में आगे थी, उससे कहीं ज्यादा पढ़ाई में भी। वर्ष 2015 में गोल्ड मेडल जीतने से पहले उसने महाविद्यालय की वार्षिक क्रीड़ा समारोह की महिला चैंपियनशिप जीती थी।

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