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अमर उजाला मेधावी सम्मान: सम्मानित हुए होनहार, 11 हजार रुपए देगी उत्तराखंड सरकार

Sat, 27 Jul 2019 07:52 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 27 Jul 2019 07:52 PM IST
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Amar ujala Medhavi samman 2019 CM Trivendra singh rawat will honor to students
सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रत्येक जिले में टॉप तीन स्थान हासिल करने वाले होनहारों को राज्य सरकार 11-11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देगी। शनिवार को राजधानी के जीएमएस रोड स्थित होटल सैफ्रॉन लीफ में आयोजित अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान के दौरान होनहारों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह घोषणा की। 

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार डा. केएस पंवार और अमर उजाला समूह के निदेशक प्रबल घोषाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उसके बाद प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे मेधावियों को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सम्मानित किया।

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अरविंद पांडेय ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया

सभी मेधावियों को अमर उजाला की ओर से मेडल, प्रशस्ति पत्र, कंप्यूटर बैग और किताबें भेंट की गई। साथ ही कार्यक्रम के सभी सहयोगियों को भी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 

उन्होंने कहा कि अमर उजाला हर साल राज्य के कोने-कोने से हीरे चुनकर लाता है। मैंने देखा कि कई होनहार बहुत दुबले-पतले हैं। हरिद्वार की एक बेटी बहुत पतली थी, उसे मैंने कहा कि रोज गंगा का पानी पिया करो। होनहारों को समझना चाहिए कि अच्छी शिक्षा के साथ बेहतर स्वास्थ्य भी बेहद जरूरी है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में टॉप करना सफलता की ओर पहला कदम है। बड़ा डॉक्टर, इंजीनियर, मंत्री या मुख्यमंत्री बनने से ज्यादा जरूरी है कि हम ईमानदार और अच्छे नागरिक बनें।

पुस्तकालय का विकल्प हो सकता है शिक्षक का नहीं: मुख्यमंत्री

पुस्तकालय का विकल्प हो सकता है। विद्यालय भवन नहीं है तब भी काम चल सकता है। लेकिन, शिक्षक का कोई विकल्प नहीं हो सकता। बिना गुरु के ज्ञान हासिल नहीं किया जा सकता। मेधावियों की यह सफलता उनके शिक्षकों की मेहनत और प्रयास का सम्मान किए बिना अधूरी है। शनिवार को आयोजित समारोह में मेधावियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह बातें कही। मेधावियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक होनहार से बातचीत भी की।

उन्होंने होनहारों से उनकी भविष्य की योजनाओं के संबंध में भी जानकारी ली। साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी हिदायत दी। उसके बाद मेधावियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने दोगुने उत्साह और मेहनत के साथ तैयारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्या भारती में आचार्य पूरी मेहनत और कर्मठता के साथ शिक्षा से जुड़े होते हैं। उन्हें अंदर जो समर्पण का भाव होता है, उससे ही हर साल हजारों छात्र सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हैं। एक शिक्षक कितना कर सकता है, इसको जिक्र कई बार महात्मा गांधी ने भी किया है। 
 

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महंगे निजी स्कूल भी हमारे सामने फीके

मुख्यमंत्री ने कहा कि दून के महंगे निजी स्कूल भी हमारे सरकारी विद्यालयों के आगे पूरी तरह फीके हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कालसी स्थित एकलव्य विद्यालय से इस वर्ष सात बच्चों का चयन आईआईटी के लिए हुआ है। दो बच्चों का चयन मेडिकल और चार बच्चों का चयन दिल्ली विश्वविद्यालय के ऑनर्स कोर्स के लिए हुआ है। उन्होंने कहा कि मंहगी फीस लेने वाला कोई भी निजी विद्यालय इन आंकड़ों के आसपास भी नहीं ठहरता। 

भावी भारत के निर्माता हैं मेधावी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेधावी ही भावी भारत के निर्माता हैं। देश में कई तरह की योजनाएं हैं। लेकिन तब तक उनका लाभ समाज को नहीं मिल सकता जब तक जिम्मेदार नागरिक न हों। उन्होंने आह्वान किया कि अभिभावक अपने बच्चों को एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर तैयार करें, ताकि वह देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।

नियम-कानूनों का पालन करना सीखें
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून और सजा का प्रावधान सभी के लिए है। उसके बावजूद अपराध कम नहीं हो रहे हैं। इसका कारण है कि हमने कभी नागरिक दायित्वों पर ध्यान नहीं दिया। नियम-कानून का पालन सभी को करना है, यह समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई को लेकर हमें पश्चिमी देशों से सीखने की जरूरत है।

सम्मानित होने वाले होनहारों के नाम...


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