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उत्तराखंड में शुरू की जाए अश्वमेध यज्ञ की पूजाएं : महाराज
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- पर्यटन मंत्री ने की अश्वमेध की यज्ञ वेदिकाओं पर पुरातत्व सर्वे विभाग के साथ चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, अश्वमेध यज्ञ वैदिक धर्म व संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था जो राजाओं द्वारा आयोजित किया जाता था, यह राज्य की शक्ति व समृद्धि को बढ़ाने के लिए किया जाता था। उत्तराखंड में भी अश्वमेध यज्ञ होने के अवशेष मिले हैं। इसलिए अश्वमेध यज्ञ की जो पूजा की जाती है, वैसी ही पूजा यहां भी की जाए।
मंगलवार को म्युनिसिपल रोड स्थित अपने निजी आवास पर पर्यटन मंत्री ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर अश्वमेध की यज्ञ वेदिकाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा, देहरादून जिले के कालसी हरिपुर में राजा शीलवर्मन ने लगभग 1700 साल पहले चार अश्वमेध यज्ञ किए थे, जिसका प्रमाण यहां खुदाई में मिली तीन वेद यज्ञ वेदिकाएं हैं। चौथी वेदिका की खुदाई की जा रही है।
महाराज ने बताया कि उत्तरकाशी जिले के पुरोला में भी अश्वमेध यज्ञ के अवशेष मिले हैं। यह यज्ञ वेदिकाएं वैदिक धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जिनके संरक्षण के साथ उन स्थानों पर पूजा अर्चना और अनुष्ठान की शुरू की जानी चाहिए। बैठक में पुरातत्व सर्वे विभाग के अधीक्षक डा. मोहन चंद्र जोशी, गढ़वाल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र रावत, सुनील नेगी, दून विश्वविद्यालय के डा. मानवेंद्र बड़थ्वाल, गुरुकुल महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर अर्चना डिमरी मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, अश्वमेध यज्ञ वैदिक धर्म व संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था जो राजाओं द्वारा आयोजित किया जाता था, यह राज्य की शक्ति व समृद्धि को बढ़ाने के लिए किया जाता था। उत्तराखंड में भी अश्वमेध यज्ञ होने के अवशेष मिले हैं। इसलिए अश्वमेध यज्ञ की जो पूजा की जाती है, वैसी ही पूजा यहां भी की जाए।
मंगलवार को म्युनिसिपल रोड स्थित अपने निजी आवास पर पर्यटन मंत्री ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर अश्वमेध की यज्ञ वेदिकाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा, देहरादून जिले के कालसी हरिपुर में राजा शीलवर्मन ने लगभग 1700 साल पहले चार अश्वमेध यज्ञ किए थे, जिसका प्रमाण यहां खुदाई में मिली तीन वेद यज्ञ वेदिकाएं हैं। चौथी वेदिका की खुदाई की जा रही है।
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महाराज ने बताया कि उत्तरकाशी जिले के पुरोला में भी अश्वमेध यज्ञ के अवशेष मिले हैं। यह यज्ञ वेदिकाएं वैदिक धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जिनके संरक्षण के साथ उन स्थानों पर पूजा अर्चना और अनुष्ठान की शुरू की जानी चाहिए। बैठक में पुरातत्व सर्वे विभाग के अधीक्षक डा. मोहन चंद्र जोशी, गढ़वाल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र रावत, सुनील नेगी, दून विश्वविद्यालय के डा. मानवेंद्र बड़थ्वाल, गुरुकुल महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर अर्चना डिमरी मौजूद रहे।
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