अमर उजाला के मंच पर शराब को लेकर खुलकर बोली अपराजिताएं, 'अवैध शराब के खिलाफ घर से शुरू हो लड़ाई'
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अवैध शराब के खिलाफ घर से लड़ाई की शुरूआत होनी चाहिए। अवैध और जहीरीली शराब पीने वाले का परिवार सबसे ज्यादा इसके दुष्परिणाम झेलता है। इसलिए हर परिवार की जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों को इसके नुकसान जरूर बताए। साथ ही समाज में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए महिलाओं को एकजुट होकर आगे आना होगा।
देहरादून में शुक्रवार को पटेलनगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने अवैध शराब के महिलाओं और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर चर्चा की।
महिला आयोग की सचिव कामिनी गुप्ता ने महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से बिकने वाली शराब का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर ही पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें ही झेलनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि शराब पीकर महिलाओं का उत्पीड़न या महिला अपराध करने वालों के खिलाफ कानून में कड़ी सजा का प्रावधान है। ऐसे मामले में महिलाओं को आगे आकर विरोध जताना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी तरह के अपराध में उन्हें कानूनी समेत अन्य तरह की मदद उपलब्ध कराई जाती है।
संवाद में लायंस क्लब की पुष्पा भल्ला, अनुराधा गर्ग, रमनप्रीत, लायंस क्लब की अध्यक्ष शशि भाटिया, सचिव विजया बिष्ट, सुमन काला, मनजीत, सामाजिक कार्यकर्ता सरिता रानी, निशा शर्मा, उत्तराखंड महिला एसोसिएशन की अध्यक्ष साधना शर्मा, सारिका जयसवाल, कल्पना सैनी, डा. रोमी सलूजा, यामिनी शर्मा, रेड क्रॉस सोसाइटी की पार्वती पांडे ने भी अपने विचार रखे।
इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
शहर से हटें शराब की दुकानें
महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि शराब की दुकानें शहर से बाहर होनी चाहिए। हालांकि इससे शराब पर लगाम नहीं लगेगी लेकिन कुछ कमी जरूर आएगी। इसके अलावा शहर के अलग-अलग स्थानों पर शराब ठेके के बाहर हंगामा या अभद्रता करने वालों से भी निजात मिल सकेगी।
महिलाएं भी कर रही तस्करी
राजधानी में कई स्थानों पर महिलाएं और छोटे बच्चे अवैध शराब की तस्करी में शामिल हैं। कई बस्तियों में पुलिस से बचने के लिए तस्कर इनका इस्तेमाल पैडलर के रूप में करते हैं। इससे कई जगह महिलाएं और बच्चे भी नशे और अवैध शराब के जंजाल में फंसकर अपना जीवन बर्बाद करते हैं।
शराब की राशनिंग की जाए
महिलाओं ने कहा कि आज पैसे देकर कोई भी व्यक्ति कितनी भी शराब खरीद सकता है। इससे कई तरह की दिक्कतें पैदा हो रही है। सरकारी ठेके से एक निर्धारित मात्रा में ही शराब दी जानी चाहिए। अवैध शराब की बिक्री करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
साथ देने वालों पर हो कार्रवाई
अवैध और जहरीली शराब की तस्करी करने वालों के साथ कई बार सफेदपोश और पुलिस अधिकारी भी मिले होते हैं। उनके संरक्षण में अवैध शराब की तस्करी करने वाले खुलेआम यह गलत काम करते हैं। चुनाव के समय शराब तस्कर नेताओं के लिए अवैध रूप से शराब बांटने का काम करते हैं। ऐसे काम में साथ देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
माहौल बिगाड़ रहा पब कल्चर
महिलाओं ने कहा कि दून में बढ़ता पब कल्चर माहौल को खराब कर रहा है। पब में कम उम्र के किशोर-किशोरियों को शराब और अन्य नशा मुहैया कराया जा रहा है। युवा भी खुद को मॉर्डन दिखाने के चक्कर में नशे की गिरफ्त में फंस रहे हैं। इसके अलावा देर रात तक बजने वाले कानफोडू संगीत से आसपास के लोगों को भी दिक्कत झेलनी पड़ती है।
शराब तस्करों की करें काउंसिलिंग
महिलाओं ने कहा कि अवैध शराब की तस्करी में शामिल लोगों की काउंसिलिंग कराए जाने की आवश्यकता है। इससे जुड़े लोगों, महिलाओं और बच्चों को इसके नुकसान बताए जाएं। साथ ही उन्हें रोजगार के रूप में दूसरे साधन उपलब्ध कराने भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कौशल विकास की विभिन्न योजनाओं से उन्हें जोड़कर अवैध शराब तस्करी के दलदल से बाहर निकाला जा सकता है। इससे उन्हें एक सम्मानजनक जीवन बिताने का मौका भी मिलेगा।
बच्चों को बताएं नुकसान
अवैध व जहरीली शराब के धंधे में लिप्त बच्चों को इसके नुकसान बताए जाने बेहद जरूरी हैं। उन्हें बताया जाना चाहिए कि सैकड़ों परिवारों की दुर्गति केवल शराब के कारण हुई है। शराब व्यक्ति के शरीर के साथ ही पूरे समाज को भी नुकसान पहुंचाती है। महिलाएं अपने बच्चों को जरूर बताएं कि शराब ने कैसे कई परिवारों को खत्म किया है। इसके अलावा स्कूल-कॉलेजों में भी काउंसिलिंग और जागरूकता के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता है।
खुलेआम बिक रहा नशा
महिलाओं ने शहर में कई स्थानों पर खुलेआम नशा बिकने पर अत्यंत रोष जताया। उन्होंने कहा कि शहर में कई अंडे और चाय की ठेलियों व पान के खोखों पर अवैध शराब की बिक्री की जाती है। पुलिस को इन सब ठिकानों की जानकारी भी रहती है। लेकिन वह खुद इस अवैध कारोबार में शामिल रहते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होती।