अपराजिता संवाद: इस बार की गर्मी डायरिया लेकर आई, खानपान में न बरतें ढिलाई, स्वास्थ रहेंगे बस रोज फॉलो करें ये छोटी-छोटी बातें
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. आर्या ने कहा कि मौसम तेजी से बदल रहा है और बदलाव के कारण सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत प्रभावित होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों को और परेशानी होती है, क्योंकि वे बाहर की खाद्य सामग्री ज्यादा खाते हैं, जो संक्रमण का कारण बन उन्हें बीमार कर सकता है।
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‘इस बार की गर्मी राजधानी में डायरिया लेकर आई है। आलम यह है कि हर चौथा व्यक्ति डायरिया से ग्रस्त है। बदलते मौसम और गलत खानपान से लोग उल्टी-दस्त की चपेट में आ रहे हैं। लिहाजा खानपान में ढिलाई बरतना खतरनाक हो सकता है।’ ये बातें अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता के तहत आयोजित कार्यक्रम में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर एवं एमडी कम्यूनिटी मेडिसिन डॉ. अनुपमा आर्या ने कहीं।
पटेल नगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. आर्या ने कहा कि मौसम तेजी से बदल रहा है। दिन में पर्याप्त गर्मी होने लगी है। ऐसे में संक्रमण सहित तमाम बीमारियों की संभावना बन जाती है। खानपान पर ध्यान दें, क्योंकि तापमान में बदलाव से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
मौसम में बदलाव के कारण सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत प्रभावित होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों को और परेशानी होती है, क्योंकि वे बाहर की खाद्य सामग्री ज्यादा खाते हैं, जो संक्रमण का कारण बन उन्हें बीमार कर सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बाहर की चीजों की जगह लंच में पोषक तत्व युक्त आहार दें। डिब्बाबंद जूस की जगह साबुत फल और भोजन में हरी सब्जियों व दालों का सेवन कराएं। आसपास का वातावरण स्वच्छ रखें। पानी को अच्छी तरह से उबालकर ठंडा होने पर पीएं। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सवालों के भी जवाब दिए।
तीन वायरस फैलाते हैं डायरिया का संक्रमण
राजकीय जिला कोरोनेशन अस्पताल की इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. समृद्धि नौटियाल ने बताया कि तीन तरह के वायरस खासतौर से डायरिया का संक्रमण फैलाते हैं। नोरो वायरस और रोटा वायरस पांच साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा संक्रमित करते हैं। वयस्कों को भी ये अपना शिकार बना सकते हैं, पर एडेनो वायरस किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए डायरिया का कारण बन सकता है। डायरिया का शुरुआती लक्षण बार-बार दस्त लगना है। दस्त पतला होता है और उसमें पानी का अंश ज्यादा होता है। दिनभर में चार-पांच या इससे भी ज्यादा बार दस्त हो सकता है। बीमारी बढ़ने लगे तो आंतों में मरोड़ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द होने लगता है।
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भरपूर मात्रा में लें तरल पदार्थ
डायरिया होते ही मिर्च-मसाले वाली चीजें खाना तुरंत बंद कर दें।
पानी, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ भरपूर मात्रा में लें।
छाछ और दही के साथ ही चावल भी डायरिया में फायदेमंद है।
अदरक का रस, नींबू और काली मिर्च का चूर्ण पानी में मिलाकर पीएं।
भूख लगने पर मूंग की खिचड़ी और साबूदाना खाएं।
फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धो लें।
डायरिया की स्थिति में हो सके तो पानी को उबाल कर ठंडा करके पीएं।
एक गिलास पानी में दो चम्मच शक्कर, चुटकीभर नमक नींबू के रस के साथ पीएं।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
डॉ. नुजहत, डॉ. नैंसी यादव, नेहा गौनियाल, मंजू जैन, वैभा कपूर, मिली कौर, पूर्णिमा जैन, मधु जैन, पायल बहल आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का भी सहयोग रहा।