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पकड़ा माउस तो बुनने लगीं सपने

Thu, 22 Jan 2015 01:06 PM IST
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 22 Jan 2015 01:06 PM IST
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amar ujala foundation computer training.

दून की बांदल घाटी के सरखेत और आसपास के गांवों की महिलाओं का मानना है कि अमर उजाला फाउंडेशन उनके जीवन में नई रोशनी लेकर आया है।

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कंप्यूटर का प्रशिक्षण उन्हें इतना भाने लगा है कि सुबह जल्दी-जल्दी घरेलू काम निपटाकर तय समय पर प्रशिक्षण केंद्र पर हाजिर हो रही हैं। भविष्य के कई सुनहरे सपने इन दिनों उनकी पलकों में पल रहे हैं। यह ललक देख सास समेत घर के बुजुर्ग भी उनका सहयोग कर रहे हैं।

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बांदल घाटी के सरखेत गांव में कंप्यूटर केंद्र शुरू किए एक माह हो गए हैं। प्रशिक्षण का समय भी महिलाओं की सुविधानुसार तय किया गया है। सुबह 11 बजे से गांव की बहुएं प्रशिक्षण केंद्र में आती हैं, तो एक बजे बेटियां और शाम को स्कूल जाने वाले बच्चे।
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केंद्र में प्रशिक्षण ले रही सरखेत की ग्राम प्रधान आरती पंवार ने बताया कि कंप्यूटर सीखने की इच्छा पहले से थी लेकिन सुविधा के अभाव में नहीं सीख पाई। अब बच्चों को भी सिखा पाएंगी। गुड्डी पंवार ने बताया कि कंप्यूटर सीखने के लिए बेहद उत्साहित हूं।
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जब तक प्रशिक्षण चलेगा, मैं मायके नहीं जाऊंगी। सविता कोटवाल ने बताया कि देश-दुनिया का ज्ञान बढ़ाने के लिए यह सुनहरा अवसर मिला है। सविता की सास हसदेई पंवार का कहना है कि कंप्यूटर सीखते समय बहू को मेरे सहयोग की जरूरत है। अच्छे ढंग से सीखने के बाद ही वह अपने बच्चों को सिखा पाएगी।


सास कर रहीं प्रोत्साहित
बहुओं को कंप्यूटर सीखने के लिए सास प्रोत्साहित कर रही हैं। सास न केवल समर्थन कर रही हैं बल्कि उनकी गैरमौजूदगी में बच्चों की देख-रेख से लेकर घरेलू कार्य कर रही हैं।

क्या कहती हैं सास
अमर उजाला का धन्यवाद करती हूं कि इस गांव को चुना। बहू की कंप्यूटर सीखने की इच्छा है इसलिए पूरा सहयोग दूंगी।
- फ्यूली देवी, (गुड्डी की सास)

बहू पहले भी सीख रही थी लेकिन नजदीक न होने की वजह से छोड़ दिया था। गांव में केंद्र खुलने से दोबारा सीख रही है, इसकी मुझे खुशी है।
- जगदंबा देवी (आरती की सास)

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