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आंगनबाड़ी केंद्र शहर में, किराया ग्रामीण क्षेत्र का
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देहरादून। नगर निगम में शामिल किए जा चुके वार्डों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को अभी भी शहरी क्षेत्र के बजाय ग्रामीण मानकों के अनुरुप किराया दिया जा रहा है, जिसे लेकर केंद्र संचालकों में रोष है। उनका कहना है कि यदि उन्हें शहरी क्षेत्र के मानक अनुसार भुगतान नहीं किया गया तो आगे आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन करना मुश्किल होगा। कुछ समय पूर्व ज्ञापन सौंप बाल विकास अधिकारी के संज्ञान में भी यह मामला लाया गया।
राजधानी में कई ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल कर 2018 में नए 40 वार्डों का गठन किया गया। वर्तमान में इन वार्डों में किराये के कमरे में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी केंद्रों को चलाने में कई दिक्कतें उठानी पड़ रही है। दरअसल, ग्राम पंचायत से नगर निगम में शामिल हुए वार्डों में विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों को जो किराया दिया जा रहा है। वह ग्रामीण मानकों के हिसाब से दिया जा रहा है। जबकि नगर निगम में शामिल इन नए वार्डों में शहरी क्षेत्र के मानकों के हिसाब किराया दिया जाना था। ग्राम सभा आरकेडिया ग्रांट की उप प्रधान गीता बिष्ट के नेतृत्व में कुछ समय पहले भी केंद्र संचालक बाल विकास अधिकारी से मिले। बिष्ट ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी केंद्रों को किराये के रूप में कमरे के मानकों के अनुसार सात सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक दिया जा रहा है। जबकि शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के किराये के लिए तीन हजार रुपये की धनराशि दी जा रही है। बतौर बिष्ट वर्तमान समय में राजधानी में जितनी ग्राम पंचायतें नगर निगम में शामिल हो गई है। उन सभी आंगनबाड़ी केंद्र को किराये के रूप में दी जानी वाली धनराशि को शहरी मानकों के हिसाब से दिया जाना चाहिए। अन्यथा यहां आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से शासन को शहरी क्षेत्र में शामिल हो चुके वार्डों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को अब शहरी क्षेत्र के हिसाब से भत्ता दिए जाने का प्रस्ताव दिया जाना चाहिए था। हालांकि बाल विकास अधिकारी की ओर से इस संबंध में आगे प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही गई है। बिष्ट ने कहा कि इतने कम किराया भुगतान से लोगों को नुकसान हो रहा है।
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राजधानी में कई ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल कर 2018 में नए 40 वार्डों का गठन किया गया। वर्तमान में इन वार्डों में किराये के कमरे में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी केंद्रों को चलाने में कई दिक्कतें उठानी पड़ रही है। दरअसल, ग्राम पंचायत से नगर निगम में शामिल हुए वार्डों में विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों को जो किराया दिया जा रहा है। वह ग्रामीण मानकों के हिसाब से दिया जा रहा है। जबकि नगर निगम में शामिल इन नए वार्डों में शहरी क्षेत्र के मानकों के हिसाब किराया दिया जाना था। ग्राम सभा आरकेडिया ग्रांट की उप प्रधान गीता बिष्ट के नेतृत्व में कुछ समय पहले भी केंद्र संचालक बाल विकास अधिकारी से मिले। बिष्ट ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी केंद्रों को किराये के रूप में कमरे के मानकों के अनुसार सात सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक दिया जा रहा है। जबकि शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के किराये के लिए तीन हजार रुपये की धनराशि दी जा रही है। बतौर बिष्ट वर्तमान समय में राजधानी में जितनी ग्राम पंचायतें नगर निगम में शामिल हो गई है। उन सभी आंगनबाड़ी केंद्र को किराये के रूप में दी जानी वाली धनराशि को शहरी मानकों के हिसाब से दिया जाना चाहिए। अन्यथा यहां आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से शासन को शहरी क्षेत्र में शामिल हो चुके वार्डों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को अब शहरी क्षेत्र के हिसाब से भत्ता दिए जाने का प्रस्ताव दिया जाना चाहिए था। हालांकि बाल विकास अधिकारी की ओर से इस संबंध में आगे प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही गई है। बिष्ट ने कहा कि इतने कम किराया भुगतान से लोगों को नुकसान हो रहा है।
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