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ट्रेन हादसाः चालकों पर कार्रवाई, गेटमैन को बख्शा
देहरादून/मनमीत रावत
Updated Thu, 08 Aug 2013 08:13 PM IST
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देहरादून में गुरुवार को हुए ट्रेन हादसे में गेटयुक्त रेलवे क्रासिंग पर हादसे के बाद रेलवे की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं। ट्रेन के आने के नियत समय के बावजूद फाटक बंद न होना गंभीर चूक है।
इसके बावजूद स्थानीय रेलवे प्रशासन गेटमैन पर कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है। दूसरी ओर, उच्चाधिकारियों को भेजी प्रारंभिक रिपोर्ट में लोको पायलट (ट्रेन चालक) रतिराम और असिस्टेंट कृष्ण कुमार को दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
वहीं, गेटमैन आशाराम ने हादसे के वक्त सड़क पर अधिक ट्रैफिक होने के कारण गेट बंद न कर पाने का बयान अधिकारियों को दिया है। जबकि, प्रत्यक्षदर्शी की मानें तो उस वक्त सड़क पर इक्का-दुक्का वाहन ही थे।
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यह है नियमः
स्टेशन अधीक्षक एसडी डोभाल की मानें तो ट्रेन आने के समय से दस मिनट पूर्व क्रॉसिंग के गेट बंद करने का नियम है। रेलवे सूत्रों के अनुसार ट्रेन के आने के समय से पूर्व स्टेशन मास्टर का रेलवे टेलीफोन से गेटमैन को सूचना देना जरूरी होता है।
जवाब मांगते सवालः
-फाटक खुला था और ट्रेन को रेड सिग्नल दिया गया था। इसके बावजूद चालक ने ट्रेन नहीं रोकी, हालांकि गति धीमी कर दी थी। सिग्नल बंद होने के बावजूद चालक ने ट्रेन रोकी क्यों नहीं?
-ट्रेन आने के बावजूद आखिर गेटमैन ने वक्त रहते फाटक बंद क्यों नहीं किया। गेटमैन को रेलवे फोन पर स्टेशन मास्टर द्वारा ट्रेन के आने की सूचना दी जाती है। इस मामले में क्या ट्रेन आने की सूचना दी गई थी? सूत्रों की मानें तो गेटमैन के पास रखा उपकरण खराब है।
इनकी भी सुनिएः
रेड सिग्नल दिया गया था तो चालकों को ट्रेन रोकनी चाहिए थी। गेट बंद करवाने के बाद ही उन्हें आगे बढ़ना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रेड सिग्नल के बावजूद ट्रेन आगे बढ़ाई गई, जिससे हादसा हुआ। ट्रैफिक अधिक होने के कारण गेट बंद नहीं किया जा सका।
- एसडी डोभाल, रेलवे स्टेशन अधीक्षक
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इसके बावजूद स्थानीय रेलवे प्रशासन गेटमैन पर कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है। दूसरी ओर, उच्चाधिकारियों को भेजी प्रारंभिक रिपोर्ट में लोको पायलट (ट्रेन चालक) रतिराम और असिस्टेंट कृष्ण कुमार को दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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वहीं, गेटमैन आशाराम ने हादसे के वक्त सड़क पर अधिक ट्रैफिक होने के कारण गेट बंद न कर पाने का बयान अधिकारियों को दिया है। जबकि, प्रत्यक्षदर्शी की मानें तो उस वक्त सड़क पर इक्का-दुक्का वाहन ही थे।
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यह है नियमः
स्टेशन अधीक्षक एसडी डोभाल की मानें तो ट्रेन आने के समय से दस मिनट पूर्व क्रॉसिंग के गेट बंद करने का नियम है। रेलवे सूत्रों के अनुसार ट्रेन के आने के समय से पूर्व स्टेशन मास्टर का रेलवे टेलीफोन से गेटमैन को सूचना देना जरूरी होता है।
जवाब मांगते सवालः
-फाटक खुला था और ट्रेन को रेड सिग्नल दिया गया था। इसके बावजूद चालक ने ट्रेन नहीं रोकी, हालांकि गति धीमी कर दी थी। सिग्नल बंद होने के बावजूद चालक ने ट्रेन रोकी क्यों नहीं?
-ट्रेन आने के बावजूद आखिर गेटमैन ने वक्त रहते फाटक बंद क्यों नहीं किया। गेटमैन को रेलवे फोन पर स्टेशन मास्टर द्वारा ट्रेन के आने की सूचना दी जाती है। इस मामले में क्या ट्रेन आने की सूचना दी गई थी? सूत्रों की मानें तो गेटमैन के पास रखा उपकरण खराब है।
इनकी भी सुनिएः
रेड सिग्नल दिया गया था तो चालकों को ट्रेन रोकनी चाहिए थी। गेट बंद करवाने के बाद ही उन्हें आगे बढ़ना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रेड सिग्नल के बावजूद ट्रेन आगे बढ़ाई गई, जिससे हादसा हुआ। ट्रैफिक अधिक होने के कारण गेट बंद नहीं किया जा सका।
- एसडी डोभाल, रेलवे स्टेशन अधीक्षक