Amar Ujala Dehradun: विवाह की खबर के साथ अमर उजाला से भी जुड़ गया मेरा रिश्ता...पढ़िए ये रोचक किस्सा
Amar Ujala Dehradun 26th Foundation Day: आज भी इस अखबार का रुतबा इतना है कि विभागीय अधिकारी इसकी खबर का संज्ञान लेकर समस्या का समाधान करने के साथ तुरंत कार्रवाई का आदेश देते हैं। एक दिन किसी कार्य से मैं एक दफ्तर में गई थी। मैंने देखा दफ्तर की बैठक चल रही है।
विस्तार
अमर उजाला से मेरा एक भावनात्मक रिश्ता रहा है। 70 के दशक में अमर उजाला समाचार-पत्र आगरा से प्रकाशित हुआ करता था। उस समय अखबार हमारे यहां डाक से आता था। मेरे पिता स्व. सत्य देव शर्मा बुलंदशहर में एक जानेमाने पत्रकार थे और अमर उजाला के संस्थापक स्व. डोरी लाल उनके परम मित्र थे। वर्ष 1980 में मेरे विवाह का समाचार अमर उजाला आगरा से प्रकाशित हुआ था। इसकी कटिंग आज भी मैंने अपनी शादी की एलबम में संजोकर रखी है।
शादी के बाद अपने पति के साथ मैं देहरादून आ गई। यहां आकर मुझे अमर उजाला की कमी खलती थी। 90 के दशक में अमर उजाला का प्रकाशन यहां शुरू हुआ, तब से लेकर आज तक यूं समझिए कि मेरे दिन की शुरुआत ही अमर उजाला से होती है। उत्तराखंड आंदोलन व राज्य निर्माण में अमर उजाला का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अखबार ने आंदोलन की एक-एक घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया और आंदोलन को धार देने में अहम भूमिका निभाई। इस अखबार में स्थानीय खबरों के साथ देश-दुनिया, ज्ञान-विज्ञान, खेल, राजनीति, व्यापार, अपराध से जुड़ी खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं। यही कारण है कि बड़े-बड़े दफ्तरों से लेकर घर-घर और दुकानों में अमर उजाला नजर आता है। आज भी किसी खबर व घटना को जांचना हो तो अमर उजाला में छपी खबर को ही विश्वसनीय माना जाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मिला पुरस्कार
मेरी नजर में अमर उजाला एक आम आदमी का अखबार है। आम आदमी और निम्न वर्ग तक की समस्याओं को पूरी वरीयता दी जाती है। अक्सर यह सुनने को मिल जाता है कि किसी शोषित, महिला व गरीब पर कोई अत्याचार होता है तो वह न्याय के लिए पुलिस के पास न जाकर अमर उजाला के दफ्तर में पहुंच जाता है। यह लोगों का भरोसा ही है जो न्याय के लिए उन्हें अमर उजाला के दफ्तर की ओर ले जाता है।
अमर उजाला ने जिस तरीके से नारी निकेतन में एक मूक बधिर संवासिनी के साथ दुष्कर्म की घटना को उठाया और अंत में उसे अंजाम तक पहुंचाया, इसके लिए अमर उजाला आज भी बधाई का पात्र है। मेरे संगठन उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) ने भी न्याय की इस लड़ाई में संवासिनी का साथ दिया। अमर उजाला को इस मुहिम को मुकाम तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिला।
आज भी इस अखबार का रुतबा इतना है कि विभागीय अधिकारी इसकी खबर का संज्ञान लेकर समस्या का समाधान करने के साथ तुरंत कार्रवाई का आदेश देते हैं। एक दिन किसी कार्य से मैं एक दफ्तर में गई थी। मैंने देखा दफ्तर की बैठक चल रही है।
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एक अधिकारी के हाथ में अमर उजाला था। उसमें छपी किसी जनसमस्या के बाबत वह अधीनस्थ अधिकारियों को समस्या के शीघ्र समाधान करने के लिए निर्देशित कर रहे थे। वाकई अमर उजाला ने हमेशा से जनता और सरकार के बीच एक सेतु का कार्य किया है। मैं अमर उजाला को 26वीं वर्षगांठ पर बधाई एवं शुभकामनाएं देती हूं। - साधना शर्मा, अध्यक्ष, उत्तरांचल महिला एसोसिएशन