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अमर उजाला अपनत्व अभियान : इन बच्चों पर कोरोना ने दिखाई क्रूरता, आप दिखाइए ममता

Fri, 28 May 2021 03:36 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 28 May 2021 03:36 PM IST
सार

खटीमा में टेंट का कारोबार करने वाले जयप्रकाश गुप्ता का आठ माह पहले सीने में दर्द उठने के चलते निधन हो गया था। उसके बाद जैसे तैसे उनकी पत्नी विमला गुप्ता ने टेंट का कारोबार संभाला। हाल ही में उनकी भी कोरोना से मौत हो गई। अब उनके तीनों बच्चे अनाथ हो गए हैं।

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Amar Ujala Apanatva Abhiyan : due to corona these children left alone, please help them
पिता की मौत के बाद कोरोना से मां ने भी छोड़ा साथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला के अपनत्व अभियान को पाठकों का अपनत्व मिला है। ऐेसे बच्चों के बारे में लोग हमें सूचनाएं दे रहे हैं जिन्होंने कोरोना के दौरान माता-पिता अथवा एकल कमाई वाले परिजन को गंवा दिया। ऐसे बच्चों के सामने खाने-पीने के साथ ही पढ़ाई के साथ ही सिर पर एक वात्सल्य भरे हाथ की भी दरकार है। 

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उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें 7617566171 पर व्हाट्सअप के जरिए या ddn-cityreporter@amarujala.com पर मेल करें।
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अमर उजाला अपनत्व अभियान : दुश्वार हुआ जीना, कोरोना ने पिता का साया, मां का आंचल छीना
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पिता की मौत के बाद कोरोना से मां ने भी छोड़ा साथ, तीन बच्चे हो गए अनाथ
खटीमा में टेंट का कारोबार करने वाले जयप्रकाश गुप्ता का आठ माह पहले सीने में दर्द उठने के चलते निधन हो गया था। उसके बाद जैसे तैसे उनकी पत्नी विमला गुप्ता ने टेंट का कारोबार संभाला। हाल ही में उनकी भी कोरोना से मौत हो गई। अब उनके तीनों बच्चे अनाथ हो गए हैं। उन्होंने सरकार से नौकरी की गुहार लगाई है।

खटीमा के लोहिया हेड रोड निवासी शिवम गुप्ता ने बताया कि बीते 12 मई को बरेली से खटीमा लाते वक्त मां का देहांत हो गया था। कुछ दिनों पहले ही मां की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पीलीभीत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद इलाज में सुधार न होने पर विमला गुप्ता को बरेली के एक अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया।

वहां डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन हेमब्रेज होने की बता कही। अस्पताल में बेड खाली नहीं होने पर खटीमा लाते समय उनकी रास्ते में ही मृत्यु हो गई थी। बताया कि आठ माह पहले पिता जयप्रकाश की अचानक सीने में दर्द उठने से अस्पताल में ही मौत हो गई थी।

कोरोना काल में टेंट कारोबार चौपट होने से तीनों भाई-बहन घर में ही बैठे हैं। शिवम ने बताया कि घर में उनकी बहन शिवानी गुप्ता और उससे बड़ी बहन दिव्या गुप्ता हैं। तीनों भाई-बहन कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। बताया कि वह एमए की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बड़ी बहन दिव्या गुप्ता ने एमएससी की है। छोटी बहन ने बीएससी और बी. फार्मा किया है। उन्होंने सरकार से नौकरी और आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।

कोटद्वार : सृष्टि और वरुण के सिर से उठा मां का साया
शहर से सटे सिताबपुर निवासी सृष्टि और वरुण की मां को कोविड महामारी ने छीन लिया। मां की मौत के बाद दोनों बच्चे अनाथ हो गए। बीमारी के कारण दस साल पहले उनके पिता उन्हें छोड़कर चले गए थे। पिता के हिस्से का भी प्यार दे रही मां रजनी दोनों को बड़े प्यार से पाल रही थी, लेकिन नियति को शायद यह भी मंजूर नहीं रहा। बीते 28 अप्रैल को तीन दिन के बुखार के बाद मां रजनी काला भी उन्हें हमेशा के लिए छोड़ गईं।

