{"_id":"5da9463d8ebc3e93a45fdf88","slug":"anti-rabies-vaccine-not-available-in-dehradun","type":"story","status":"publish","title_hn":"देहरादूनः आवारा कुत्ते के काटने पर वैक्सीन के लिए अस्पतालों से मेडिकल स्टोर में भटक रहे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देहरादूनः आवारा कुत्ते के काटने पर वैक्सीन के लिए अस्पतालों से मेडिकल स्टोर में भटक रहे मरीज
Fri, 18 Oct 2019 10:36 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 18 Oct 2019 10:36 AM IST
विज्ञापन
dog bite
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पटेलनगर निवासी वरुण ठाकुर को बुधवार रात करीब नौ बजे एक आवारा कुत्ते ने काट लिया। वरुण एंटी रैबीज की वैक्सीन लगाने तत्काल निजी और सरकारी अस्पताल पहुंचे। कई मेडिकल स्टोर पर भी संपर्क किया। बावजूद इसके उन्हें कहीं एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं मिली।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को उन्होंने फिर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल समेत विभिन्न सरकारी, निजी अस्पतालों और केमिस्ट शॉप के चक्कर काटे, लेकिन कहीं इंजेक्शन नहीं मिले। ऐसे में वरुण के सामने समस्या है कि वैक्सीन न लगने से होने वाली जानलेवा बीमारी से बचने के लिए आखिर वह क्या करे? यह सिर्फ वरुण की पीड़ा नहीं, बल्कि आए दिन कुत्ते और बंदर के काटे सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों की हैं। अस्पतालों की ओर से स्पष्ट बताया जा रहा है कि कंपनियां पर्याप्त मात्रा में सप्लाई करने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन
पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रही वैक्सीन: सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि पिछले छह माह से अधिक समय से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं मिल रही है। टेंडर के जरिए और मौखिक तौर पर भी विभिन्न फर्म से लगातार संपर्क किया जा रहा है। लेकिन, फर्म भी कंपनियों से मैन्यूफैक्चरिंग कम होने की बात कहकर सप्लाई से पल्ला झाड़ रही है। ऐसे में कुछ मात्रा में ही एंटी रैबीज वैक्सीन मिल रही हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय से भी इसके लिए संपर्क किया जा रहा है।
विज्ञापन
कई बार बाजार से खरीदकर दिए इंजेक्शन: डॉ. टम्टा
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी एंटी रैबीज वैक्सीन का टोटा बना हुआ है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि कुत्ते और बंदर आदि के काटे प्रतिदिन 40 से अधिक मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन अस्पताल में छह माह से एंटी रैबीज वैक्सीन की समस्या बनी हुई है। फर्म टेंडर डालने को तैयार नहीं है। ऐसे में कई बार बाजार से जैसे तैसे कर वैक्सीन मंगाई जाती है। लेकिन वह पर्याप्त नहीं होती।
देशभर की समस्या है यह: नंदा
सिटी होल सेल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष नंदा ने बताया कि एंटी रैबीज वैक्सीन बनाने वाली दो कंपनियां बंद हो चुकी हैं। अब एक कंपनी इस वैक्सीन का बना रही है। बताया जा रहा है कि रॉ मैटीरियल न मिलने से अधिक मात्रा में वैक्सीन नहीं बन रही। इसलिए यह अब देशभर की समस्या बनी हुई है। एसोसिएशन के स्तर से कई बार कंपनी से इसके बारे में अनुरोध किया है। जितनी मात्रा में कंपनी उपलब्ध करा रही है, उतनी खरीद कर रहे हैं। शहर के रेसकोर्स और आसपास के कुछ केमिस्ट पर इसका कुछ स्टॉक है।
हो सकता है जानलेवा: डॉ. आर्य
कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल आर्य ने बताया कि आवारा कुत्ते या बंदर के काटने पर एंटी रैबीज वैक्सीन न लगाने पर यह मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है। ऐसे में जल्द वैक्सीन लगाने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि कोरोनेशन अस्पताल में वैक्सीन नहीं है।