जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में नया खुलासा
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जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में पीड़ित युवती ने अब मुकदमे की सारी जिम्मेदारी पुलिस पर डाल दी है। दुराचार होने के आरोप, मुकदमा दर्ज कराने और मजिस्ट्रेटी बयान से एक-एक कर मुकरने के बाद युवती ने कहा है कि उसने मामले की जांच कर रही विवेचक सीओ को पहले ही बता दिया था कि जेपी जोशी निर्दोष हैं।
युवती ने कहा कि उसके साथ दुराचार नहीं हुआ था। उसके मुताबिक उसने ऋतु कंडियाल के भी निर्दोष होने की बात बताकर सीओ से मदद मांगी थी।
बृहस्पतिवार को एडीजे पंचम नीना अग्रवाल की अदालत में युवती की गवाही हुई। युवती ने कहा कि 22 नवंबर 2013 को कुछ लोगों ने उससे मारपीट कर दिल्ली में जबरन जेपी जोशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें बाद में ऋतु कंडियाल का नाम भी शामिल किया गया।
कहा कि वह जोशी से मिली थी, लेकिन उसके साथ दुराचार नहीं हुआ था। युवती ने कहा कि एक न्यूज चैनल से जुड़े कुछ लोगों ने उसे दिल्ली के लक्ष्मीनगर में किसी अपार्टमेंट में ठहराया था। इन लोगों ने ही उसके लिए वकील भी किया।
सीओ को बताया था गलत है केस
पीड़िता ने कहा कि इस मामले में अब लिखी जा रही गवाही से पहले उसने किसी अन्य अदालत, हाईकोर्ट या किसी अधिकारी के सामने यह लिखकर नहीं दिया था कि जेपी जोशी और ऋतु कंडियाल निर्दोष हैं।
युवती ने दावा किया कि उसने मामले की विवेचक सीओ ममता बोरा को मौखिक तौर पर बताया था कि जो कुछ हो रहा है, गलत है। उसने सीओ से मदद मांगते हुए कहा था कि दोनों आरोपी निर्दोष हैं।
नहीं मालूम सीडी कहां से आई
युवती ने अदालत में कहा कि उसे बताया गया था कि मामले में कोई सीडी भी बतौर साक्ष्य रखी गई है। उसके अनुसार उसे इस सीडी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, न ही उसने कभी देखा कि इस सीडी में क्या है। युवती के अनुसार उसने न तो कभी यह सीडी पुलिस को सौंपी, न उसे इसके मुकदमे में बतौर साक्ष्य शामिल किए जाने के बारे में कुछ पता था।
ऋतु ने मिलाया था जोशी से
पीड़िता ने कहा कि पूर्व कांग्रेस नेत्री और यौन शोषण मामले में आरोपी ऋतु कंडियाल ने ही उसे तीन साल पहले जेपी जोशी से मिलाया था, लेकिन ऋतु ने कभी यह नहीं कहा कि जोशी उसके अच्छे मित्र हैं।
युवती के मुताबिक इसके बाद वह प्राइवेट नौकरी के लिए दो-तीन बार जोशी से मिली थी, लेकिन जोशी ने उसे कभी सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन नहीं दिया था।
अभियोजन ने घोषित किया पक्षद्रोही
युवती के आरोपों से पलटने के बाद अभियोजन पक्ष ने उसे पक्षद्रोही घोषित कर
जिरह शुरू करने का प्रार्थनापत्र दिया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
जेपी जोशी के अधिवक्ता एसके धर और आलोक बहुगुणा ने कहा कि पीड़िता ने कोर्ट
में सशपथ बयान दिए हैं कि जोशी के खिलाफ उसने दबाव में रिपोर्ट दर्ज कराई
थी। मामले की अगली सुनवाई 20 अक्तूबर को होगी।
कानून की नजर से
युवती ने सीओ को मौखिक तौर पर जो भी कहा, उसके केस के इतना लंबा खिंच जाने के बाद अब कोई मायने नहीं हैं। पुलिस को दिए बयान (धारा 161 के तहत) को तो वैसे भी अदालत नहीं मानती। युवती चाहती तो पहले ही मजिस्ट्रेटी बयान (164) में यह बात कह सकती थी।
आरोपों से मुकरने के मामले में अदालत संज्ञान ले तो अब युवती पर ही केस दर्ज हो सकता है। दूसरी ओर, जोशी को भी अभी फायदा होने वाला नहीं है। वजह यह है कि युवती के पलटने के बाद अब इसमें दूसरे गवाहों की गवाही अहम है। वे क्या कहते हैं, उसके आधार पर ही आगे फैसला हो सकता है।
-रजिया बेग, पूर्व अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड।