बोले 'वॉर हीरो': चीन, पाकिस्तान को धूल चटानी है तो सेना के आधुनिकीकरण पर देना होगा जोर
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विजय दिवस पर देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद में शिरकत करने सभी सेनाधिकारियों व सैन्यकर्मियों ने एक स्वर में इस बात पर जोर दिया कि जिस तरीके से देश दुनिया में राजनीतिक हालात बन रहे हैं और पूरी दुनिया में हथियारों की होड़ मची। दुश्मन देश पाकिस्तान व चीन अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण पर खासा जोर दे रहे हैं, उसे देखते हुए केंद्र सरकार को भारतीय सेना के आधुनिकीकरण पर खासा जोर देना होगा।
82 साल की उम्र पार कर चुके सेना के जांबाज़ कर्नल कुलदीप सिंह साहनी ने साफ तौर पर कहा कि सेना को और आधुनिकीकरण किए जाने की सख्त जरूरत है। हालांकि सरकार की ओर से आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी है लेकिन इसमें और अधिक तेजी लाने की जरूरत है। कर्नल साहनी का यह भी कहना है कि महज जांबा जी से ही युद्ध को नहीं जीता जा सकता है। सैनिकों को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने के साथ ही उनके मनोबल को ऊंचा बनाने के लिए कई और कदम उठाने होंगे। कमोबेश यही बात गोरखा राइफल्स के सेवानिवृत्त कैप्टन एलपी सेमवाल ने भी दोहराई।
कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके जांबाज़ सैन्य अधिकारी कैप्टन एलपी सेमवाल ने साफ शब्दों में कहा कि कारगिल युद्ध के समय भी अत्याधुनिक हथियारों की कमी सैनिकों को खली थी। लेकिन इसके बावजूद सैनिकों ने जांबाजी दिखाते हुए ‘टोलो हिल’ पर कब्जा कर भारतीय ध्वज फहराया था। हालांकि इस युद़्ध को जीतने के लिए सेना को भारी कीमत भी चुकानी पड़ी थी। सेना को अपने जांबाज 575 अधिकारियों, सैनिकों को खोना पड़ा था।
इतना ही नहीं पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि जहां एक तरफ चीन अपनी सेनाओं को ‘न्यूक्लियर बायोलॉजिकल केमिकल वार फेयर’ यानी एनबीसी तकनीक से लैस करने के साथ ही आम जनता को परमाणु युद्ध की स्थिति में निपटने के लिए उपकरण मुहैया कराया रहा है, वहीं भारतीय सेना में इन उपकरणों की भारी कमी है। यदि भविष्य में कभी परमाणु युद्ध हुआ तो न सिर्फ भारतीय सेना वरन देश को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेग्रा। सेना में अत्याधुनिक उपकरणों व गोला बारूद की कमी का जिक्र सूबेदार मेजर बीएस रावत, सूबेदार मेजर जीडी घिल्डियाल, जेडी बहुगुणा व एमएस बिष्ट जैसे अधिकारियों ने भी किया
कारगिल में हमसे आधुनिक थे पाक के हथियार
अमर उजाला संवाद में पहुंचे सभी सैन्य अधिकारियों ने एक सुर से सेना के राजनीतिक इस्तेमाल पर गहरी चिंता जतायी। जांबाज अफसरों ने कहा कि सेना पूरे देश की सुरक्षा करने के लिए है। जिसमें हर धर्म, मजहब, जाति, संप्रदाय के लोग शामिल होते हैं।
सेना से जुड़े अधिकारियों और सैनिकों का राजनीतिक पार्टियों से कोई लेना देना नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों से जिस तरीके से केंद्र सरकारें सेना का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही हैं उसे किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता है । सेना की राजनीतिक इस्तेमाल को रोकने के लिए सभी राजनीतिक दलों को सोचना होगा।
1999 में कारगिल युद्ध में भले ही सेना के जाबांजों ने अदम्य साहस से पाक सेना को खदेड़ दिया हो लेकिन उस समय पाकिस्तान के सैनिकों के पास न केवल हमारे से आधुनिक हथियार थे, बल्कि संसाधन भी मजबूत थे। कारगिल युद्ध के वार हीरो रहे हवलदार राजेश मल्ल ने बताया कि उस समय जहां उनकी यूनिट तैयार थी, उनके पास इंसास राइफल भी बाद में पहुंची थी। उनकी पोस्ट पर चार बार पाकिस्तानी रेंजरों ने अत्याधुनिक हथियारों से अटैक किया था।
