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अमर उजाला अपनत्व अभियान: सामने आए कोरोना काल में माता-पिता गंवाने वाले बच्चे, अब 'वात्सल्य' दिखाइए सरकार

Tue, 25 May 2021 04:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 25 May 2021 04:19 PM IST
सार

कोरोना काल में अपने माता-पिता को गंवाने वाले बच्चों की मदद के लिए सरकार ने तो वात्सल्य योजना की घोषणा कर दी लेकिन सिस्टम अब तक सिर्फ पांच बच्चियों को ही ढूंढ़ पाया।

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Amar Ujala Apanatva Abhiyan: Children Comes who lost their parents during the Corona Period
तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

अमर उजाला ने कोरोना काल में अपने माता-पिता को गंवाने वाले बच्चों की जानकारी के लिए अपनत्व अभियान चलाया है। इसमें लोग कोरोना में अनाथ हुए बच्चों की सूचनाएं दे रहे हैं। इनकी पड़ताल करके अमर उजाला उन्हें सामने ला रहा है। मकसद सिर्फ इन बच्चों की मदद करना है। पहली कड़ी में हम ऐसे ही कुछ बच्चों की जानकारी दे रहे हैं। सरकारी तंत्र से अपेक्षा है कि इन बच्चों की सहायता करे। पाठकों के सहयोग से हमारा अभियान जारी रहेगा।

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उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें 7617566171 पर व्हाट्सअप के जरिए या ddn-cityreporter@amarujala.com पर मेल करें।
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माता-पिता और दादी को कोरोना में गंवा बैठी अक्षिता 
कोरोना के चलते अक्षिता के सिर से मां-बाप का साया उठ गया तो दादी का दुलार भी कोरोना ने छीन लिया। आपदा की इस घड़ी में रिश्तेदारों ने भी किनारा कर लिया। लक्सर रोड स्थित सतीकुंड गोगा पीर वाली गली निवासी अमित कुमार गुप्ता की मां सुधा गुप्ता (73) का कोरोना से ही होम आइसोलेशन के दौरान निधन हो गया। इसके बाद अमित कुमार गुप्ता (50) और उनकी पत्नी रुचि गुप्ता (44) भी कोरोना पॉजिटिव हो गए। दोनों को रामकृष्ण मिशन अस्पताल कनखल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान 29 अप्रैल को अमित गुप्ता का निधन हो गया।  रुचि गुप्ता ने भी रामकृष्ण मिशन अस्पताल में चार मई को दम तोड़ दिया था।
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माता-पिता के देहांत के बाद 17 साल की बेटी अक्षिता अकेली पड़ गए। बीस साल का एक भाई आशुतोष है वह भी एसएमजेएन पीजी कॉलेज में बीकॉम तृतीय वर्ष का छात्र है। उनके ताऊ और चाचा कोई भी नहीं है। एक बुआ हैं वह पलवल हरियाणा में रहती हैं। उनसे बोलचाल बंद है। मामाजी की युवा अवस्था में ही मौत हो चुकी है। आशुतोष ने बताया कि ऋषिकेश की गीता नगर कॉलोनी निवासी अजय सिंघल उनके पिता के गहरे दोस्त हैं। उन्हें जानकारी मिली तो वह घर आए और उन्हें अपने साथ ऋषिकेश ले गए। तब से वह अपनी बहन के साथ ऋषिकेश में ही रह रहे हैं।

पिता के चलते उठा पिता का साया, मां पहले ही छिन गई थी

रुद्रपुर में बीती 22 मई को कोरोना से चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। मां को पहले ही कैंसर ने लील लिया था। इसके बाद अनाथ हुए बच्चों की परवरिश का जिम्मा चाचा संभाल रहे हैं। वार्ड नंबर 30 आदर्श कॉलोनी से एक व्यक्ति ने चाइल्डलाइन को फोन कर सूचना दी कि कॉलोनी में रहने वाले चार बच्चों के पिता आनंदपाल के कोरोना संक्रमित होने के बाद मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में मौत हो गई है।

