Amar Ujala Samvad: कैलाश खैर बोले- कम लोगों में होता है सपनों को पूरा करने का पागलपन, बताया ऋषिकेश का किस्सा
कैलाश खेर को फिल्म देखने का शौक नहीं है। उन्होंने कहा, भले ही वह संगीत और फिल्म की दुनिया से ताल्लुक रखते हैं लेकिन वह फिल्में नहीं देखते। यह बात जब आमिर खान को पता चली तो उन्होंने अपनी फिल्म लगान की डीवीडी कैलाश को दी थी।
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ईश्वर जिंदगी सबको देता है लेकिन अपने सपनों को पूरा करने के लिए पागलपन और जुनून किसी-किसी में होता है। यह बात संगीतकार और गायक पद्मश्री कैलाश खेर ने इंद्रधनुष सत्र के दौरान कही। उन्होंने कहा, जिंदगी में अलग करने वालों का बाल्य अवस्था से पता चल जाता है। उन्होंने जब भी मैं ख्वाब में होता हूं, सबको है लगता मैं सोता हूं, होता हूं मैं जो सबसे जुदा तो उसकी पनाहों में होता हूं। दुनिया में जो भी अलग है, लगता वो सबको गलत है... कविता से सभा में मौजूद लोगों में जोश भर दिया। कैलाश ने कहा, जटिलताओं, कटुताओं, विषमताओं का विष पीने वाला गूंगा भी गाने लगता है। साथ ही उन्होंने कहा, हमने बस यही सीखा है, बात चाहे बेसलीखे की हो लेकिन बोलने का सलीखा होना चाहिए।
बेटे के साथ देखी थी पहली फिल्म
कैलाश खेर को फिल्म देखने का शौक नहीं है। उन्होंने कहा, भले ही वह संगीत और फिल्म की दुनिया से ताल्लुक रखते हैं लेकिन वह फिल्में नहीं देखते। यह बात जब आमिर खान को पता चली तो उन्होंने अपनी फिल्म लगान की डीवीडी कैलाश को दी थी। इस फिल्म में भी कैलाश ने गाना गाया है। बताया, साल 2015 में आई फिल्म बाहुबली द बिगनिंग उन्होंने अपने बेटे के साथ मिलकर देखी थी। यह पहली फिल्म थी जो उन्होंने बड़े पर्दे पर फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखी थी। इस फिल्म के लिए कैलाश ने कौन है वो कौन है... गीत भी गाया है, जो उन्होंने संवाद के मंच से भी सुनाया।
कैलाश खेर ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया, ऋषिकेश के गंगा घाट पर वह भगवान शिव के भजन गाया करते थे। वह पंडिताई करने के लिए ऋषिकेश आए थे। एक ब्राह्मण परिवार में पले-बड़े कैलाश ने कहा, आसानी से सभी सुविधाएं मिले यह सबका सपना होता है। लेकिन, सफलता पाने के लिए हमें जुनूनी होना पड़ता है।
नाटू-नाटू पर थिरकीं श्रिया और मीनाक्षी
इंद्रधनुष सत्र में उत्तराखंड मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री श्रिया सरन और उत्तर प्रदेश के राय बरेली से निकली अभिनेत्री मीनाक्षी दीक्षित नाटू-नाटू गाने पर थिरकीं तो सब मंत्रमुग्ध हो गए। अभी हाल ही में श्रिया सरन को दृश्यम-2 में और मीनाक्षी को तमिल, तेलगू और साउथ की फिल्मों में बहुत पसंद किया गया है। संवाद के दौरान श्रिया और मीनाक्षी ने अपने डांस के साथ ही गायन की कला भी दिखाई।
उत्तराखंड की हर गली से मेरा नाता है : श्रिया
अभिनेत्री श्रिया सरन से जब दृश्यम सीरीज फिल्म का यह सवाल पूछा गया कि दो अक्तूबर को विजय सालगांवकर पणजी गया था? तो श्रिया अपनी हंसी नहीं रोक सकीं। अमर उजाला संवाद में श्रिया ने बताया कि उत्तराखंड से उनका एक अपनेपन का रिश्ता है। कहा, उनके पिता देहरादून में पढ़े हैं। दादाजी डीएवी कॉलेज में प्रोफेसर थे। वह खुद भी अपनी उम्र के 16 साल तक हरिद्वार में रहीं और यहीं पढ़ाई की। कहा, उत्तराखंड की गलियों में मेरी कहानी छिपी है। श्रिया ने बताया कि वह एक कथक डांसर हैं। उनको लगता है कि युवाओं को क्लासिकल डांस की ओर जाना चाहिए।
फिल्में चलें न चलें पर कुछ नया सीखते रहना महत्वपूर्ण
हिंदी फिल्में कम चल रही हैं और साउथ की फिल्में हिट होती जा रही हैं, इस पर श्रिया ने कहा कि कोरोनाकाल में थिएटर कम चले। इस वजह से लोग वहां जा नहीं पा रहे थे लेकिन एक बार फिर से वापसी हो रही है। हमारी फिल्में चल रहीं हैं या नहीं लेकिन हम क्या नया सीख रहे हैं ये महत्वपूर्ण है। हम हर दिन कुछ नया करने की सोच रहे हैं। फिल्म की भाषा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। एक फिल्म कई भाषाओं में बन रही है।
छोटे शहरों के लोगों की सोच आज भी नहीं बदली : मीनाक्षी
मीनाक्षी ने कहा कि वह एक छोटे से शहर राय बरेली से निकलकर आई हैं। दुनिया कहां से कहां पंहुच गई लेकिन आज भी छोटे शहरों के लोगों की सोच नहीं बदली। वहां के लोग आज भी अपने बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनते ही देखना चाहते हैं। कहा कि ‘मुझे कुछ अलग करना था इसलिए परिवार को समझाने में मुझे वक्त लगा। लेकिन, हर प्रोफेशन बड़ा और महत्वपूर्ण है।’ मीनाक्षी डांस के साथ गाना भी बहुत अच्छा गाती हैं। उन्होंने ‘बुहे बरियान ते नाले कंडा टप्प के’ गाना सुनाया।
साउथ में 30 दिन में फिल्म पूरी हो जाती है
मीनाक्षी ने कहा कि बॉलीवुड में भी काम कर रही हूं। साउथ इंडस्ट्री में फिल्म अधिक बनती हैं। इसके अलावा वहां पर फिल्में जल्दी बनती हैं। वहां, 30 दिन में फिल्म पूरी हो जाती है। वहां पर लड़कियां निगेटिव रोल भी अधिक करती हैं। नच ले वे विद सरोज खान शो में उन्होंने प्रतिभाग किया था। इसके बाद उन्हें साउथ फिल्म के ऑफर मिले और फिर कभी काम ढूंढना नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, ओटीटी प्लेटफॉर्म आने से फिल्में देखना आसान हो गया है। थियेटर के बारे में उन्होंने कहा, यह एक अनुभव है यह कभी बंद नहीं होना चाहिए।