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उत्तराखंड में बेकाबू हुई आग, वायुसेना के हेलीकॉप्टर बरसा रहे पानी

Mon, 02 May 2016 02:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गढ़वाल
ब्यूरो/अमर उजाला, गढ़वाल Updated Mon, 02 May 2016 02:32 PM IST
सार

  • सुमाड़ी, खिर्सू और पौड़ी के जंगलों से शुरू हुआ वायुसेना का अभियान
  • मंडल में अब तक 680 घटनाओं में 1196.53 हेक्टेयर जंगल जलकर राख

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air force helicopter dropped water on burning forest in uttarakhand.
जंगल की आग बुझाने को वायुसेना ने मोर्चा संभाल रखा है। - फोटो : AmarUjala

विस्तार

गढ़वाल मंडल में बेकाबू हुई जंगलों की आग बुझाने के लिए रविवार से वायुसेना ने भी मोर्चा संभाल लिया। वायु सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर ने पौड़ी जिले से अभियान शुरू किया। पहले दिन सुमाड़ी, पौड़ी और खिर्सू के जंगलों में पानी की बौछार कर आग बुझाई गई।

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हालांकि इन जंगलों में आग के पूरी तरह बुझने के संबंध में कुछ नहीं कहा जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि स्थलीय निरीक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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रविवार को तीन बजे से शुरू हुआ अभियान शाम साढे़ पांच बजे तक चला। इस दौरान हेलीकाप्टर ने सात राउंड लगाए। धुंध बढ़ने और रोशनी कम होने से साढे़ पांच बजे अभियान रोक दिया गया।

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अभी भी धधक रहे गढ़वाल के जंगल

air force helicopter dropped water on burning forest in uttarakhand.
जंगल की आग - फोटो : AmarUjala

शासन की ओर से आग पर नियंत्रण पाने के लिए पूरी ताकत झोंक दिए जाने के बावजूद गढ़वाल के जंगल अभी भी धधक रहे हैं। वन विभाग की ही मानें तो मंडल में अब तक 680 घटनाओं में 1196.53 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा जलकर राख हो गई है। इसमें 54.55 हेक्टेयर प्लांटेशन वाला वन क्षेत्र भी शामिल है।

पौड़ी जिले के लैंसडौन में जंगल में लगी आग कैंट स्कूल की रसोई तक पहुंच गई। सेना के दमकल ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

उत्तरकाशी जिले में गंगा घाटी के जंगलों में भड़की आग थमने को नहीं है। रवाईं घाटी के जंगल भी अब आग की चपेट में आने लगे हैं। सीजन में अभी तक जिले में करीब 53 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं।

चिपको आंदोलन से जुड़ा जंगल भी आग की चपेट

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जंगल में आग - फोटो : AmarUjala

टिहरी जिले में आग बुझाने के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी गई है। जिले के चंबा क्षेत्र के अंतर्गत अदवाणी का शाल, चीड़ मिश्रित जंगल भी आग से नहीं बचा। घटना के लिए वन विभाग को जिम्मेदार बताते हुए गुस्साए लोगों ने प्रदर्शन किया।

अदवाणी के जंगल का नाम चिपको आंदोलन से जुड़ा हुआ है। रुद्रप्रयाग जिले में अगस्त्यमुनि ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोट तल्ला के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और भोजन माता के स्कूल के निकट पहुंची जंगल की आग बुझाने से बड़ा हादसा होने से टल गया।

दावानल ने मचाई कितनी तबाही, पूरा आंकड़ा एक नजर में

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जंगल में आग - फोटो : AmarUjala

30 अप्रैल तक

गढ़वाल-603 घटनाएं
1039.83 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित

कुमाऊं-318 घटनाएं
671.31 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित
-
वन्य जीव क्षेत्र-161 घटनाएं
558.15 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित
वनाग्नि की कुल घटनाएं-1082
कुल वन क्षेत्र प्रभावित-2269.29 हेक्टेयर

प्रदेश के 13 जिलों में हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर छोड़कर बाकी सभी जिले वनाग्नि से प्रभावित हैं

वनाग्नि से क्षति रुपयों में
गढ़वाल-1,024,990.00 रुपये
कुमाऊं-831,030.00 रुपये
वन्य जीव क्षेत्र-329,075.00 रुपये
कुल-2,185,095.00 रुपये

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