फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Another fake call center exposed

एक और फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा: ऑनलाइन फर्जी एंटीवायरस बेचने के नाम पर करते थे धोखाधड़ी

Sun, 25 Jul 2021 12:48 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jul 2021 12:48 AM IST
विज्ञापन
Another fake call center exposed
एसटीएफ ने एक और फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी देशी-विदेशी नागरिकों से मेल और अन्य सॉफ्टवेयर के माध्यम से एप्पल के आई ट्यून, एंटीवायरस आदि की सर्विस देने के नाम पर धोखाधड़ी करते थे। इसके लिए वह फर्जी टोलफ्री नंबर का प्रयोग करते थे। कॉल सेंटर का मुख्य संचालक असम का रहने वाला है। एसटीएफ ने कॉल सेंटर से आठ लैपटॉप, एक मोबाइल फोन सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
विज्ञापन

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि एसटीएफ पिछले कई दिनों से सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स टूल्स के प्रयोग को ट्रैक कर रही थी। इसी दौरान पटेलनगर थाना क्षेत्र में एक कॉल सेंटर की जानकारी मिली। जिस पर शुक्रवार देर रात पटेलनगर क्षेत्र के प्रीति एनक्लेव में आईएचएम बिल्डिंग के प्रथम तल में संचालित कॉल सेंटर में छापा मारकर कॉल सेंटर संचालक आसाम निवासी थॉनरिपाऊ रांगमेयी उर्फ विक्टर उर्फ जॉर मिलर और प्रदीप नेहवाल पुत्र गबरू लाल निवासी गणेशपुर शिमला बायपास को गिरफ्तार किया गया। कॉल सेंटर से आरोपियों की ओर से प्रयोग किए जा रहे आठ लैपटॉप, चार चार्जर, दो वाईफाई राउटर, एक हेड फोन, एक डायरी, एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। साथ ही मुख्य संचालक से एक बीएमडब्ल्यू, एक लैंड क्रूजर, इनोवा, और टोयआ कोरोला कार भी बरामद की गई। आरोपी कॉल सेंटर के माध्यम से देशी-विदेशियों से मेल और अन्य सॉफ्टवेयर के माध्यम से एप्पल के आई ट्यून, एंटीवायरस आदि की सर्विस देने के नाम पर धोखाधड़ी करते थे। आरोपी कई लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं।
विज्ञापन

ऐसे करते थे धोखाधड़ी
पकड़े गए कॉल सेंटर का संचालक असम निवासी थॉनरिपाऊ रांगमेयी उर्फ विक्टर ने बताया कि वर्ष 2015 में वह देहरादून आया था। वह पहले दून बिजनेस सेंटर में एक कॉल सेंटर में काम करता था। जहां उसे एक सॉफ्वेयर के बारे में जानकारी मिली थी। जिससे किसी अन्य के डिवाइस पर आई तकनीकी खराबी का ठीक किया जा सकता है। जहां वह काम करता था वह कॉल सेंटर 2018 में बंद हो गया था। इसके बाद उसने जाखन में टैक ट्रस्ट आईटी सर्विस नाम से अपनी कंपनी खोली। इस दौरान उसने विदेशी नागरिकों से उनकी परिवार की जानकारी प्राप्त कर सॉफ्टवेयर में अपलोड किया। इसके लिए एक टोल फ्री नंबर का इस्तेमाल किया और खुद को संबंधित देश का नागरिक के साथ-साथ संबंधित साफ्टवेयर का कस्टमर केयर ऑपरेटर बताकर ठगी की। इस काम में उसे विदेशी वेंडरों से विदेशी नागरिकों का डाटा प्राप्त होता था। वेंडरों को विक्टर प्रति कस्टमर 180 रुपये देना पड़ रहा था। विक्टर ने बताया कि उसे नेहरू कॉलोनी में कई साल तक कॉल सेंटर संचालित किया, लेकिन विदेशी नागरिकों की जानकारी लेने में काफी समय लगता था और वेंडरों को कमीशन के तौर पर काफी राशि भी खर्च हो रही थी। जिससे उसको काफी नुकसान हो रहा था। इसके बाद उसने खुद ही डार्क वेब से विभिन्न सॉफ्टवेयरों की जानकारी हासिल की और खुद एक वेंडर बन गया और अन्य का जानकारी देकर खुद ही वेंडर बन गया और जानकारी देकर कमीशन प्राप्त करने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

गूगल कंपनी की सिक्योरिटी को बायपास करने के लिए करता था डार्क वेब से खरीदे सॉफ्टवेयर का प्रयोग
गूगल जब एक मैक आईडी या एक मेल आईडी से काफी संख्या में मेल होती है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल देता है और निगरानी करता है। ऐसा न हो इसके लिए विक्टर ने एक सॉफ्टवेयर खरीदा। जो उसके कम्प्यूटर की मैक आईडी को चेंज कर देता था। इसके माध्यम से वह अपनी मैक आईडी हर घंटे में चेंज कर देता था। इसके अलावा वह एक अन्य सॉफ्टवेयर का प्रयोग करता था, जिससे उसकी आईपी चेंज हो जाती थी। इसके माध्यम से विक्टर भारत से ही अन्य देशों की आईपी चेंज करता था।
हर माह बदल देता था टोल फ्री नंबर
जांच में एसटीएफ ने पाया विदेशी नागरिकों से बात करने के लिए विक्टर कंप्यूटर पर जिस टोल फ्री नंबर से बात करता था, उसे उसे हर माह बदल देता था। वह बात करने और कॉल प्राप्त करने के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर का प्रयोग करता था। वह कार्य के बदले विदेशी लोगों से 200 से 400 डॉलर गूगल गिफ्ट कार्ड लेता था। जिसे बाद में वह वेंडरों के माध्यम से भारतीय रुपये में परिवर्तित करता था।
खातों में में पिछले छह माह में हुआ लाखों का लेनदेन
एसटीएफ ने जब विक्टर के खातों की जानकारी प्राप्त की तो विगत छह माह में उसके एसबीआई खाते में 20 लाख, एक्सिस बैंक में 28 लाख रुपये तथा आईसीआईसीआई 30 लाख रुपये की लेन-देन हुई है। वह कभी भी धोखाधड़ी में अपना असली नाम प्रयोग नहीं करता था।
चार लग्जरी कारें बरामद
धोखाधड़ी से उसने चार लग्जरी कार में खरीदी थी। जिसमें एक बीएमडब्ल्यू, एक लैंड क्रूजर पराडो, टोयटा इनोवा और टोयटा कोराला शामिल हैं। पुलिस ने सभी को जब्त कर लिया है। वह वर्तमान में 20 हजार रुपये किराए के फ्लैट में रह रहा था और 25 हजार प्रति माह किराए पर उसने एक फ्लोर कॉल सेंटर के लिए लिया था।

छह माह में एसटीएफ ने पकड़े पांच कॉल सेंटर
विगत छह माह में एसटीएफ पांच फर्जी कॉल सेंटरों का खुलासा कर चुका है। इस दौरान 16 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 51 लैपटॉप और अन्य उपकरण बरामद किए जा चुके हैं। एसटीएफ अभी तक अपराधियों के करोड़ों रुपये फ्रीज कर चुका है। पांचों कॉल सेंटर की जांच से पता चला है कि सभी ठगी के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे थे। इस कॉल सेंटर में एक नया ट्रेंड सामने आया कि ठगी के लिए देशी विदेशी नागरिकों की ईमेल आईडी गूगल एक्सट्रेक्ट से प्राप्त किए गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed