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Amar Ujala Samvad: राजधानी देहरादून में लगातार घटती जा रही कृषि भूमि ने बढ़ाई चिंता, पांच साल में 30 % हुई कम

Mon, 01 May 2023 04:54 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 01 May 2023 04:54 PM IST
सार

दूनवासियों का मानना है कि देहरादून के पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा कर कितना निर्माण किया जा सकता है, इसकी जानकारी भी मास्टर प्लान में दी जानी चाहिए। कहा कि वर्तमान में देहरादून का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के करीब है। मास्टर प्लान के अनुसार किए जाने वाले निर्माणों से तापमान कितना प्रभावित होगा यह स्पष्ट होना चाहिए।

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Agricultural land reduced by 30 percent in Dehradun residents expressed concern master plan read more Updates
देहरादून अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दून में कृषि भूमि लगातार घटती जा रही है। वर्ष 2018 के मास्टर प्लान में दून में 40 प्रतिशत कृषि भूमि दर्शाई गई थी, लेकिन वर्तमान मास्टर प्लान में मात्र 10 प्रतिशत ही कृषि भूमि दर्शाई गई हैं। यानी कि विगत पांच सालों में तीस प्रतिशत कृषि भूमि कम हो गई है।

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कृषि भूमि के घटते रकवे से दूनवासी चिंतित हैं। अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में उन्होंने मांग उठाई मास्टर प्लान में कृषि भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए। अमर उजाला की ओर से मास्टर प्लान को लिए हुए संवाद में दूनवासियों का कहना था कि घटते कृषि भूमि का कारण अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग है।

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उनका मानना है कि इसके लिए जरूरी है कि निगम में शामिल 40 वार्डों और अन्य जगह कृषि भू-भाग को बचाने के लिए कठोर नियम बनाए जाएं। नए मास्टर प्लान में इसका स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। लोगों ने कहा कि मास्टर प्लान में नदी, नालों, वनों, वन भूमि की वास्तविक सीमा को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए, जिससे कि नदी, नालों, वनों, वन भूमि को सुरक्षित रखने में कोई समस्या उत्पन्न न हो।

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पेड़ों को काटकर न हो कोई भी निर्माण

वनों, पेड़ों को काटकर किए जाने वाले किसी भी निर्माण को अनुमति देने पर पूर्णत: प्रतिबंध होना चाहिए। नदी नालों पर हुए अवैध कब्जों की स्थिति को भी मास्टर प्लान में दर्शाया जाना चाहिए। ताकि, इनको हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सके। दूनवासियों का मानना है कि देहरादून के पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा कर कितना निर्माण किया जा सकता है, इसकी जानकारी भी मास्टर प्लान में दी जानी चाहिए। कहा कि वर्तमान में देहरादून का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के करीब है। मास्टर प्लान के अनुसार किए जाने वाले निर्माणों से तापमान कितना प्रभावित होगा यह स्पष्ट होना चाहिए। साथ ही मास्टर प्लान के अनुरूप होने वाले निर्माण के अनुसार वर्तमान में उत्पन्न कूड़े में कितनी बढ़ोतरी होगी और इसका स्थायी समाधान होगा। यह भी मास्टर प्लान में स्पष्ट होना चाहिए।

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