माता-पिता की मौत के बाद सृष्टि (20) और उसका भाई वरुण (17) अपने मामा एडवोकेट अनुज भट्ट के साथ रह रहे हैं। अनुज भट्ट बताते हैं कि रजनी उनकी बड़ी बहन थीं और जीजा प्रदीप काला शिक्षक थे। बीमारी के कारण दस साल पहले उनका निधन हो गया और उनके स्थान पर रजनी दीदी को शिक्षा विभाग में क्लर्क की नौकरी मिली थी।

वर्तमान में वह वरिष्ठ सहायक (हेड क्लर्क) के पद पर जीआईसी जयदेवपुर सिगड्डी में सेवारत थीं। रजनी बच्चों को मां के साथ ही पिता का भी प्यार दुलार दे रही थीं। बीते अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में उसकी तबीयत बिगड़ी तो वह उसे लेकर बदरीनाथ मार्ग स्थित एक निजी क्लीनिक ले गए, जहां कोविड का संदेह होने पर उसका एक्सरे कराया, जिसमें कोविड की पुष्टि हुई।

घर पर आइसोलेट रहने के दौरान उनकी दवाइयां चल रही थीं। उपचार के दौरान 28 अप्रैैल को उन्होंने दम तोड़ दिया। कोविड ने बच्चों से उनकी मां भी छीन ली। पिता के बाद मां की मौत से बच्चे असहाय हो गए हैं। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण सृष्टि दसवीं से आगे पढ़ाई नहीं कर सकी।

कोरोना ने रंजीता और प्रियांशु को किया बेसहारा

नौगांव (उत्तरकाशी) में कोविड महामारी ने गातू गांव की रंजीता से उसका पति और 11 वर्षीय बेटे प्रियांशु से पिता का साया छीन लिया। दिल्ली में प्राइवेट नौकरी कर परिवार का पेट पालने वाले इस इकलौते सहारे के छिनने से परिवार के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

नौगांव प्रखंड के गातू गांव निवासी धनवीर रावत (38) दिल्ली में प्राइवेट नौकरी कर अपने परिवार का पेट पालता था। उसकी पत्नी रंजीता और इकलौता बेटा प्रियांशु नौगांव में ही रहते थे। इस बार धनवीर ने अपने परिवार को दिल्ली शिफ्ट कर बेटे का वहां एक अच्छे स्कूल में दाखिला कराने का मन बनाया था।

कोविड महामारी के चलते वह परिवार को दिल्ली तो शिफ्ट नहीं कर पाया, लेकिन स्वयं इस महामारी की चपेट में आ गया। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर जब दिल्ली के अस्पतालों में बेड नहीं मिल पाया, तो परिजन बीते तीन मई को उपचार के लिए उसे देहरादून ले आए थे। लेकिन यहां एक प्राइवेट अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद बेसहारा हुई रंजीता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 

मां-बाप का साया उठा तो रिश्तेदार बन अपरिचित आ गए बेघर करने
हल्द्वानी में कोरोना महामारी के बीच एक बिटिया के सिर से मां-बाप का साया उठा तो कुछ अपरिचित लोग खुद को उसके पिता का रिश्तेदार बताते हुए उसे बेघर करने पर तुल गए। हालांकि पंचायत के दखल से वह अपने मंसूबों में फिलहाल कामयाब नहीं हो सके हैं। इस बेटी के सामने अब जिंदगी की जंग लड़ने की चुनौती आ पड़ी है।

यह कहानी है 20 साल की ममता डंगवाल की। बीएसएसी अंतिम साल की छात्रा ममता जब नौ महीने की थी तब दुमकाबंगर बच्चीधर्मा गांव निवासी पार्वती देवी और पूर्व सैनिक कमल सिंह डंगवाल ने उसे गोद लिया था। पांच साल पहले ममता की मां पार्वती देवी एक दुर्घटना में दिव्यांग हो गईं थी। ममता ने हार नहीं मानी।

