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एलोपैथिक विवाद: देहरादून में आईएमए ने बाबा रामदेव के खिलाफ दी तहरीर, डीजीपी को भी भेजा शिकायती पत्र

Wed, 23 Jun 2021 10:15 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 23 Jun 2021 10:15 PM IST
सार

हाल ही में एलोपैथी डॉक्टरों को लेकर दिए गए बयान के बाद से बाबा रामदेव चर्चाओं में हैं। उत्तराखंड आईएमए ने बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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Allopathic controversy: IMA filed Tahrir against Baba Ramdev in Dehradun Garhi Cantt Thana
बाबा रामदेव(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

आईएमए (भारतीय चिकित्सा संघ, उत्तराखंड शाखा) ने योग गुरु बाबा रामदेव और पंतजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में तहरीर दी है। 10 पन्नों की तहरीर में आईएमए ने पंतजलि की कोरोनिल दवा पर सवाल उठाए हैं। इसे उन्होंने लोगों के जीवन को गंभीर संकट में डालने वाला उत्पाद बताया है। साथ ही इसके सापेक्ष प्रस्तुत किए गए रिसर्च पेपरों को भी उन्होंने जालसाजी से बनाए गए दस्तावेज बताए हैं। आईएमए ने डीजीपी अशोक कुमार को भी ज्ञापन सौंपा है।

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दरअसल, पिछले माह योग गुरु बाबा रामदेव ने एलोपैथी चिकित्सा पद्धति पर सवाल उठाए थे। इसके बाद आईएमए और बाबा रामदेव के बीच जुबानी जंग भी हुई थी। कभी बाबा रामदेव की ओर से कोई बयान आया तो कभी आईएमए ने उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही। कोरोनिल को लेकर आईएमए ने पहले भी सवाल उठाए थे। अब इसी क्रम में बुधवार को देहरादून के कैंट थाने को तहरीर आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरविंद शर्मा, सचिव डॉ. अजय खन्ना और कोषाध्यक्ष संजय उप्रेती की ओर से तहरीर दी गई है। 
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आरोप है कि बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उन्होंने इसी प्रभाव के चलते देश दुनिया को धोखे में रखा है। एक तरफ जहां अत्याधुनिक साइंस पिछले साल वायरस को समझने का प्रयास कर रही थी। वहीं बाबा रामदेव की पतंजलि ने महज दो-तीन माह के अंदर ही कोरोनिल दवा बनाने का दावा किया था। इसके सापेक्ष उन्होंने कई रिसर्च पेपर प्रस्तुत करने का दावा भी किया था।

आईएमए ने इन रिसर्च पेपरों को जालसाजी कर बनाना बताया है। आईएमए का कहना है कि कोरोनिल बनाने में क्लिनिकल ट्रायल और डाटा जैसे नियमों को ताक पर रखा गया है। आईएमए ने आगे कहा है कि बाबा रामदेव और उनके सहयोगियों के खिलाफ एक से अधिक मामले दर्ज होने चाहिए। जालसाजी कर दवा बनाने, एलोपैथी पर सवाल उठाने और लोगों में भ्रम फैलाना आदि शामिल हैं। इस मामले में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विद्याभूषण नेगी ने बताया कि आरोप मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसमें उच्चाधिकारियों के निर्देश पर नियमानुसार जांच कराई जाएगी। 

शासन के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप 
आईएमए ने शासन के अधिकारियों पर भी बाबा के प्रभाव में आकर मिलीभगत करने का आरोप लगाया है। आईएमए के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पिछले दिनों भी शासन को इन सब बातों से अवगत कराया था, लेकिन अधिकारी भी उनके प्रभाव में आ गए और मामले को दबा दिया। 

डीजीपी को भी दिया ज्ञापन
आईएमए के पदाधिकारियों ने डीजीपी अशोक कुमार को भी ज्ञापन दिया है। उन्होंने इन सब आरोपों को इस ज्ञापन में दोहराया है। इस मामले में डीजीपी अशोक कुमार का कहना है कि पदाधिकारियों ने उन्हें ज्ञापन दिया है। नियमानुसार इसे संबंधित जिला पुलिस को भेजा जाएगा। आगे भी जो भी नियमों के अनुसार जांच आदि कराई जाएगी।

इसलिए शुरू हुआ था विवाद

हाल ही में बाबा रामदेव का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने एलोपैथी को मूखर्तापूर्ण विज्ञान बताया था। उन्होंने कहा था कि टीके लगवाने के बाद भी कई डॉक्टरों की मौत हो गई। उनके इस बयान पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कड़ा एतराज जताते हुए माफी की मांग की थी।

आईएमए भेज चुका एक हजार करोड़ का नोटिस
बाबा रामदेव के बयान के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन उत्तराखंड की ओर से बाबा रामदेव को एक हजार करोड़ का मानहानि का नोटिस भी भेजा जा चुका है। वहीं, यह मामला पीएम मोदी तक भी पहुंचा था। 

आईएमए ने उठाई थी पतंजलि का ड्रग लाइसेंस रद्द करने की मांग
बता दें कि हाल ही में बाबा रामदेव ने विटामिन सी, जिंक, कैल्शियम की दवा बाजार में उतारी थी। एसोसिएशन के अनुसार, यह सभी एलोपैथिक नाम हैं। बाबा को इनका आयुर्वेदिक नाम बताना चाहिए। यह सभी कैमिकल हैं, तो रामदेव बताएं, उन्होंने दवा कैसे बनाई? उन्होंने सीएम व सीएस को पत्र लिखकर पतंजलि का ड्रग लाइसेंस रद्द करने की मांग की थी। 

फार्मा कंपनियों के खिलाफ भी खोला थ मोर्चा

रामदेव बाबा का कहना था कि दवा ही नहीं, टेस्ट और ऑपरेशन माफिया भी हैं, जो मरीजों को लूट रहे हैं। स्वामी रामदेव ने आरोप लगाया था कि कुछ बुरे डाक्टर महंगी दवाएं ही मरीजों के पर्चे पर लिखते हैं। ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं लिखने वाले डॉक्टर कमीशन खाते हैं। जेनरिक दवाएं न लिखकर उसी साल्ट की महंगी दवाएं लिखते हैं। इनका इस खेल को बंद करवाने के लिए कोर्ट भी जाऊंगा। 

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