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बोले दलाल..चोखा है एडमीशन का 'धंधा'
देहरादून/ब्यूरो
Updated Tue, 13 Aug 2013 10:34 PM IST
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कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के पूर्व पीआरओ युद्धवीर की हत्या ने साफ कर दिया कि प्रदेश के शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश का गोरखधंधा खूब फलफूल रहा है।
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प्राइमरी शिक्षा से लेकर मेडिकल और इंजीनियरिंग तक में प्रवेश के लिए संस्थान मोटी रकम वसूले ही हैं। प्रवेश के नाम पर दलाली भी खूब होती है। एडमीशन के इस धंधे में सफेदपोशों और दलालों का गठजोड़ सक्रिय है। युद्धवीर की हत्या ने भी यह उजागर कर दिया।
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राजधानी के दो निजी मेडिकल कालेज के साथ ही अब यूनिवर्सिटी बन चुके एक इंजीनियरिंग संस्थान में भी प्रवेश दिलाने के लिए दलाल सक्रिय रहते हैं। बताया जाता है कि इन संस्थानों के एजेंट दूसरे राज्यों से छात्रों को पकड़ कर लाते हैं। इसके बाद प्रबंधन सीट पर एडमीशन दिलाने और मनचाहा ट्रेड दिलाने के लिए इंजीनियरिंग में 20 से 25 लाख रुपये वसूलते हैं। एमबीबीएस की सीटों पर 35 से 40 लाख रुपये प्रति सीट वसूली जाती है।
जितने दलाल, उतनी बढ़ जाती है फीस
बिहार के एक छात्र ने देहरादून के एक नामी इंजीनियरिंग संस्थान में एडमिशन के लिए संस्थान के एजेंट से पटना में संपर्क साधा। एजेंट ने उसे किसी दूसरे के पास भेजा। उस व्यक्ति ने देहरादून आकर किसी अन्य को एडमीशन का काम सौंपा। छात्र की मानें तो उसकी मनपसंद ट्रेड दिलवाने के लिए छह लाख रुपये अतिरिक्त मांगे गए। उसका प्रवेश हुआ अथवा नहीं, यह साफ नहीं है। संस्थान के शिक्षण शुल्क का ड्राफ्ट वह अलग से बनवाकर ले आया है।
नामी अंग्रेजी स्कूलों में भी एडमीशन का धंधा
राजधानी के कुछ नामी अंग्रेजी स्कूलों में भी एडमिशन का धंधा फलफूल रहा है। नेताओं की सिफारिश इन स्कूलों में कम चलती है। यहां अफसरों की सिफारिश लगवाई जाती है। बदले में छात्र के अभिभावक से स्कूल को भी मोटी रकम दिलवाई जाती है। साथ में अपनी जेब भरी जाती है। इस धंधे में संस्थानों की मिलीभगत कई बार सामने आ चुकी है। यही कारण है राजधानी के कुछ नामी स्कूलों में सामान्य आय वालों के बच्चे को प्रवेश नहीं मिल पाता।
डीएवी इस धंधे का बड़ा बाजार
डीएवी पीजी कालेज एडमीशन के गोरखधंधे का बड़ा बाजार बन चुका है। यहां छात्र नेता से लेकर स्थापित राजनेता तक प्रवेश के धंधे को प्रश्रय देते हैं। कुछ छात्र नेता इसी धंधे से जेब खर्च निकालते हैं। पिछले वर्ष ही इसका खुलासा हो चुका है। छात्र नेताओं ने सैकड़ों विद्यार्थियों का फर्जी एडमीशन करवा दिया, जिनका न कालेज में शुल्क जमा था और न ही आवेदन पत्र। यहां तय सीट से ज्यादा प्रवेश होना छात्र नेताओं के इस गोरखधंधे की ओर इशारा करता है।
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