मां की देखभाल, घर का काम और अपनी पढ़ाई बखूबी करती गई। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। 14 मई को स्वास्थ्य खराब होने पर उसकी मां पार्वती की मौत हो गई। ममता कुछ समझ और संभल पाती, दो दिन बाद अचानक पिता का ऑक्सीजन लेवल कम हुआ तो उन्होंने भी दम तोड़ दिया। ममता अकेली पड़ गई।

मां-बाप की मौत के बाद उसके अनदेखे और अनजाने कथित रिश्तेदार अचानक घर पहुंच गए। किसी ने चाचा का लड़का तो किसी ने मौसी की बेटी बताया। छह से सात अपरिचित रिश्तेदार पीपलपानी तक घर पर रहे। ममता के अनुसार बुधवार को उन्होंने उससे (ममता से) कहा कि इस घर में सब कुछ हमारा है। अब तुम ताला लगाकर अपने जन्मदाता माता-पिता के पास चली जाओ।

यह जानकारी प्रधान रुक्मिणी नेगी और पड़ोसियों को मिली तो उन्होंने पंचायत बैठाई। अपरिचित रिश्तेदारों से सवाल जवाब किए गए। पंचायत के बाद अपरिचित रिश्तेदार सिर्फ ममता के पिता की ओर से रखे गए जेवर लौटा के चले गए। परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई।

ममता के अनुसार रिश्तेदारों के जाने के बाद जब उसने घर पर मां-पिता की पासबुक, एफडी, और दत्तक बेटी के कागज खंगाले तो वे भी गायब मिले। ममता ने बताया कि उसने आज तक माता-पिता से रिश्तेदारों के बारे में न सुना और न ही कभी उन्हें देखा। अब ममता पुलिस और प्रशासन के पास अपनी पीड़ा पहुंचाने का मन बना रही है।

सामने आए मददगार

रुद्रपुर में कोरोना महामारी में माता-पिता का साया उठने से अनाथ हुए चार बच्चों की मदद के लिए समाजसेवी लगातार सामने आ रहे हैं। विधायक राजकुमार ठुकराल और रमेश ढींगरा ने बच्चों के घर पहुंचकर 11 हजार रुपये की आर्थिक मदद की। विधायक ने एक इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में परिवार की सबसे बड़ी बेटी को कभी भी नौकरी करने की पेशकश की। इधर, बैंक ऑफ बड़ौदा के दो अधिकारियों ने बच्चों के घर पहुंचकर बैंक खाता खुलवाया।

वार्ड नंबर 30 आदर्श कॉलोनी निवासी चार बच्चों के पिता आनंद पाल की 22 मई को कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। 11 साल पहले बच्चों की मां का निधन हो गया था। बच्चों के अनाथ होने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद व्यापारियों के साथ ही कई समाजसेवियों ने बच्चों के घर पहुंचकर आर्थिक सहायता के साथ ही खाद्य सामग्री दी।

प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, समाजसेवी अनिल रावत, रजनीश बत्रा के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा गल्ला मंडी के सहायक प्रबंधक कौशल गंगवार और हिमांशु जोशी बच्चों के घर पहुंचे। इसके बाद परिवार की सबसे बड़ी बेटी मनीषा सिंह और उसकी बहन के नाम से खाता खुलवाया गया।

कौशल ने खाते में 500 रुपये और व्यापारी नरेश गुलाटी ने एक हजार रुपये जमा किए। संजय ने कहा कि बैंक खाता नहीं होने से कई लोग परिवार की मदद नहीं कर पा रहे थे। अब खाता खुलने के बाद नंबर को सोशल मीडिया पर शेयर किया जाएगा। इधर, विधायक राजकुमार ठुकराल और समाजसेवी रमेश ढींगरा ने बच्चों को 11 हजार रुपये की नकद धनराशि देने के साथ ही भविष्य में हर संभव मदद का भरोसा दिया।

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