लड़ते-लड़ते उनके पास सारा गोला-बारूद खत्म हो चुका था। जहां पाक रेंजर आधुनिक हथियारों के साथ लड़ रहे थे, वहीं हमारे पास इंसास राइफल भी बाद में पहुंचे थे। बताया कि उन्होंने दुश्मनों को मारकर वहां जाकर देखा तो उनके स्लीपिंग बैग,टैंट बिल्कुल आधुनिक थे। जबकि उनके पास जो स्लीपिंग बैग, टैंट, हथियार थे, उन्हें चढ़ाई में ले जाना भी भारी पड़ रहा था। लेकिन इसके बाद भी भारतीय सैनिकों ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तान के रेंजरों को खदेड़ने पर मजबूर कर दिया था।
दो माह की ट्रेनिंग से सीधे बॉर्डर पर
सीमा सुरक्षा बल के पूर्व अधिकारी जेडी बहुगुणा ने 1971 के लिए भारत-पाक युद्ध की यादों को साझा करते हुए बताया कि 4 अगस्त 1971 को वह सीमा सुरक्षा बल में शामिल हुए। दो माह की ही ट्रेनिंग कर पाए थे कि भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया। उन्हें बॉर्डर पर भेज दिया गया। युद्ध कौशल में पूरी तरह पारंगत होने के नहीं होने के बावजूद सैनिकों ने जबरदस्त जांबाजी दिखाई।
दुश्मन को बैनट से मार डाला
जांबाज अफसर जेडी बहुगुणा ने बताया कि उनकी व युवा साथियों की तैनाती भारत पाक सीमा पर ठीक बॉर्डर पिलर के पास की गई। इसी बीच पाकिस्तानी सैनिकों ने पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया। लेकिन उससे पहले की पाकिस्तानी दुश्मन कुछ कर पाते मैंने व मेेरे साथियों ने दुश्मनों पर धावा बोलकर उन्हें बैनट घोपकर मार डाला।
बेटे को कारगिल में मिला वीर चक्र
कैप्टन जीबी घिल्डियाल का बेटा शशिभूषण सेना में कर्नल हैं । 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान उनकी जांबाज सेवाओं को देखते हुए सरकार ने वीर चक्र से सम्मानित किया है। कैप्टन घिल्डियाल का कहना है कि देश प्रेम उनके परिवार की रग-रग में बसा है।
पाकिस्तानी बैराज की तस्वीरें उतारने को दुश्मन के इलाके में उतारा जहाज
संवाद में सेना के जाबांज अफसरों, सैनिकों ने भारत पाक युद्धों में जाबांजी से जुड़े एक से बढ़कर एक यादें ताजा की। सेवानिवृत्त कर्नल कुलदीप सिंह साहनी एक वाकया साझा करते हुए बताया कि 1971 के भारत- पाक युद्ध के दौरान उन्हें पाकिस्तान के छंब जोड़ियां सेक्टर में पाकिस्तानी इलाके में बने मराला बैराज की तस्वीरें उतारने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई।
दिलचस्प पहलू यह है कि जिस हवाई जहाज के जरिए तस्वीरें लेनी थी उसमें किसी भी प्रकार का हथियार व सूचना देने की प्रणाली नहीं थी। ऐसे में पाकिस्तानी क्षेत्र में दाखिल होकर बैराज की तस्वीरें उतारना खतरे से खाली नहीं था। बकौल कर्नल साहनी बैराज तक पहुंचने में 25 मिनट का वक्त लगा। जैसे ही बैराज से कुछ दूरी पर हवाई जहाज लेकर पहुंचा तो पाकिस्तान के दो जहाजों ने उन्हें देख लिया।
दुश्मनों के हमले से बचने के लिए जहाज को बैराज के पास एक खाली मैदान में उतार दिया गया जो पथरीला इलाका था। दुश्मन के जहाज कहीं हमला न कर दें, इसके लिए कर्नल साहनी अपने जहाज को चालू हालत में छोड़कर थोड़ी दूर पर जाकर छिप गए। जहाज चालू होने के चलते उड़ रही भारी धूल की वजह से पाकिस्तानी जहाज उन्हें व उनके जहाज को नहीं देख सके।
थोड़ी देर के बाद दोनों पाकिस्तानी जहाज निकल लिए। उनके जाने के बाद ही मैं दोबारा अपने जहाज पर पहुंचा और उसे पूरी ताकत के साथ दौड़ाते नए सिरे से उड़ान भरी। बांध के ऊपर उड़ते तस्वीरें खींचने शुरू कर दी। लेकिन इसी बीच पाकिस्तानी सेना ने जहाज पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी । गनीमत रही कि एक भी गोली जहाज में नहीं लगी वरना सब कुछ गड़बड़ हो जाता।
तस्वीरें खींचने के साथ ही सुरक्षित लौटने पर अधिकारियों ने ना सिर्फ उनकी इस जाबांजी के लिए पीठ थपथपाई, वरन इस जाबांजी के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया । कर्नल साहनी ने बताया कि मराला बैराज की तस्वीरें खींचने के पीछे मंशा यह थी कि मिसाइलों व आर्टिलरी गन से ताबड़तोड़ फायरिंग कर इस बैराज को तोड़ दिया जाए। बांध टूटने के साथ ही लाखों क्यूबिक मीटर पानी पाकिस्तानी इलाके में फैल जाएगा और पाकिस्तानी सेना के टैंकों को भारत की ओर बढ़ने से रोका जा सकेगा।