'हिंदी हैं हम' अभियान : मातृभाषा में समझकर ही विकसित होगा वैज्ञानिक दृष्टिकोण
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बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए हिंदी भाषा में विज्ञान विषय को पढ़ाना जरूरी है। अगर हम चाहते हैं कि विज्ञान की पहुंच दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र तक भी पहुंचे तो जरूरी है कि बच्चे की मातृभाषा माध्यम बनें। अमर उजाला अपराजिता के मंच से महिला वैज्ञानिकों व शिक्षिकाओं ने इस बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे विज्ञान को रटे नहीं बल्कि समझें, इसलिए जरूरी है कि वह अपनी मातृभाषा में विज्ञान को पढ़ें।
अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत बुधवार को ‘विज्ञान में हिंदी’ विषय पर वेबिनार आयोजित किया गया, जिसमें विज्ञान के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहीं महिला वैज्ञानिकों व शिक्षिकाओं ने विज्ञान की पढ़ाई हिंदी में किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने इस बात को स्वीकारा कि हिंदी में विज्ञान को पढ़ाना जरूरी है, तभी बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा।
अंग्रेजी के हर शब्द का अनुवाद जरूरी नहीं, लेकिन हिंदी में विज्ञान की पढ़ाई जरूरी
विज्ञान में अंग्रेजी के हर शब्द का अनुवाद जरूरी नहीं, लेकिन हिंदी में विज्ञान की पढ़ाई जरूरी है। विज्ञान की पहुंच को अगर दूर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है तो जरूरी है कि उसका माध्यम हिंदी हो। उच्च शिक्षा में अंग्रेजी भाषा के फायदे हैं, लेकिन प्राइमरी स्तर तक अगर बच्चों को मातृभाषा में विज्ञान पढ़ाई जाती है तो बच्चा वास्तव में विज्ञान को समझ पाएगा। और वह जीवन भर उसके काम आएगा। पहले ही अगर वो विज्ञान के सिद्धांतों को समझ गया तो उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने के बाद उसे कोई दिक्कत नहीं आएगी। क्योंकि तब तक वह मानसिक रूप से भी परिपक्व हो जाएगा। पहले टीवी पर भी विज्ञान से जुड़े अच्छे प्रोग्राम आते थे। हमें आज जरूरत है कि ऐसे प्रोग्राम को प्रोत्साहित किया जाए।
- डॉ. अजीत कौर, वैज्ञानिक, उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद यूकॉस्ट
बच्चों को समझाए जाएं विज्ञान की कहानी व किस्से
विज्ञान की कहानियों, किस्सों व विज्ञान के भारतीय इतिहास को बच्चों को समझाया जाना चाहिए। और इसकी सबसे अधिक जिम्मेदारी शिक्षक की होती है। जिस भाषा में हम सपने देखते हैं, गाते हैं, रोते हैं, हंसते हैं, मनोरंजन करते हैं तो उस भाषा में सीख क्यों नहीं सकते। हिंदी हमारे इतने करीब है तो फिर विज्ञान से दूर कैसे हो गयी। हमारे भारतीय विज्ञान का इतिहास कितना पुराना है, लेकिन हमारे बच्चे इससे अनभिज्ञ है। हमारे देश से भी बड़े-बड़े वैज्ञानिक निकले हैं और वह हिंदी भाषी रहे हैं। बच्चों को हमारे विज्ञान का इतिहास बताने के लिए शिक्षकों को रोल बहुत अहम है। जब हिंदी को विज्ञान में शामिल किया जाएगा तो हम भी बढ़ेंगे।
- डॉ रीमा, वैज्ञानिक एवं शिक्षिका, वेल्हम गर्ल्स स्कूल
हिंदी में किए जाए शोध ताकि आम लोगों तक पहुंचे
