मन की बात: एक्टर आयुष्मान खुराना की पत्नी ने बताया जिदंगी में क्या बनना चाहती थीं, लेकिन एक शौक ने बदल दिया सब कुछ
प्रसिद्ध गीतकार प्रसून, जोशी, गायक सोनू निगम, सोना महापात्रा, सीमा आनंद, रस्किन बांड, इम्तियाज अली, नयनिका महतानी, शिव कुणाल वर्मा, अनिरुद्ध चक्रवर्ती, मोनिषा दत्ता, संजय देसाई, रिचा द्विवेदी जैसी हस्तियों ने देहरादून लिटरेचल फेस्टिवल में अपने अनुभव साझा किए।
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‘मैं डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन लिखने के शौक ने मुझे लेखक बना दिया। अब तक पांच किताबें लिख चुकी हूं।’ यह कहना है फिल्म निर्माता-लेखक ताहिरा कश्यप खुराना का जिन्होंने देहरादून लिटरेचल फेस्टिवल के चौथे संस्करण के अंतिम दिन ने मदरहुड पर लिखी अपनी पुस्तक ‘द 7 सिन्स ऑफ बीइंग ए मदर’ पर ऋचा अनिरुद्ध के साथ चर्चा की।
ताहिरा ने बताया कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक वो जो स्पष्ट रूप से जानते हैं कि वे अपनी जिंदगी में क्या चाहते हैं, और दूसरे वह होते हैं जिन्हें पता नहीं है होता कि वह जिंदगी में क्या बनना चाहते हैं। ताहिरा खुद को दूसरी श्रेणी में रखती थीं।
जीवन के उतार-चढ़ाव में ताहिरा को उनके लिखने के जुनून ने उन्हें लेखक बना दिया। उन्होंने कहा कि अभ्यास ने मुझे अपने कठिन दिनों से बाहर निकलने और नींव की एक ठोस भावना प्राप्त करने में मदद की। जीवन में कभी भी नकारात्मकता के आगे झुकना नहीं चाहिए।
साहित्य, कला, सिनेमा पर आधारित कई सत्र किए गए आयोजित
देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे और अंतिम दिन साहित्य, कला, सिनेमा पर आधारित कई सत्र आयोजित किए गए। इसमें कला-साहित्य, सिनेमा से जुड़ तमाम लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। अगले वर्ष तीन दिवसीय आयोजन को और बड़ा आकार देने पर भी मंथन हुआ, जिस पर सभी ने अपनी सहमति दी।
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ये हस्तियां रहीं मौजूद
प्रसिद्ध गीतकार प्रसून, जोशी, गायक सोनू निगम, सोना महापात्रा, सीमा आनंद, रस्किन बांड, इम्तियाज अली, नयनिका महतानी, शिव कुणाल वर्मा, अनिरुद्ध चक्रवर्ती, मोनिषा दत्ता, संजय देसाई, रिचा द्विवेदी, विश्वास पार्चरे, डा. क्षितिजा सिंह, प्रीति शेनॉय, किरन मनराल, ताहिरा कश्यप, रिचा अनिरुद्ध, पूजा मारवाह, बिजॉय सवान, वेणु अग्रहर समेत तमाम बड़े साहित्यकार कार्यक्रम में शामिल हुए। डीजीपी अशोक कुमार दूसरे और तीसरे दिन सत्र में शामिल हुए। तीन दिवसीय यह आयोजन कला साहित्य को पसंद करने वालों के लिए बौद्धिकता की खुराक रहा। ज्यादातर लोगों ने आयोजन की सराहना की और भविष्य में इसे और बड़ा आकार देने की बात कही।