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इतनी बार किया रक्तदान सुनकर हैरान रह जाएंगे आप

Fri, 07 Mar 2014 03:41 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 07 Mar 2014 03:41 PM IST
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amar ujala blood donation camp

हादसे इंसान की जिंदगी कैसे बदलते हैं, रवि कुमार जैन की दास्तान इसकी एक बानगी है।

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जेहन को तेज झटका लगा
अमर उजाला फाउंडेशन ब्लड डोनर्स क्लब से जुड़े रवि बताते हैं कि एक बार रात को वह सो रहे थे। तभी पड़ोसी ने दरवाजा खटखटाया और कहा कि एक यूनिट ब्लड चाहिए। नींद की गफलत तारी थी, सुबह आकर खून देने का वादा कर लिया।

रवि बताते हैं कि जब सुबह उठे तो किसी का पार्थिव शरीर दुकान के सामने से जा रहा था। पड़ोसी से पूछा कि कौन है तो जवाब मिला कि रात में जिस महिला के लिए खून मांगने आए थे। कहते हैं कि जेहन को तेज झटका लगा।
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संकल्प लिया कि अब खून की कमी के कारण किसी को मरने नहीं देंगे। और फिर शुरू हो गया हर तीन महीने के बाद स्वैच्छिक रक्तदान का सिलसिला।

16 साल की उम्र में पहली बार रक्तदान किया
रवि ने बताया कि इस अभियान में उनके दोस्त भी हैं। जहां किसी को जरूरत पड़ती है तो रक्तदान करते हैं। वह खुद 70 बार रक्तदान कर चुके हैं। वैसे 16 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार रक्तदान किया था।
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बताते हैं कि एक टेलर के बच्चे को खून की जरूरत थी। उनका ब्लड ग्रुप ए पॉजीटिव है। जांच हुई तो ब्लड मैच कर गया। घर में किसी को बताए बिना रक्तदान किया। लेकिन महिला की मौत की घटना ने उनके अंदर जुनून पैदा कर दिया है।

रवि का ऋषिकेश में कपड़े का कारोबार है। इसके साथ ही वह राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहते हैं।

उम्र 63 और 66 बार किया रक्तदान

amar ujala blood donation camp

श्रीनगर से अमर उजाला फाउंडेशन के ब्लड डोनर क्लब के सदस्यों में शामिल हुए श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस नौगांवकर 66 बार रक्तदान कर चुके हैं।

हर चार माह बाद रक्तदान
54 बार रक्तदान करने वाले डा. एमएन गैरोला ने भी क्लब की सदस्यता ली। डॉ. नौगांवकर कहते हैं कि रक्तदान के लिए अपना हीमोग्लोबिन स्तर ठीक रहना चाहिए। हर रोज संतुलित भोजन करने वाला व्यक्ति हर चार माह बाद रक्तदान कर सकता है।

मैं स्वयं ऐसा करता रहा हूं। बीते चार वर्षों में बेस अस्पताल में 11 बार रक्तदान कर चुका हूं। नगर क्षेत्र में निजी नर्सिंग होम चलाने वाले डॉ. एमएन गैरोला कहते हैं कि युवावस्था में पढ़ाई के दौरान रक्तदान किया। बाद में कई बार जिन रोगियों का आपरेशन मैंने स्वयं किया, उन्हें रक्तदान भी किया।

योगेश हैं रक्तदान के शतकवीर

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रक्तदान करने से बचने वालों को योगेश अग्रवाल से प्रेरणा लेने की जरूरत है। राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (एनआईवीएच) में स्टोर कीपर इंचार्ज के रूप में कार्यरत योगेश अग्रवाल रक्तदान के शतकवीर हैं।

103 बार दान कर चुके हैं खून
1977 में रक्तदान शुरू करने वाले योगेश आज तक 103 बार खून दान कर चुके हैं। लगभग 55 वर्षीय योगेश अग्रवाल की रक्तदान करने की शुरुआत 18 साल की उम्र में हुई थी। राजपुर रोड पर एक ब्लड डोनेशन कैंप लगा था।

जिज्ञासावश योगेश भी वहां पहुंचे। पता चला कि रक्तदान करने वालों को एक पर्स मिलेगा। वह भी रक्तदान के लिए चेयर पर बैठ गए।

पहले-पहल डर लग रहा था, लेकिन यह प्रक्रिया इतनी सहज थी कि सारा डर दूर हो गया। बस इसके बाद से रक्तदान का जो क्रम शुरू हुआ, वह आज तक चल रहा है।

जीवनदात्री रक्तदान शिविर कल

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अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से गठित जीवनदात्री क्लब का पहला रक्तदान शिविर शनिवार आठ मार्च को लगेगा।

महिला दिवस के विशेष अवसर पर लगाया जाने वाला यह शिविर प्रिंस चौक के समीप गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में सुबह साढ़े 10 बजे से शुरू होगा।

इसमें जीवनदात्री क्लब की सदस्यों के साथ ही रक्तदान करने की इच्छुक अन्य युवतियां, महिलाएं शाम चार बजे तक रक्तदान कर सकेंगी।

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