यह परिवार मूल रूप से बुलंदशहर का रहने वाला है। आनंदपाल गदरपुर की एक सोलर कंपनी में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थे। कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज में बनाए कोविड अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया था। आनंदपाल की 19 साल, 17 साल, 14 साल की तीन बेटियां और 13 साल का एक बेटा है। इन बच्चों की मां दस साल पहले कैंसर होने से गुजर गई थीं। सोमवार को बाल कल्याण समिति ने चारों बच्चों से पूरी जानकारी ली। इसके बाद जिला प्रोबेशन विभाग के माध्यम से शासन को रिपोर्ट भेजने की कार्यवाही की जा रही है। 

कोरोना ने पिता को छीना, परिवार में कोई कमाने वाला नहीं 
गैरसैंण में लखेड़ी गांव के हरेंद्र सिंह (38) पुत्र भवान सिंह के परिवार की कोरोना ने कमर तोड़ दी है। उनके परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं रह गया है। हरेंद्र की पत्नी नंदी देवी ने बताया उनके पति पूना के एक होटल में काम करते थे। वहां कोरोना संक्रमण बढ़ा तो वह 18 अप्रैल को अपने गांव लखेड़ी आ गए। कुछ दिन बाद उनको बुखार आ गया। उन्होंने गैरसैंण सीएससी में जांच कराई, जिसमें वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए। होम आइसोलेशन में रहने के बाद बीती 26 अप्रैल को तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उन्हें गोपेश्वर भेजा गया। वहां से 27 तारीख को उन्हें श्रीनगर के बेस अस्पताल में रेफर किया गया। इलाज के दौरान 10 मई को सुबह साढ़े चार बजे वहां हरेंद्र सिंह मौत हो गई थी। उनके दो बच्चे हैं। लड़की कक्षा 6 में और लड़का कक्षा 3 में गांव में ही पढ़ रहे है। नंदी देवी ने कहा कि पति की मौत के बाद वह बेसहारा हो गई है। प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली। मकान भी पुराना है और अब परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या बच्चों के पालन-पोषण की समस्या आ गई है।

कोरोना ने मुखिया को बनाया शिकार, आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार

कोरोना की दूसरी लहर ने बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्यों के सिर से मुखिया का साया ही छिन गया है। ऐसे में एकल अभिभावक के लिए परिवार का पालन पोषण करना किसी चुनौती से कम नहीं है। दिन प्रति दिन बढ़ता आर्थिक संकट परेशानी को दोगुना कर रहा है। उत्तराखंड में बीते दिनों में कोरोना का प्रकोप चरम पर पहुंच गया था। इसके चलते हर परिवार किसी ना किसी रूप में कोरोना से प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही हैं जिनके घर के कमाने वाले मुखिया को ही कोरोना ने अपना शिकार बना लिया है।

पति से ही चलता था परिवार
चंदननगर निवासी कंचन शर्मा ने बताया कि उनके पड़ोस में कुछ दिनों पहले एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई। परिवार में पत्नी और एक नौ साल की बेटी हैं। पति निजी कंपनी में नौकरी करता था, जिसकी कमाई से ही परिवार चलता था। उधर, पत्नी भी बीमार रहती है। ऐसे में बेटी की परवरिश करना महिला के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

बुजुर्ग नानी के सामने तीन बच्चों की परवरिश का संकट
मालसी स्थित पेट्रोल पंप के समीप रहने वाली एक बुजुर्ग महिला के सामने अपनी बेटी के तीन बच्चों की परवरिश का संकट मंडरा रहा है। मां-बाप के निधन के बाद छह-सात साल के तीन बच्चों की नानी देखरेख कर रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता ने बताया कि बीते साल दिसंबर में बच्चों की मां का निधन हो गया था। जबकि, कुछ समय से पिता लापता है। ऐसे में बच्चों की परवरिश उनकी नानी कर रही है।

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