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Dehradun News: कार फाइनेंस कराने के नाम पर धोखाधड़ी के 17 वर्ष पुराने मामले में आरोपी दोषमुक्त

Tue, 11 Nov 2025 02:05 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 11 Nov 2025 02:05 AM IST
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Accused acquitted in 17-year-old car finance fraud case
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि शंकर मिश्रा की अदालत ने कार फाइनेंस करने के नाम पर ठगी के 17 वर्ष पुराने मामले में हिमाचल प्रदेश के पांवटा क्षेत्र के देवीनगर निवासी सुरेश को दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष न्यायालय के समक्ष अपराध को साबित करने में असफल रहा। आरोपी मामले में 20 दिन तक जेल में बंद रहा था। प्रदीप चौहान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 28 मई 2007 को उन्होंने एक कार फाइनेंस कराने के लिए अभिषेक से बात की थी। एक जून 2007 को अभिषेक उनके घर आया था। उसने 86,700 रुपये और 11 ब्लैंक चेक मांगे। उन्होंंने रुपये और चेक दे दिए। ऋण संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। अभिषेक ने उन्हें एडवांस रसीद दी। उसने तीन जून 2007 को बताया कि कंपनी से कार फाइनेंस नहीं हो पाएगी। उसने कहा कि उनके रुपये युसुफ को दे दिए हैं। वह आईसीआईसीआई बैंक से कार फाइनेंस करवा देगा।
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चार जून 2007 को युसुफ एक नई कार लेकर आया। उसने कार उनको सौंप दी। युसुफ ने उनसे 15,570 रुपये और लिए। 20 दिन बाद उसने तीन हजार रुपये और लिए थे। उन्होंने अभिषेक और युसुफ को कुल 1,05,270 रुपये दिए। दोनों ने कार के दस्तावेज और पंजीकरण प्रमाणपत्र बार-बार कहने के बाद भी नहीं दिया। फिर युसुफ का फोन आया कि कार फाइनेंस नहीं हो पाई। उन्होंंने कहा कि सुरेश कार फाइनेंस करवाएगा। सुरेश ने बताया कि उसने कार को फाइनेंस करवा दिया है। वह उनसे 26 हजार रुपये मांगने लगा। उन्हें शक हुआ तो उन्होंंने ऑटोमोबाइल्स कंपनी को सूचनापत्र भेजा लेकिन कोई जवाब नहीं आया। वह कंपनी में मिलने गए तो अधिकारी रमेश ने बताया कि कार के लिए 49,280 रुपये जमा किए गए हैं, जबकि 54,000 रुपये शेष हैं। उन्होंंने अधिकारी को बताया कि वह युसुफ को 1,05,270 रुपये का भुगतान कर चुके हैं। अधिकारी ने कहा कि 54,000 जमा करो और कार के कागज ले जाओ। चार अप्रैल 2008 को विकासनगर कोतवाली पुलिस ने धोखधड़ी के मामले में अभिषेक चंदेल, युसुफ, सुरेश और विंशु बैंक मैनेजर इंडसइंड बैंक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष न्यायालय के समक्ष सुरेश पर लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर पाया। न्यायालय ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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