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चिकित्सकों की मांग पूरी होने पर अधूरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 12 Feb 2016 01:21 PM IST
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केंद्र की तर्ज पर डायनेमिक एश्योरड कैरियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) मांग भले पूरी हो गई है, लेकिन उसकी एवज में वही भत्ते और अन्य लाभ चिकित्सकों को मिलेंगे जो केंद्रीय सेवाओं वाले चिकित्सकों को मिल रहे हैं।
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इतना ही नहीं सेवाओं में रहकर डिप्लोमा और डिग्री करने वाले चिकित्सकों को मिलने वाले 3,5 और 7 इंक्रीमेंट का प्रावधान भी अन्य राज्यों में नहीं है।
डीएसीपी पर गठित कमेटी भत्तों और इंक्रीमेंट में कट लगा सकती है। इसका इशारा उसी दिन हो गया था जिस दिन सीएम ने डीएसीपी पर हरी झंड़ी दी थी।
डीएसीपी दिए जाने के साथ अब सरकार राज्य में कार्यरत चिकित्सकों की वेतन और भत्ते केंद्रीय के बराबर करने जा रही है। उत्तराखंड में चिकित्सकों का वेतनमान सबसे अग्रणी है।
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इसके बावजूद चिकित्सकों की केंद्र के तर्ज पर डीएसीपी की मांग से उनके वेतनमान में और वृद्धि होगी। विशेषज्ञों को पीजी कोर्स के बदले दिए जा रहे वेतन में 3, 5 या 7 इंक्रीमेंट का लाभ मिलता है।
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डिप्लोमा करने पर स्वास्थ्य विभाग तीन इंक्रीमेंट और पीजी डिग्री करने वालों को पांच तथा एमसीएच के लिए सात इंक्रीमेंट दिए जाते हैं। यह प्रावधान केंद्रीय सेवाओं में नहीं है।
इसके साथ 20 प्रतिशत पर्वतीय सेवाओं का भत्ता मिलता है जो अन्य राज्यों में नहीं है। सीएम के निर्देश पर गठित शासन और चिकित्सकों की कमेटी अब इस बात पर आम सहमति बनाएगी कि किन भत्तों को काटा या कम किया जा सकता है।