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Amar Ujala Samvad: खेल के साथ मत कीजिए खिलवाड़...कैसा है उत्तराखंड में खेल का हाल, जानें ये सवाल और जवाब

Sat, 04 Mar 2023 03:01 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 04 Mar 2023 03:01 PM IST
सार

उत्तराखंड को अलग राज्य बने 22 साल बीत गए, लेकिन प्रदेश में उत्कृष्ट खेल का माहौल नहीं बन सका। कई खिलाड़ियों ने देश-दुनिया में नाम किया लेकिन उसमें राज्य सरकार का उल्लेखनीय योगदान नहीं रहा। खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को किट तक नहीं मिलती। उन्हें खेल स्पर्धाओं में शोषण का शिकार होना पड़ता है। 

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Amar Ujala Samvad Uttarakhand Sports Players do not get kits prizes have not been received for three years
अमर उजाला संवाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल लेने वाले खिलाड़ियों के लिए पुरस्कारों की घोषणा की, लेकिन उन्हें पिछले तीन साल से ये पुरस्कार भी नहीं मिल सके। खेल प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को किट नहीं मिलती, उन्हें स्पर्धाओं में शोषण का शिकार होना पड़ता है।

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अमर उजाला के खेलेगा दून तो खिलेगा दून की थीम पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में आए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल संघों के प्रतिनिधियों ने ऐसे कई मसले उठाए और खेलों से जुड़ी दिक्कतों को खेल विभाग के अधिकारियों के सामने पूरी बेबाकी के साथ रखा।
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वरिष्ठ संपादक अमर उजाला: राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए कुछ बच्चों का चयन हुआ था, लेकिन रिजर्वेशन न होने की वजह से बच्चे प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो पाए। ऐसी स्थिति न हो, इसके लिए सरकार क्या कर रही है ?
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जवाब खेल निदेशक जितेंद्र सोनकर: प्रतियोगिताओं में फेडरेशन के माध्यम से खिलाड़ी प्रतिभाग करते हैं, रिजर्वेशन नहीं हो पाया तो जिम्मेदारी राज्य सरकार पर आ गई। जबकि सच्चाई यह है खेल विभाग को इसकी कोई जानकारी ही नहीं होती है। मैं इसे मानता हूं कि कहीं न कहीं खेल विभाग की कमी है। गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों के बारे में हमें यह नहीं मालूम था कि उत्तराखंड से कितने बच्चों ने इसमें प्रतिभाग किया। हमने खेल फेडरेशन के साथ बैठक कर फेडरेशन और विभाग के बीच गैप को कम करने का प्रयास किया है।

सवाल, विशेष भृगुवंशी: भारतीय राष्ट्रीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान एवं अर्जुन पुरस्कार विजेता उत्तराखंड में पिछले तीन साल से खिलाड़ियों एवं कोच को देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य पुरस्कार, खेल रत्न एवं अन्य पुरस्कार नहीं मिले। इनडोर स्टेडियम में खेल उपकरण नहीं हैं?

जवाब: प्रदेश में कोविड की वजह से खेल पुरस्कार नहीं मिल पाए थे। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं।

सवाल, बीएम लखेड़ा, बेसबॉल संघ के प्रदेश सचिव: विभाग की ओर से खिलाड़ियों के लिए किट मिलती थी, आने जाने का पैसा मिलता था, लेकिन अब नहीं मिल रहा। एसोसिएशन इस पैसे को खिलाड़ियों से ले रहा है। ऐसे तो उनका शोषण हो रहा है?
जवाब: अब जो भी टीम जाएगी किट के साथ जाएगी, उनकी जो भी मांग है पूरी की जाएगी। आने-जाने का किराया दिया जाएगा। मैं आश्वस्त करता हूं, आगे ऐसा नहीं होगा।

सवाल: एक कोच मेहनत करके खिलाड़ी को खेल के लिए तैयार करता है। प्रतियोगिताओं में खिलाड़ी को कोई और कोच लेकर चला जाता है, ऐसे में कोच को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि किसी और कोच को मिल जाती है, ऐसा क्यों?
जवाब: कोच को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि किसी और को मिल जाती है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस व्यवस्था को सही किया जाएगा।
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सवाल, नरेंद्र बिष्ट, खेल प्रशिक्षक एवं पूर्व प्रधानाचार्य:
स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नहीं हैं। जीआईसी पटेलनगर में 600 बच्चे हैं लेकिन व्यायाम के शिक्षक नहीं है। जिन स्कूलों में व्यायाम शिक्षक हैं, उनकी डयूटी बीएलओ में लगी है। बच्चे खेलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सिखाएगा कौन?

जवाब:  यह शिक्षा विभाग का विषय है। मेरा इस विषय पर कमेंट करना सही नहीं है। शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं हो रही है, इस विषय पर शिक्षा विभाग ही बता सकता है।

सवाल: शिक्षा विभाग की टीम के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में जो कोच जाते हैं, उसमें किसी अन्य विधा का कोच नहीं जा सकता है?
जवाब:  खेल विभाग में इस तरह की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इसके अलावा राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय लेवल की प्रतियोगिता होती हैं या कोई फेडरेशन प्रतियोगिता करवाता है, ऐसे में कौन कोच जाएगा, इस बारे में निर्णय संबंधित फेडरेशन ही करता है। यह निर्णय खेल विभाग का नहीं होता है।

सवाल , ऋषभ रावत, नेशनल खिलाड़ी
नेशनल खेलो इंडिया विंटर में मैंने गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक जीता है, लेकिन सरकार की ओर से हमें कुछ नहीं मिला। इसके अलावा जब हम खेलो इंडिया के लिए गए तो अपने खर्च पर गए थे। हमें रहने की जगह तक नहीं मिल पाई थी, सर्दी में हम भटक रहे थे, ऐसा क्यों हुआ?
जवाब: नेशनल खेलो इंडिया विंटर प्रतियोगिता में राज्य सरकार की ओर से कोई टीम नहीं भेजी गई थी। आपको एसोसिएशन की ओर से भेजा गया था। नई खेल नीति 2021 के तहत जो शासनादेश जारी हुआ है, उसमें खेलो इंडिया को जोड़ा गया है। इसके लिए विजेताओं को धनराशि देने का प्रस्ताव है, लेकिन यह धनराशि तुरंत देनी है यह प्रावधान नहीं है। आवेदन के बाद धनराशि दी जाएगी। जिस एसोसिएशन ने आपको भेजा था, उसने खेल विभाग को इस बारे में नहीं बताया था।

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खेलेगा दून तो खिलेगा दून थीम पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान विशेष भृगवंशी, बेसबॉल संघ के सचिव डीएम लखेड़ा, खेल विभाग के संयुक्त निदेशक धर्मेंद्र भट्ट, प्राचार्य महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज राजेश ममगाई, युवा कल्याण विभाग के सहायक निदेशक नीरज गुप्ता, कोच बीएन अग्रवाल, डा.टीएन जौहर, डा.जेएस सचान, उत्तराखंड मास्टर स्पोटर्स एसोसिएशन के बीपी सुनवार, बॉक्सिंग कोच धीरेंद्र सिंह, धीरज जंगपांगी, केबी गुरुंग, धीरज, महिपाल सिंह मिया, ऋषभ रावत, जगदीश सिंह, शैलेंद्र सनवाल आदि मौजूद रहे।

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