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देहरादून : अपराजिता के मंच से उठाई कानून की जानकार महिलाओं ने आवाज, हिंदी में हो कानून की पढ़ाई
Sat, 08 Aug 2020 04:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 08 Aug 2020 04:52 PM IST
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- फोटो : Amar Ujala
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कानून की दुनिया में हिंदी की होना भी बेहद जरूरी है। कानून की जानकार और इस क्षेत्र में लंबे समय से सेवाएं दे रहीं महिलाओं का मानना है कि कानून की पढ़ाई हिंदी भाषा में जरूरी है। उनका कहना है कि सामाजिक परिवेश को देखते हुए हिंदी में ही कानून की पढ़ाई होनी चाहिए और व्यवहार में भी, क्योंकि कानून पढ़ रहे अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को भी हिंदी में ही पढ़ाना पड़ता है।
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अपराजिता के मंच से कानून की पढ़ाई का माध्यम हिंदी होने के समर्थन में आवाज उठी। ‘कानून की दुनिया में हिंदी’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कानून की विशेषज्ञ महिलाओं ने अपने विचार रखे। सभी ने यह माना की हिंदी जाने बगैर समाज का सच नहीं जाना जा सकता। अपनी समस्याएं लेकर अदालत पहुंचने वाले लोगों की बात उन्हीं की भाषा में समझाना जरूरी है, इसलिए जरूरी है कि बच्चे हिंदी को बढ़ावा देने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे आएं और आत्मविश्वास से पढ़े।
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अंग्रेजी मीडियम के बच्चे भी हिंदी में ही समझते हैं कानून
कॉलेज में हिंदी और अंग्रेजी दोनों तरह के बच्चे कानून की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन अंग्रेजी माध्यम के बच्चे को भी विषय हिंदी में ही समझाना पड़ता है। कहने को तो वे अंग्रेजी माध्यम के हैं, लेकिन वे विषय को हिंदी में बेहतर समझते हैं। केवल कानून की ही पढ़ाई क्यों, सभी विषयों की पढ़ाई हिंदी में होनी चाहिए, जिससे बच्चे आसानी से समझते हैं। हां इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि बच्चे हिंदी के ज्यादा करीब हैं। क्योंकि उनके परिवेश में हिंदी ही घुली मिली है। - डॉ. पूनम रावत, विभागाध्यक्ष एवं कार्यकारी प्राचार्य, लॉ कालेज प्रेम नगर, देहरादून
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विषय की समझ के लिए भाषा का माध्यम सहज जरूरी
हम कानून पढ़ा रहे हैं, पढ़ रहे हैं या प्रैक्टिस कर रहे हैं। यह जरूरी है कि हम सामाजिक संदर्भ का ध्यान रखें। अगर मैं केवल उत्तराखंड की ही बात करूं तो यहां का बच्चा हिंदी ज्यादा समझता है। अंग्रेजी का ज्ञान भी जरूरी है, लेकिन अगर विषय पर पकड़ बेहतर करनी है तो बच्चे को उसी की भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वह जो पढ़े उसे सही ढंग से आगे भी पहुंचा सके। बच्चा किसी भी माध्यम को पढ़कर लॉ करने आया हो, लेकिन उसकी शुरुआत हिंदी से ही होनी चाहिए। तभी उसकी नींव मजबूत हो सकेगी। - डॉ. लक्ष्मी प्रिया विंजामूरी, असिस्टेंट प्रोफेसर, लॉ कॉलेज प्रेमनगर
अपनी समृद्ध भाषा हिंदी का महत्व हमें समझने की जरूरत
हिंदी मनोरंजन की भाषा नहीं है, लेकिन इसे मनोरंजन की भाषा बना दिया गया। इसका महत्व हम नहीं समझते, लेकिन विदेशों में हमारे पुराणों पर रिसर्च किए जा रहे हैं। भाषा को लेकर बच्चों को इस तरह से उलझा दिया गया कि अब उनकी पकड़ किसी भी भाषा पर नहीं रही है। न वो हिंदी में अच्छे रह गए हैं और न अंग्रेजी में। अंग्रेजी हमारी भाषा कभी नहीं थी, लेकिन हमने अपनी भाषा को छोड़कर इसे जगह दे दी। और इसी वजह से आज हमें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - डॉ. पारुल दीक्षित, विभागाध्यक्ष, डीएवी पीजी कॉलेज, विधि विभाग
हिंदी में पढ़ रहे बच्चों का आत्मविश्वास कम
हमारे कॉलेज में लॉ की पढ़ाई हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होती है। मैं अंग्रेजी मीडियम से लॉ की पढ़ाई कर रही हूं और मुझे पढ़ाई समझने में दिक्कत नहीं होती, लेकिन हमारे साथ कुछ ऐसे बच्चे हैं जो हिंदी मीडियम के हैं। हिंदी में वे अच्छा समझते हैं। अच्छा लिख सकते हैं, लेकिन कहीं न कहीं हिंदी को लेकर उनमें आत्मविश्वास कम दिखता है। ऐसे में वे जबरदस्ती अंग्रेजी में पढ़ने की कोशिश करते हैं। - आकांक्षा भट्ट, लॉ स्टूडेंट
हम पर थोपी गई है अंग्रेजी
आज हर जगह अंग्रेजी का प्रभुत्व अधिक है, लेकिन यह हम पर थोपी गई है। जो भाषा हम बचपन से बोलते आए हैं, उसी में हर बात को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, लेकिन अंग्रेजी हमारे समाज में स्टेटस सिंबल बन गई है, जिस कारण अब यह हर जगह हम पर थोपी जा रही है। खासतौर पर पढ़ाई में। अगर पढ़ाई का माध्यम हमारी अपनी भाषा हो तो हम समाज को ज्यादा अच्छे से समझ सकेंगे। - अन्ना अनुप्रिया, लॉ स्टूडेंट