नारी जाति को बदनाम करने की बजाए अपने संतों पर अंकुश लगाए अखाड़ा परिषद्: संत समिति
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आश्रमों महिलाओं के प्रवेश को वर्जित करने को लेकर अखाड़ा परिषद के बयानबाजी पर अखिल भारतीय संत समिति उबल पड़ी है। संत समिति ने कहा है कि अखाड़ा परिषद अपने संतों पर अंकुश लगाए, केवल नारी जाति को बदनाम न करे। परिषद के बयानों से ऐसा लग रहा है कि मानो आश्रम में आने वाली सभी औरतें खतरनाक हों। खतरा कहां है, यह खुद अखाड़ा परिषद तलाशे।
गरुड़ आश्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगम्बर ने कहा कि महामंडलेश्वर तो स्वयं चेलियां बना रहे हैं। यह अंकुश संतों पर लगना चाहिए कि वे केवल पुरुषों को ही अपना शिष्य बनाएं।
कमी कुछ साधु संतों में है और दोष नारी जाति का निकाला जा रहा है। ऐसा लगता है कि साधुओं के जेल जाने के पीछे सिर्फ औरतों का हाथ है। वास्तव में जो जेल में हैं उनके कारनामे संतोचित नहीं थे। उन्होंने तो संत नाम को भी कलंकित कर दिया था। संत समिति यह जानकर खासी हैरान है कि उन कथित साधुओं का दंड समूची संत परंपरा को भुगतना पड़ रहा है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की ओर से ऐसा दिखाया गया है कि मानो औरतें ही बाबाओं को खराब कर रही हैं। यह पूरी नारी जाति का अपमान है, जिसके लिए अखाड़ा परिषद को जवाब देना होगा। अखिल भारतीय संत समिति ने मांग की है कि संत जगत को शुद्ध करने का अभियान सभी को चलाना चाहिए। इसके लिए संत समिति भी अपनी ओर से कदम उठा रही है।