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फिर बिना पशुबलि के संपन्न हुआ मां कालिंका मेला
अमर उजाला, पौड़ी
Updated Sat, 04 Jan 2014 07:58 PM IST
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पौड़ी और रूद्रप्रयाग जनपद के बीच में पड़ने वाले मां डौंडियों की कालिंका मंदिर में आयोजित मेले में इस बार भी पशुबलि नहीं हुई।
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लगातार दूसरी बार यह मेला बिना पशुबलि के संपन्न हो गया। मेले में विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ी हुई थी।
कई गांवों से पहुंचे श्रद्धालु
पौड़ी जिले के थलीसैण ब्लाक और रूप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि ब्लाक की संयुक्त सीमा में स्थित इस मां डौंडियों की कालिंका मंदिर आयोजित इस मेले में पौड़ी और रूद्रप्रयाग दोनों जिलों कई गावों श्रद्धालु पहुंचे हुए थे।
मेले के तहत तीन जनवरी को आयोजित रात्रि जागरण एवं मंडाण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु ने प्रतिभाग किया।
चढ़ाया गया निशान
शनिवार को सुबह पाठ पूजन के साथ बचड़स्यूं पट्टी के सकरोड़ी गांव के लोगों द्वारा विधिवत पूजा अर्चना के साथ निशाण चढ़ाया गया। इसके बाद स्वागत चक्र की पूजा और हवन आयोजित किया गया है।
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मंदिर समिति के संरक्षक रवींद्र रावत ने बताया कि मेले में रूद्रप्रयाग और पौड़ी जिले से पाटा, बणगांव, बणगांव तल्ला, बणसौं सकरोड़ी, कांडा, घडियाली, सराणा, चुठाणी, टीला, स्योली आदि गांवों से लोग पहुंचे हुए थे। उन्होंने बताया कि इस बार भी यह मेला बिना पशुबलि के संपन्न हुआ।
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सैकड़ों पशुओं की होती थी बलि
उन्होंने बताया कि पहले इस मेले में हर साल सैकड़ों बकरों और 10 से 15 के बीच बागी की बलि दी जाती थी। मंदिर समिति के प्रयासों से पिछले साल से इस मंदिर में लगने वाले मेले में भी पशुबलि बंद हो गई है।
मेले के आयोजन मंदिर समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट, सचिव भारत सिंह नेगी, पुजारी हर्ष सिंह, जगन सिंह, मनवर सिंह, चंद्र सिंह, उम्मेद सिंह समेत सभी क्षेत्रवासियों का सहयोग रहा।
थलीसैण के उपजिलाधिकारी जीआर बिनवाल ने बताया इस बार भी उक्त मेला बिना पशुबलि के ही शांतिपूर्वक तरीके से संपन्न हो गया है।