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अमर उजाला संवाद : लोगों ने गिनाए नशाखोरी के कारण, नियंत्रण के भी सुझाए उपाय 

Mon, 17 Feb 2020 09:56 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 17 Feb 2020 09:56 PM IST
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Amar ujala samwad in dehradun About drug addiction
samvad, base samvad - फोटो : अमर उजाला

नशाखोरी करने वाले ज्यादातर लोग अपने परिवार की बेरुखी के शिकार होते हैं। जिंदगी की भागदौड़ में व्यस्त मां-बाप के पास इतना समय नहीं कि वह बच्चे के साथ बैठकर घंटाभर बात कर सकें। उनके शौक में शामिल हों और बच्चों के दोस्त बनकर रहें। ऐसे में बच्चा इंटरनेट, मोबाइल और दोस्तों के बीच अपने लिए जगह तलाशता है। लेकिन उसे सही और गलत की समझ नहीं होती। 

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यही वक्त होता है, जब वो जाने-अनजाने में नशे की गिरफ्त में आ जाता है। शुरूआत में शौक या दोस्तों के दबाव में किया गया नशा, धीरे-धीरे उसके खून में जहर की तरह फैलने लगता है। बच्चा चाहकर भी उस जंजाल से बाहर नहीं निकल पाता। ये अब हर दूसरे घर की कहानी हो गई है।
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सोमवार को पटेलनगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित बेस संवाद में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने यह सब बातें कही। उन्होंने कहा कि नशे के बढ़ते चलन के लिए परिवार के सदस्यों के बीच बढ़ रही दूरी और संवादहीनता प्रमुख कारण है। मौजूद सभी लोगों ने कहा कि आज हर तरह का नशा आसानी से उपलब्ध है।
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छोटे-छोटे स्कूली बच्चों तक को नशे की आदत डाली जा रही है। उम्र बढ़ने के साथ बच्चे न सिर्फ खुद नशा कर रहे हैं बल्कि इसके पैडलर भी बन रहे हैं। दून के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले दूसरी जगहों के ज्यादातर बच्चे नशे की गिरफ्त में हैं। घर से बाहर रहने वाले इन बच्चों को टोकने वाला कोई नहीं होता। मां-बाप इन्हें पैसा भेजते हैं, जिसका उपयोग ये नशा खरीदने में करते हैं। 

पुलिस नहीं चाहती नशे को रोकना

संवाद में सभी लोगों ने कहा कि पुलिस नशे पर रोक नहीं लगाना चाहती। ड्रग्स के छोटे-छोटे पैडलरों को पकड़ा जाता है लेकिन कभी बड़े तस्कर को पकड़ने की कोशिश नहीं होती। हर बार नशे की तस्करी में कुछ खास बदमाशों के नाम सामने आते हैं। लेकिन, पुलिस उन पर कोई कार्रवाई नहीं करती। पुलिस रिकॉर्ड मात्रा में नशा पकड़ने का दावा कर अपनी पीठ थपथपाती है। जबकि देखा जाए तो ये पुलिस की नाकामी है। शहर में हर जगह नशा आसानी से उपलब्ध है, जिसकी बिक्री में कहीं न कहीं पुलिस की भी मिलीभगत है।

आसानी से मिल रहा नशा

दून में कोई ऐसा नशा नहीं है, जो आसानी से न मिल रहा हो। सस्ते से सस्ता और महंगे से महंगा नशा हर-गली मोहल्ले में बिक रहा है। स्कूल-कॉलेजों की कैंटीन से पान की गुमटी तक, हर तरह का नशा बिक रहा है। इसके अलावा नशीली दवाएं, नशे के इंजेक्शन बेचने वालों का नेटवर्क भी मोहल्ले-मोहल्ले तक फैला हुआ है। पुलिस किसी एक को पकड़ती है, तो कई नए पैदा हो जा रहे हैं। 

हर पांचवां बच्चा नशे की गिरफ्त में

ओलंपस हाई स्कूल की ऑनर एवं प्रिंसिपल अनुराधा मल्ला के अनुसार हर पांचवां बच्चा नशे की गिरफ्त में है। वहीं दो बच्चे इसकी शुरूआत कर रहे होते हैं। अन्य लोगों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गरीब और अनपढ़ ही नहीं बल्कि अमीर और पढ़े-लिखे लोग भी नशे की गिरफ्त में हैं।

बेहद सख्त किया जाए कानून

होटल रमाडा के जनरल मैनेजर रवि सिंह ने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले में बेहद सख्त कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नशा आने वाली नस्लों को भीतर से खोखला कर रहा है। अगर हम आज अपने बच्चों को इससे नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ी नशे में अपना सब कुछ गंवा बैठेगी। 

गलत चीजें फैला रही टीवी-फिल्में

फोक फ्यूजन के जरिये अपनी अलग पहचान बनाने वाले शाश्वत जे. पंडित के अनुसार एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री नशे को लेकर गलत चीजें फैला रही है। टीवी-फिल्मों में नशा करने वालों को हीरो बनाकर पेश किया जाता है। हमारे गीतों में नशे को बढ़ावा देने वाले शब्द होते हैं। ऐसा दिखाया जाता है कि नशा करने वाला कूल है। नशे को ग्लोरिफाई किया जाता है जो युवाओं के दिमाग पर गलत असर डालती है। खुद को कूल दिखाने के फेर में युवा भी नशे की तरफ बढ़ने लगते हैं।

झूठ बोलकर बेचते हैं नशा

नशा करने वाले झूठ बोलकर युवाओं को अपना शिकार बनाते हैं। कई बार कहते हैं कि नशा करने से कांस्ट्रेशन अच्छा होता है, जिससे पढ़ाई पर फोकस होता है। इसके चलते कई अच्छे पढ़ने-लिखने वाले युवा नशा करने लगते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि नशा सिर्फ शरीर को नुकसान करता है। इससे किसी तरह का फोकस नहीं बढ़ता। 

पैरेंट्स-टीचर की काउंसिलिंग भी जरूरी

ड्रग्स से स्कूली बच्चों और युवाओं को बचाने के लिए पैरेंट्स और टीचर की काउंसिलिंग जरूरी है। ज्यादातर टीचर और पैरेंट्स को पता नहीं होता कि बच्चा कैसे-कैसे नशे कर सकता है। उन्हें नशे से जुड़ी हर चीज की जानकारी होनी चाहिए। ताकि अगर वह कभी बच्चे के पास उन चीजों को देखें तो सतर्क हो सकें। 

शराब नहीं परोसी तो लोग नाराज हुए

शादी में शराब नहीं परोसने पर लोग नाराज हो गए। संवाद में अपने किसी परिचित की शादी का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने शादी की व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए। अच्छा खान-पान और अन्य व्यवस्थाएं की। लेकिन लोग यही कहते रहे कि मजा नहीं आया। शराब नहीं परोसने पर कई दिन तक लोग उन्हें सुनाते रहे। 

शराबबंदी नहीं समाधान

नशे पर रोक के लिए शराबबंदी समाधान नहीं है। उल्टा लोगों को लगता है कि शराब पर प्रतिबंध लगाने से इसकी तस्करी बढ़ जाएगी। लोगों ने कहा कि नशे के लिए शराब पीने वालों की तादाद कम है। इसके बजाय आज युवा अन्य नशे में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। सूखा नशा करने वालों की संख्या ज्यादा हो गई है। 

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