आयुष्मान योजना: कार्ड के बाद भी मरीजों से वसूला इलाज का पैसा, अस्पताल का अनुबंध निरस्त
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अटल आयुष्मान योजना का कार्ड होने के बाद भी मेट्रो हास्पिटल जसपुर में मरीजों से इलाज का पैसा वसूला लिया। इसका खुलासा अटल आयुष्मान मिशन की जांच में हुआ था। जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया गया था। जवाब मिलने के बाद राज्य आयुष्मान सोसायटी ने मेट्रो हास्पिटल का अनुबंध निरस्त तक 4.17 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है।
राज्य आयुष्मान सोसायटी ने अटल आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों से इलाज के बाबत की गई पड़ताल में मेट्रो हास्पिटल जसपुर द्वारा कार्ड होने के बाद भी 15 मरीजों से इलाज का पैसा वसूलने का खुलासा हुआ था। सोसाइटी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रबंधन को 15 दिन पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस का जवाब मिलने पर सोसायटी ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनका अनुबंध निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन पर 4.17 लाख रुपये की पेनल्टी भी लगाई है।
विभागीय सूत्रों की माने तो जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन ने योजना के तहत 16 मई 2019 तक कुल 67 मरीजों का इलाज किया, लेकिन 26 मरीजों की सर्जरी प्राधिकरण की अनुमति से पहले ही कर दी। जांच में 15 मरीजों को स्वीकार किया कि कार्ड होने के बावजूद भी अस्पताल प्रबंधन ने इलाज कराने का पैसा लिया है। सीएचसी जसपुर से अधिकतर मरीजों को रेफर किया था।
इन मरीज को अस्पताल में भर्ती करने के बाद सीएचसी जसपुर से रेफर दिखाया गया। अटल आयुष्मान योजना के निदेशक (प्रशासन) डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि मेट्रो हास्पिटल का अनुबंध निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए गए है। अस्पताल से 4.17 लाख रुपये की पेनल्टी भी वसूली जाएगी।
सहोता हास्पिटल जसपुर आयुष्मान योजना से बाहर
मरीजों के निशुल्क इलाज के क्लेम में गड़बड़ी करने पर राज्य आयुष्मान सोसायटी में सहोता सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल जसपुर को भी अटल आयुष्मान योजना से बाहर कर दिया है। राज्य आयुष्मान सोसायटी ने योजना से अनुबंध निरस्त कर 1.63 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। राज्य आयुष्मान सोसायटी की जांच में पाया गया कि सहोता हास्पिटल जसपुर के संचालक डॉ. रविशेर सहोता हैं। अस्पताल में उनकी पत्नी एक मात्र स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नवप्रीत कौर सहोता हैं।
जबकि डॉ. नवप्रीत कौर राजकीय एलडी भट्ट चिकित्सालय में भी संविदा पर पूर्णकालिक स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। योजना में हास्पिटल में नौ मामलों में सिजेरियन से प्रसव किए। इनमें छह मामलों में नवजात शिशुओं को नियोनेटल आईसीयू में भर्ती किया गया। इसे सोसायटी ने योजना में नियम विरुद्ध तरीके से लाभ प्राप्त करना बताया। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के अनुबंध के अनुसार मरीजों का इलाज व क्लेम प्रस्तुत न करने पर आयुष्मान सोसायटी ने अनुबंध निरस्त किया।