विज्ञान के बहुत कम ही शोध हिंदी में होते हैं। हम शोध अंग्रेजी में कर रहे है, लेकिन वह कुछ ही लोगों तक पहुंच रहा है। अगर शोध का हिंदी में अनुवाद किया भी जाए तो वह भाषा बेहद जटिल होती है। इसलिए हिंदी में अनुवाद का सरलीकरण किया जाना भी आवश्यक है। ताकि छात्र उसे आसानी पढ़ व समझ सकें। जितनी भी बड़ी प्रतियोगिताएं होती है वो अंग्रेजी में ही होती हैं। हर जगह अंग्रेजी को दी गई तवज्जो ने हमारी हिंदी भाषा को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन अगर हमें विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो विज्ञान को हिंदी में पढ़ाया जाना जरूरी है। हमारे कई इंस्टीट्यूट हिंदी में शोधपत्र प्रकाशित करते है।
- मंजू सुंदिरयाल, वैज्ञानिक, उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र में कार्यरत
विज्ञान पढ़ तो रहे बच्चे, लेकिन समझ नहीं रहे
जहां से असल में विज्ञान शुरू होता है, वहां बच्चे कमजोर रह जाते हैं। प्राइमरी, जूनियर स्तर पर जहां बच्चों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होना चाहिए वहां बच्चे केवल रट रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है उनका परिवेश। जहां सभी हिंदी भाषा में ही बात करते हैं। बच्चे खुद भी हिंदी भाषा में ही सहज हैं, लेकिन अंग्रेजी भाषा उन पर इस कदर लाद दी गई है कि अब वह विज्ञान को पढ़ तो रहे हैं, लेकिन समझ नहीं रहे। अंग्रेजी पढ़नी चाहिए, लेकिन जो विषय की समझ है वो हिंदी में दी जानी चाहिए। हमारे पास आज बीएससी तक हिंदी माध्यम है। हालांकि एमएससी में यह अभी मुश्किल है। भाषा के कारण हम विज्ञान से भी दूर रहे है। यदि हम चाहते है कि भविष्य में अच्छे वैज्ञानिक हमारे देश में निकले तो विज्ञान को हिंदी में पढ़ाया जाना जरूरी है।
- डॉ. सरला सकलानी, विभागाध्यक्ष गढ़वाल विवि फार्मेसी विभाग
विज्ञान समझाना है तो हिंदी को जोड़ा जाए विज्ञान से
कक्षा पांच के बाद जब बच्चे कक्षा छह में हमारे पास आते हैं, तो हम उन्हें अंग्रेजी में पढ़ाते हैं। हम पढ़ा तो रहे हैं, लेकिन बच्चा समझ ही नहीं पाता है। वो परेशान होने लगता है। मैंने ये महसूस किया कि वह हिंदी में आसानी से समझ जाते है। उन्हें सब याद रहता है। इसलिए अंग्रेजी उन्हें जबरदस्ती पढ़ाने का कोई फायदा नहीं। वो विषय को समझ ही नहीं पाते। विज्ञान एक विषय है और हिंदी एक भाषा। हमें बच्चों को विज्ञान समझाना है और हिंदी भाषा जोड़ती है। तो अगर बच्चों को विज्ञान से जोड़ना है तो विज्ञान को हिंदी से जोड़ना जरूरी है। अन्यथा बच्चे विज्ञान को कभी समझ ही नहीं पाएंगे।
- भावना नैथानी, शिक्षिका, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज राजपुर
हिंदी माध्यम के बच्चे कम योग्य नहीं
हिंदी माध्यम के बच्चे कम योग्य नहीं होते हैं, लेकिन केवल भाषा के कारण वह दबे रह जाते हैं। हिंदी माध्यम के बच्चों में योग्यता होने के बावजूद अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को ज्यादा बढ़ावा दिया जाता है। उन्हें अधिक काबिल समझा जाता है। केवल भाषा के कारण भेदभाव बच्चों के आत्मविश्वास को कमजोर करता है। इसलिए अध्यापकों की भूमिका यहां सबसे अहम हो जाती है। शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि केवल भाषा के कारण योग्य बच्चा पीछे न रह जाए। भाषा बच्चे की योग्यता तय नहीं कर सकती है।
- अनामिका ओझा, शिक्षिका, माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग, उत्तरांचल पीजी कॉलेज ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल