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'अपराजिता' की मुहिम में खुलकर बोलीं छात्राएं, पीरियड्स में शर्माएंगे नहीं, रखेंगें स्वच्छता का ध्यान

Thu, 06 Dec 2018 08:30 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 06 Dec 2018 08:30 AM IST
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Aparajita 100 million smiles campaign conversation on menstrual hygiene
देहरादून में अपराजिता कार्यक्रम में भाग लेती छात्राएं

जब मुझे पहली बार माहवारी (पीरियड) आई तो मैं किसी से अपनी परेशानी बताना चाहती थी, लेकिन परिवार के नाम पर मेरे घर में केवल नानी ही हैं, जोकि कई जिम्मेदारियों में उलझी हैं। पहले से परेशान नानी को कुछ भी बता पाना मेरे लिए बहुत ही मुश्किल था, यह इसलिए भी कि हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

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ऐसे में महीने के दिनों में मैं आज भी कपड़े का प्रयोग करती हूं और इन दिनों ज्यादा दर्द होने के कारण स्कूल नहीं आती। मेरे पीरियड्स शुरू हुए एक साल हो चुका, लेकिन इस संबंध में मैंने आज पहली बार खुलकर बात की है। यह केवल एक स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा ही नहीं बल्कि ऐसी कई छात्राओं की कहानी है। जो माहवारी पर कुछ कहना चाहती हैं... 
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बुधवार को अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल महाअभियान के तहत राजपुर रोड स्थित राजकीय गर्ल्स इंटर कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विंग ऑफ होप द हेल्पिंग हेड सोसाइटी की सदस्य विशाखा ढोडी ने छात्राओं को माहवारी की जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि माहवारी बीमारी नहीं है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसको लेकर शर्म और झिझक भी नहीं होनी चाहिए। यह किसी काम में बाधक भी नहीं। इस दौरान लड़की हर वो काम कर सकती है, जो वह सामान्य दिनों में करती है।

सेनेटरी पैड के इस्तेमाल पर न करें झिझक 

इस दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रोज नहाना चाहिए। कपड़े का प्रयोग कतई न करें। सेनेटरी पैड दिन में कम से कम दो से तीन बार बदलना चाहिए। बहुत दर्द या कमजोरी आ रही हो तो डॉक्टर के पास जाएं। उन्होंने बताया कि समय बदल रहा है। बड़े स्तर पर बदलाव के लिए घर से शुरुआत करनी होगी।

इसमें घर के बड़ों की जिम्मेदारी अहम है। खासकर मां की। इस दौरान लड़की या औरत क अशुद्ध होने की भ्रांति को भी दूर करना होगा। इस दौरान छात्राओं ने सवाल पूछकर अपनी स्वास्थ्य संबंधी जिज्ञासा भी शांत की। इसके बाद बोलीं कि अब पीरिसड्स के दौरान शर्माएंगी नहीं और स्वच्छता का ध्यान रखेंगी।

महाअभियान से जागरूक होकर कॉलेज की शिक्षिका सुबोधनी जोशी भी छात्राओं से अपने अनुभवों को साझा करने से खुद को रोक नही पाईं। उन्होंने बताया कि शुरुआत मेें टीवी पर आने वाले सेनेटरी पैड के विज्ञापन के बारे में लोग समझ ही नहीं पाते थे। धीरे धीरे जानकारी हुई तो इसके प्रति जागरुकता भी बढ़ी। अब इसके बारे में सब जानते हैं। इसके इस्तेमाल को लेकर कोई झिझक नहीं करनी चाहिए। 

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