फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   after kedarnath disaster gaurikund water pure

केदारनाथ आपदा में मलबे के नीचे दबे गौरीकुंड का जल है उतना ही शुद्ध

Wed, 30 Nov 2016 02:52 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 30 Nov 2016 02:52 PM IST
विज्ञापन
after kedarnath disaster gaurikund water pure
gaurikund - फोटो : amar ujala

वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा में मलबे में दबे गौरीकुंड के जल की शुद्धता पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। इसके रसायन और तापमान बिल्कुल पहले जैसे ही हैं।

विज्ञापन


मलबे के अंदर गौरीकुंड की ‘जियो थर्मल फील्ड’ भी सुरक्षित है। पौराणिक महत्व का यह कुंड आपदा के दौरान पहाड़ों पर हुए भूस्खलन के मलबे में दब गया था। बाद में विज्ञानियों ने इसे खोज निकाला। उनका कहना है कि मलबा हटाए जाने के बाद श्रद्धालु फिर पहले की तरह ही इसके पवित्र जल में स्नान कर सकेंगे।
विज्ञापन


केदारनाथ मंदिर से तकरीबन 18 किमी दूर स्थित गौरीकुंड का पौराणिक महत्व है। यह देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मान्यता है कि इसके पवित्र गर्म जल में स्नान करने के बाद बीमारियां ठीक हो जाती हैं। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मंदाकिनी के तट पर स्थित इस कुंड में स्नान करके केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं। वर्ष 2013 में आपदा के दौरान भीषण बारिश से भूस्खलन होने लगा और हर तरफ मलबा भर गया। इसी मलबे ने गौरीकुंड को भी ढंक लिया।

अपनी पूर्व स्थिति में आ जाएगा गौरीकुंड

after kedarnath disaster gaurikund water pure
gaurikund - फोटो : amar ujala

बाद में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एके गुप्ता के दिशा-निर्देश पर विज्ञानियों की टीम गौरीकुंड को डेढ़ महीने पहले खोज निकाला। फिर, इसके पानी की जांच की गई। दिलचस्प यह है कि आपदा से यहां भूपरिक्षेत्र में आए बदलाव के बावजूद गौरीकुंड बिल्कुल सुरक्षित है। मलबे से ढके होने के कारण पानी अंदर ही अंदर मंदाकिनी में चला जा रहा है। मलबा हटते ही गौरीकुंड अपनी पूर्व स्थिति में आ जाएगा।

आपदा में गौरीकुंड के ऊपर मलबा आ गया था। जैसा सोचा जा रहा था, ‘डिस्लोकेट’ नहीं हुआ है। सिर्फ मलबा हटाए जाने की जरूरत है। इस गर्म झरने के सभी 10 स्रोत पहले की तरह ही हैं। पानी के ‘डिस्चार्ज’ पर भी फर्क नहीं पड़ा।
- डॉ. समीर तिवारी, गंगोत्री प्रभारी, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान
 
ये है खासियत 
-गौरीकुंड के गर्म झरने का तापमान 60 डिग्री सेंटीग्रेड है
-इसकी जियो थर्मल फील्ड 20 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी है
-गौरीकुंड के गर्म झरने में पानी के 10 स्रोत हैं
-गर्म झरने से प्रति मिनट 200 लीटर पानी निकलता है
-गौरीकुंड के गर्म झरने के पानी में सल्फर, बोरोन, कैल्शियम, मैग्नीजियम, सीजीएम, रूबीडियम, लीथियम आदि तत्व पाए जाते हैं। इससे चर्म रोग, जोड़ों का दर्द, घाव आदि जल्दी ठीक हो जाते हैं।
-पौराणिक मान्यता है कि देवताओं के आर्शीवाद से फलीभूत गर्म झरने बाढ़, भूकंप सरीखी प्राकृतिक आपदाओं में नष्ट नहीं होंगे।
-गौरीकुंड का पहला अध्ययन जियोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया ने वर्ष 1982 में किया था।

चारधामों में हैं कुंड
केदारनाथ-गौरीकुंड
बदरीनाथ-तप्त कुंड
गंगोत्री-गंगनानी कुंड
यमुनोत्री-सूर्य कुंड

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed